MP को ‘मिल्क कैपिटल’ बनाने की दिशा में बड़ी छलांग, दुग्ध उत्पादन और किसानों की आय में रिकॉर्ड बढ़ोतरी: मोहन यादव

भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश को देश की “मिल्क कैपिटल” बनाने के लिए किए जा रहे प्रयास अब जमीन पर सकारात्मक परिणाम देने लगे हैं। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन और दुग्ध संकलन में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है, जिससे किसानों की आय भी बढ़ी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि समन्वित प्रयासों के जरिए मध्यप्रदेश अब दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में देश में लंबी छलांग लगाने के लिए तैयार है।
मुख्यमंत्री गुरुवार को मंत्रालय में पशुपालन एवं डेयरी विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में पशुपालन एवं डेयरी विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल, मुख्य सचिव अनुराग जैन और विभागीय वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
प्रदेश में रोजाना 9.67 लाख किलो दूध का संकलन
बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 9.67 लाख किलोग्राम दूध का संकलन हो रहा है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 11 प्रतिशत अधिक है। वहीं पिछले छह महीनों में औसत दुग्ध संकलन 11 लाख किलोग्राम प्रतिदिन से अधिक दर्ज किया गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस उपलब्धि को और बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जाएं।
देश में नंबर वन बनने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में मध्यप्रदेश दुग्ध उत्पादन के मामले में देश में तीसरे स्थान पर है, लेकिन सरकार का लक्ष्य प्रदेश को इस क्षेत्र में नंबर वन बनाना है।
उन्होंने बताया कि इस दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। प्रदेश में 1752 नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया गया है। इसके अलावा ग्वालियर डेयरी प्लांट के आधुनिकीकरण, शिवपुरी डेयरी प्लांट के पुनर्जीवन और इंदौर में 3 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले मिल्क पाउडर प्लांट की शुरुआत जैसे बड़े प्रोजेक्ट पर काम किया गया है।
दुग्ध उत्पादकों को 15 प्रतिशत अधिक भुगतान
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2025-26 में दुग्ध उत्पादकों को 1609 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत अधिक है। वर्ष 2024-25 में यह राशि 1398 करोड़ रुपए थी।
राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के सहयोग से लागू की गई नई भुगतान प्रणाली के तहत किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है। इसके साथ ही विभिन्न दुग्ध संघों में दूध खरीद दर में 2.50 रुपए से लेकर 8.50 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की गई है।
सरकार का कहना है कि इससे किसानों की आय में वृद्धि हुई है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
सांची ब्रांड की बढ़ी लोकप्रियता
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि “सांची” ब्रांड को मजबूत करने के लिए किए गए प्रयासों का सकारात्मक असर देखने को मिला है। प्रदेश में घी की बिक्री में 17 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
इसके अलावा पनीर, दही, छाछ और फ्लेवर्ड दूध जैसे मूल्य संवर्धित उत्पादों की बिक्री में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। बेहतर पैकेजिंग और ब्रांडिंग के जरिए बाजार में सांची उत्पादों की पहचान मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
पशुपालन योजनाओं की भी हुई समीक्षा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक में डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना, आचार्य विद्यासागर गौसंवर्धन योजना, मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम, क्षीरधारा ग्राम योजना और पशु स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा भी की।
साथ ही चारा उत्पादन, पशु पोषण, स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना और डेयरी क्षेत्र में तकनीकी सहयोग को लेकर अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली गई।



