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सोमवती अमावस्या कल: बन रहे दुर्लभ शुभ योग, स्नान-दान और शिव आराधना से मिलेगा विशेष पुण्य फल

नई दिल्ली: सनातन परंपरा में सोमवती अमावस्या को अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है। जब अमावस्या तिथि सोमवार के दिन पड़ती है, तब उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। इस बार 15 जून 2026 को पड़ रही सोमवती अमावस्या कई दुर्लभ और शुभ संयोगों के कारण विशेष महत्व रखती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन स्नान, दान, जप-तप और भगवान शिव की आराधना करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग का बनेगा शुभ संयोग

इस वर्ष सोमवती अमावस्या पर सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग जैसे अत्यंत शुभ योगों का निर्माण हो रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इन योगों में किए गए धार्मिक कार्य, पूजा-पाठ और दान का फल कई गुना बढ़ जाता है। यही कारण है कि इस दिन को आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जानिए अमावस्या तिथि का समय

अमावस्या तिथि की शुरुआत 14 जून 2026, रविवार को दोपहर 12 बजकर 20 मिनट पर होगी। इसका समापन 15 जून 2026, सोमवार को सुबह 8 बजकर 24 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर सोमवती अमावस्या का व्रत, स्नान और धार्मिक अनुष्ठान 15 जून को ही किए जाएंगे।

स्नान और पूजा के लिए ये रहेंगे शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:03 बजे से 4:43 बजे तक रहेगा, जिसे स्नान और ध्यान के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:54 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक रहेगा। इसके अलावा सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग का प्रभाव शाम 5:23 बजे से 7:08 बजे तक रहेगा।

शिव-पार्वती की पूजा का विशेष महत्व

सोमवार भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। ऐसे में सोमवती अमावस्या के दिन शिव-पार्वती की विधिपूर्वक पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि इससे वैवाहिक जीवन में सुख-शांति आती है, दांपत्य संबंध मजबूत होते हैं और सौभाग्य में वृद्धि होती है। साथ ही पितरों की कृपा प्राप्त करने और पितृ दोष से मुक्ति के लिए भी यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है।

इन वस्तुओं का दान करना माना गया है शुभ

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन पवित्र नदी या जलाशय में स्नान के बाद दान-पुण्य करना विशेष फलदायी होता है। अन्न दान के रूप में चावल, गेहूं, दाल और तिल का दान किया जा सकता है। इसके अलावा दूध, दही और चीनी जैसी सफेद वस्तुओं का दान भी शुभ माना गया है। श्रद्धानुसार वस्त्र, जूते-चप्पल और छाते जैसी उपयोगी वस्तुएं जरूरतमंदों को दान की जा सकती हैं।

पितरों की शांति के लिए करें यह उपाय

सोमवती अमावस्या पर पीपल के वृक्ष को जल अर्पित कर उसकी परिक्रमा करने का विशेष महत्व बताया गया है। इस दौरान पूर्वजों की शांति और आशीर्वाद के लिए प्रार्थना करने से पितृ दोष से राहत मिलने की मान्यता है।

इन बातों का रखें विशेष ध्यान

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मांस, मदिरा और अन्य तामसिक पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। क्रोध, विवाद और कटु वचनों से दूर रहकर सात्विक जीवनशैली अपनाने की सलाह दी जाती है। मन को शांत रखकर पूजा, जप और दान-पुण्य में समय देना शुभ माना गया है।

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