Ebola Crisis: इबोला के नए स्ट्रेन ‘बुंडीबुग्यो’ पर रूस का बड़ा दावा, वैक्सीन विकसित करने की घोषणा

मॉस्को: इबोला वायरस के बढ़ते वैश्विक खतरे के बीच रूस ने बड़ा दावा किया है। रूस के वैज्ञानिकों ने इबोला के नए और दुर्लभ स्ट्रेन ‘बुंडीबुग्यो’ के खिलाफ वैक्सीन विकसित करने का दावा किया है। यह वही स्ट्रेन है, जिसने इन दिनों डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में तेजी से संक्रमण फैलाया हुआ है।
दक्षिण अफ्रीका स्थित रूसी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि रूस के स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराश्को ने इस वैक्सीन के विकास की पुष्टि की है। रूसी वैज्ञानिकों का कहना है कि यह टीका बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के खिलाफ प्रभावी सुरक्षा प्रदान कर सकता है।
डीआरसी में तेजी से फैल रहा संक्रमण
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला संक्रमण लगातार गंभीर होता जा रहा है। 25 मई को जारी जानकारी में बताया गया था कि अब तक 220 संदिग्ध मौतें सामने आ चुकी हैं, जबकि संक्रमण के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
डब्ल्यूएचओ प्रमुख टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने कहा था कि अब तक 101 मामलों की पुष्टि हुई है और दस लोगों की मौत की आधिकारिक पुष्टि की जा चुकी है। हालांकि उन्होंने आशंका जताई कि वास्तविक आंकड़े इससे कहीं अधिक हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि 900 से ज्यादा संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल घोषित
इबोला के इस प्रकोप को 17 मई को अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया गया था। संक्रमण अब पड़ोसी देश युगांडा तक भी फैल चुका है, जहां पांच पुष्ट मामले और एक मौत दर्ज की गई है।
डीआरसी के स्वास्थ्य मंत्री रोजर काम्बा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि संक्रमण अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन मामलों और मौतों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि प्रभावित इलाकों में करीब 1000 संदिग्ध मामलों की पहचान की गई है, जिनमें से 101 की पुष्टि हो चुकी है।
जैरे स्ट्रेन से कम घातक, लेकिन खतरा बरकरार
स्वास्थ्य मंत्री काम्बा के मुताबिक, मौजूदा प्रकोप बुंडीबुग्यो स्ट्रेन की वजह से हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्ट्रेन इबोला के जैरे स्ट्रेन की तुलना में कम घातक माना जाता है, लेकिन संक्रमण बढ़ने की स्थिति में यह बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल इस स्ट्रेन के लिए कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष इलाज उपलब्ध नहीं था, ऐसे में रूस का दावा वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय के लिए अहम माना जा रहा है।
क्या है इबोला वायरस?
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, इबोला एक गंभीर और कई मामलों में जानलेवा बीमारी है, जो इंसानों और अन्य प्राइमेट्स को प्रभावित करती है। यह वायरस आमतौर पर जंगली जानवरों से इंसानों में फैलता है और फिर संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क के जरिए तेजी से संक्रमण फैलता है।
इबोला संक्रमण में औसतन मृत्यु दर करीब 50 प्रतिशत तक मानी जाती है, हालांकि अलग-अलग प्रकोपों में यह दर अलग हो सकती है।



