भोपाल में आवारा कुत्तों का बढ़ता खतरा, रोज 81 लोग हो रहे डॉग बाइट का शिकार; सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बढ़ी चिंता

भोपाल: सार्वजनिक स्थानों पर बढ़ते आवारा कुत्तों के खतरे को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बीच राजधानी भोपाल में स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है। नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक शहर में करीब 1.20 लाख से अधिक आवारा कुत्ते मौजूद हैं, जबकि इनके लिए एक भी स्थायी डॉग शेल्टर उपलब्ध नहीं है। हालात ऐसे हैं कि रोजाना औसतन 81 लोग डॉग बाइट का शिकार होकर अस्पताल पहुंच रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने दिए सख्त निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थानों से खतरनाक और आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई कुत्ता रेबीज संक्रमित या अत्यधिक खतरनाक पाया जाता है, तो उसे इंजेक्शन देकर समाप्त किया जा सकता है।
कोर्ट ने नवंबर 2025 में जारी नसबंदी और पुनर्वास संबंधी आदेशों का पालन अनिवार्य बताते हुए कहा है कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर अवमानना की कार्रवाई भी हो सकती है।
भोपाल में नहीं बना एक भी डॉग शेल्टर
नगर निगम ने पिछले साल सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और खेल परिसरों सहित 810 जगहों को ‘नो-डॉग जोन’ के रूप में चिह्नित किया था। दावा किया गया था कि इन इलाकों से आवारा कुत्तों को हटाया जाएगा, लेकिन शेल्टर होम की व्यवस्था नहीं होने के कारण अब तक एक भी कुत्ते को स्थायी रूप से नहीं हटाया जा सका।
5 साल में 8.5 करोड़ खर्च, फिर भी नहीं थम रहे हमले
नगर निगम ने पिछले पांच वर्षों में आवारा कुत्तों की नसबंदी और एंटी-रेबीज टीकाकरण पर 8.56 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए हैं। इस दौरान 81 हजार से अधिक कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण किए जाने का दावा किया गया, लेकिन डॉग बाइट के मामलों में कमी नहीं आई।
वर्ष 2024-25 में 21,452 कुत्तों की नसबंदी और 26,427 का टीकाकरण किया गया, जिस पर करीब 2.35 करोड़ रुपए खर्च हुए। वहीं 2025-26 में फरवरी तक 23,363 नसबंदी और 29,766 टीकाकरण किए जा चुके हैं।
इन इलाकों में सबसे ज्यादा खतरा
भोपाल के अशोका गार्डन, अयोध्या बायपास, पिपलानी, कोहेफिजा, शाहजहांनाबाद, करोंद, मीनाल रेसीडेंसी, पटेल नगर, छोला, बैरागढ़, लालघाटी-हलालपुर रोड, रेलवे स्टेशन, आईएसबीटी और न्यू मार्केट के आसपास रात के समय आवारा कुत्तों के झुंड सबसे ज्यादा देखे जा रहे हैं।
कई इलाकों में पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। खासकर बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं।
सिर्फ 600 कुत्तों की क्षमता वाले सेंटर
फिलहाल नगर निगम के पास अरवलिया, आदमपुर छावनी और कजलीखेड़ा में तीन एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर संचालित हैं। इनकी कुल क्षमता केवल 600 कुत्तों की है। यहां प्रतिदिन 20 से 25 कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण किया जा रहा है।
नगर निगम की टीमें रोजाना 50 से 65 आवारा कुत्तों को पकड़कर इन केंद्रों तक पहुंचा रही हैं, लेकिन शहर में कुत्तों की संख्या की तुलना में यह व्यवस्था बेहद कम मानी जा रही है।
मध्यप्रदेश में भी तेजी से बढ़ रहे डॉग बाइट केस
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के 2024 के आंकड़ों के अनुसार, मध्यप्रदेश में 10 लाख से अधिक आवारा कुत्ते हैं। इनमें से 6 लाख से ज्यादा भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर जैसे बड़े शहरों में मौजूद हैं।
केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2022 से जनवरी 2025 तक प्रदेश में 3.39 लाख से ज्यादा डॉग बाइट के मामले सामने आए हैं। इसी अवधि में रेबीज से कम से कम 9 लोगों की मौत भी दर्ज की गई है।
गर्मी में बढ़ जाता है कुत्तों का आक्रामक व्यवहार
पशु चिकित्सक एसआर नागर के मुताबिक, गर्मी के मौसम में कुत्तों का व्यवहार ज्यादा आक्रामक हो जाता है। उन्होंने बताया कि कुत्तों के शरीर में इंसानों की तरह स्वेट ग्लैंड नहीं होते, जिससे वे शरीर का तापमान नियंत्रित नहीं कर पाते।
गर्मी, भूख या खतरे की स्थिति में उनमें चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है और हमले की आशंका भी बढ़ जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार अप्रैल से जून के बीच डॉग बाइट के मामलों में और बढ़ोतरी हो सकती है।



