5 महीने से वेतन नहीं, अब सड़क पर उतरेंगे स्वास्थ्य कर्मचारी; भोपाल में बड़े आंदोलन का ऐलान

भोपाल: मध्य प्रदेश में आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारियों ने लंबित वेतन और विभिन्न मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है। मध्य प्रदेश संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने प्रदेशभर के कर्मचारियों से 25 मई को भोपाल के नीलम पार्क में एकत्र होकर धरना-प्रदर्शन करने की अपील की है।
कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें पिछले पांच से छह महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिससे आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा तथा भूख हड़ताल भी शुरू की जाएगी।
प्रदर्शन के बाद उपमुख्यमंत्री निवास पहुंचेंगे कर्मचारी
संघ के अनुसार प्रदर्शन के बाद बड़ी संख्या में कर्मचारी उपमुख्यमंत्री निवास पहुंचकर ज्ञापन सौंपेंगे। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से समस्याओं को लेकर शासन और अधिकारियों के सामने आवाज उठाई जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
प्रदेशभर में 30 हजार कर्मचारी दे रहे सेवाएं
संघ के प्रदेश अध्यक्ष कोमल सिंह ने बताया कि मध्य प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक सहित विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में करीब 30 हजार आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं।
उन्होंने कहा कि कोरोना काल से लेकर वर्तमान तक स्वास्थ्य सेवाओं में अहम भूमिका निभाने वाले कर्मचारियों को आज भी समय पर वेतन, नौकरी की सुरक्षा और न्यूनतम सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं।
निजी एजेंसियों पर शोषण के आरोप
संघ ने निजी एजेंसियों और अधिकारियों पर कर्मचारियों के शोषण का आरोप लगाया है। कर्मचारियों का कहना है कि शासन से स्वीकृत राशि और वास्तविक भुगतान में बड़ा अंतर है। कई कर्मचारियों को केवल 8 से 12 हजार रुपए तक वेतन दिया जा रहा है, जबकि लंबे समय से न्यूनतम 26 हजार रुपए मासिक वेतन की मांग की जा रही है।
कर्मचारियों का आरोप है कि निजी एजेंसियां मनमानी कर रही हैं और शासन स्तर पर निगरानी की कमी के कारण हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं।
ये हैं कर्मचारी संघ की प्रमुख मांगें
संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने कर्मचारियों के नियमितीकरण, समान कार्य के बदले समान वेतन, सामाजिक सुरक्षा, अवकाश सुविधा, मातृत्व अवकाश और नियमों का उल्लंघन करने वाली निजी एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट करने जैसी प्रमुख मांगें सरकार के सामने रखी हैं।
संघ का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो प्रदेशभर में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।



