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आषाढ़ अमावस्या पर श्रद्धा का महासंगम! नदियों-घाटों पर उमड़ा जनसैलाब, स्नान-दान और पितृ तर्पण का विशेष महत्व

नई दिल्ली: देशभर में आज आषाढ़ अमावस्या श्रद्धा, आस्था और धार्मिक उत्साह के साथ मनाई जा रही है। सुबह से ही गंगा समेत विभिन्न नदियों और सरोवरों के तटों पर पवित्र स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को पितरों के स्मरण, तर्पण और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। आषाढ़ मास में पड़ने वाली अमावस्या पर श्रद्धालु अपने पूर्वजों का तर्पण कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं। साथ ही भगवान विष्णु, भगवान शिव और माता लक्ष्मी की पूजा कर स्नान, दान और पुण्य कर्म किए जाते हैं।

आषाढ़ अमावस्या का शुभ मुहूर्त

द्रिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ अमावस्या तिथि 13 जुलाई की शाम 6 बजकर 49 मिनट से प्रारंभ हुई थी और इसका समापन आज 14 जुलाई को दोपहर 3 बजकर 12 मिनट पर होगा।

स्नान और तर्पण के लिए शुभ समय

आज सुबह 5 बजकर 32 मिनट से सुबह 8 बजकर 45 मिनट तक का अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त स्नान, तर्पण और दान के लिए विशेष रूप से शुभ माना गया है।

कुतुप काल में करें पितृ पूजन

दोपहर 11 बजकर 40 मिनट से 12 बजकर 35 मिनट तक कुतुप काल रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस अवधि में पितरों का पूजन और तर्पण करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

ऐसे करें आषाढ़ अमावस्या का पूजन

पूजन के लिए घर के मंदिर या पूर्व दिशा में साफ चौकी पर पीला या सफेद वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके बाद शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं। भगवान विष्णु को पीले चंदन और माता लक्ष्मी को कुमकुम का तिलक अर्पित करें। तुलसी दल के साथ पीले फल या मिठाई अर्पित करें तथा विष्णु सहस्रनाम का पाठ या ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जप करें। अंत में विधिवत आरती करें।

शाम के समय पीपल के वृक्ष के पास जाकर जल में कच्चा दूध और काले तिल मिलाकर अर्पित करें। इसके बाद सरसों के तेल का दीपक जलाकर सात बार परिक्रमा करने की भी धार्मिक मान्यता है।

पितृ तर्पण और श्राद्ध की परंपरा

आषाढ़ अमावस्या पर कुश और काले तिल के साथ पितरों के नाम से जल अर्पित कर तर्पण किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तर्पण करना श्रेष्ठ माना गया है।

इस दिन सात्विक भोजन तैयार कर उसका पहला भाग गाय, दूसरा कुत्ते, तीसरा कौए, चौथा देवताओं और पांचवां हिस्सा चींटियों के लिए निकालने की परंपरा भी है। सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मण को भोजन कराकर दान-दक्षिणा देने का भी विशेष महत्व बताया गया है।

आषाढ़ अमावस्या का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने, तर्पण करने और उनके मोक्ष की कामना के लिए समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि आषाढ़ अमावस्या पर पितरों की कृपा प्राप्त करने के लिए किए गए धार्मिक कार्य विशेष फलदायी होते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन गंगा सहित पवित्र नदियों में स्नान करने और दान-पुण्य करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि देशभर के प्रमुख घाटों और तीर्थ स्थलों पर सुबह से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी जा रही है।

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