भोपाल और इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र को नई सड़कों से मिलेगी रफ्तार, सिंहस्थ 2028 से पहले पूरे होंगे बड़े प्रोजेक्ट: CM यादव

भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में तेजी से विकसित हो रहा सड़क नेटवर्क मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति दे रहा है। खासतौर पर भोपाल और इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रों को नई सड़क परियोजनाओं से प्रत्यक्ष लाभ मिलने लगा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जबलपुर और ग्वालियर जैसे शहर भी अधोसंरचना विकास के जरिए आर्थिक रूप से और मजबूत होंगे।
मुख्यमंत्री ने गुरुवार को मंत्रालय में लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान सिंहस्थ 2028 से पहले सभी प्रमुख सड़क परियोजनाओं को पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, मुख्य सचिव अनुराग जैन और विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।
सिंहस्थ से पहले पूरे होंगे सड़क निर्माण कार्य
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर-उज्जैन सिक्स लेन, उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोर लेन और इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड हाईवे जैसी परियोजनाएं पूरे क्षेत्र के विकास को नई दिशा देंगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आमजन की सुविधा और सिंहस्थ मेले की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सड़क निर्माण कार्य समय सीमा से पहले पूरे किए जाएं।
सड़क हादसे कम करने पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री ने सड़क सुरक्षा को लेकर विभाग के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए विभिन्न विभागों को मिलकर काम करना होगा।
उन्होंने किसान कल्याण वर्ष के तहत गांवों से शहरों तक फल और सब्जियां लाने वाले किसानों को हेलमेट वितरण अभियान में लोक निर्माण विभाग की भागीदारी बढ़ाने के निर्देश भी दिए।
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में वर्तमान में 481 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं। दुर्घटनाओं को कम करने के लिए स्कूल जोन में गति नियंत्रण, चेतावनी संकेत, रोड मार्किंग और लेन अनुशासन जैसे उपाय लागू किए जा रहे हैं।
निर्माण स्वीकृति प्रक्रिया में किए गए बदलाव
बैठक में विभाग द्वारा निर्माण कार्यों की स्वीकृति प्रक्रिया में किए गए तकनीकी सुधारों की भी जानकारी दी गई। अब परियोजनाओं की मंजूरी से पहले यातायात घनत्व, भविष्य की जरूरत, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और जीआईएस आधारित प्लानिंग का विश्लेषण किया जा रहा है।
साथ ही पीएम गति शक्ति पोर्टल के जरिए मार्गों की अलाइनमेंट और मल्टी मॉडल इंफ्रास्ट्रक्चर समन्वय की भी जांच की जा रही है।
रिंग रोड और बायपास परियोजनाओं में तेजी
मुख्यमंत्री ने बड़े शहरों में बन रहे रिंग रोड प्रोजेक्ट्स में तेजी लाने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि भोपाल पश्चिमी बायपास, जिसकी लंबाई 35.6 किलोमीटर है, उसे अगले ढाई वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन के रिंग रोड अगले डेढ़ वर्ष में पूरे होने की संभावना जताई गई है। वहीं रतलाम, देवास, सागर, सतना, रीवा और कटनी जैसे शहरों में भी नए रिंग रोड विकसित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
रेलवे ओवर ब्रिज और एलिवेटेड कॉरिडोर से मिलेगी राहत
बैठक में जानकारी दी गई कि रेलवे क्रॉसिंग पर जाम और दुर्घटनाओं को कम करने के लिए प्रदेश में बड़े स्तर पर रेलवे ओवर ब्रिज और अंडर ब्रिज बनाए जा रहे हैं।
प्रदेश में पीडब्ल्यूडी सड़कों पर अब तक 105 रेलवे ओवर ब्रिज बनाए जा चुके हैं। इसके अलावा सड़क विकास निगम और एनएचएआई के माध्यम से भी कई परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं।
जबलपुर में एलिवेटेड कॉरिडोर का काम पूरा हो चुका है, जबकि भोपाल और ग्वालियर में लगभग 75 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। इंदौर और उज्जैन में भी कॉरिडोर निर्माण कार्य शुरू हो चुके हैं।
प्रगति पथ परियोजनाओं से बदलेगी प्रदेश की तस्वीर
प्रदेश में छह बड़े प्रगति पथ निर्माणाधीन हैं। इनमें नर्मदा प्रगति पथ और मालवा-निमाड़ विकास पथ के कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इसके अलावा मध्यभारत विकास पथ, बुंदेलखंड विकास पथ और विंध्य एक्सप्रेस-वे जैसी परियोजनाओं पर भी काम जारी है बैठक में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह और प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह ने विभागीय कार्यों की प्रगति की विस्तृत जानकारी दी।



