महंगाई का डबल झटका! खुदरा के बाद थोक मुद्रास्फीति में भी उछाल, मई में 9.68% पर पहुंचा WPI

नई दिल्ली: देश में महंगाई का दबाव बढ़ता नजर आ रहा है। खुदरा महंगाई में वृद्धि के बाद अब थोक महंगाई दर में भी तेज उछाल दर्ज किया गया है। मई 2026 में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति बढ़कर 9.68 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि अप्रैल में यह 8.26 प्रतिशत थी। ईंधन, बिजली और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी को इस बढ़ोतरी की प्रमुख वजह माना जा रहा है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने सोमवार को थोक महंगाई के आंकड़े जारी किए। मंत्रालय ने हाल ही में आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2022-23 किया है, जिसके बाद संशोधित आंकड़े जारी किए गए हैं।
ईंधन और बिजली क्षेत्र में सबसे ज्यादा दबाव
आंकड़ों के मुताबिक, ईंधन और बिजली श्रेणी में थोक महंगाई मई में बढ़कर 30.33 प्रतिशत हो गई, जो अप्रैल में 24.89 प्रतिशत थी। वहीं कच्चे पेट्रोलियम की मुद्रास्फीति दर भी बढ़कर 61.51 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि अप्रैल में यह 56.31 प्रतिशत थी।
विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति प्रभावित होने की आशंकाओं का असर ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में वैश्विक कीमतों में वृद्धि का सीधा प्रभाव घरेलू बाजार पर भी देखने को मिला।
खाद्य वस्तुओं और विनिर्माण क्षेत्र में भी बढ़ीं कीमतें
मई में खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर बढ़कर 3.60 प्रतिशत हो गई, जबकि अप्रैल में यह 2.43 प्रतिशत थी। इसके अलावा विनिर्मित उत्पादों की मुद्रास्फीति भी 6.68 प्रतिशत से बढ़कर 7.48 प्रतिशत पर पहुंच गई।
विश्लेषकों का मानना है कि ऊर्जा लागत में वृद्धि का असर उत्पादन और परिवहन खर्च पर पड़ा है, जिससे विभिन्न वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
खुदरा महंगाई भी पहुंची 16 महीने के उच्च स्तर पर
थोक महंगाई के साथ-साथ खुदरा महंगाई में भी तेजी देखने को मिली है। मई 2026 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई बढ़कर 3.93 प्रतिशत हो गई, जो अप्रैल में 3.48 प्रतिशत थी। यह पिछले 16 महीनों का उच्चतम स्तर माना जा रहा है।
मई लगातार पांचवां महीना रहा, जब खुदरा महंगाई दर में बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि यह अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक के 4 प्रतिशत के लक्ष्य के आसपास बनी हुई है।
आरबीआई ने भी बढ़ाया मुद्रास्फीति का अनुमान
भारतीय रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति तय करते समय मुख्य रूप से खुदरा महंगाई को आधार मानता है। केंद्र सरकार ने महंगाई दर को 4 प्रतिशत के स्तर पर बनाए रखने का लक्ष्य तय किया है, जिसमें 2 प्रतिशत ऊपर या नीचे की गुंजाइश रखी गई है।
इस महीने की शुरुआत में आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए मुद्रास्फीति का अनुमान 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया था। केंद्रीय बैंक ने वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेजी और कच्चे माल की बढ़ती लागत को इसके पीछे प्रमुख कारण बताया था।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी पड़ा असर
वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर घरेलू ईंधन बाजार पर भी दिखाई दिया। मई के दूसरे पखवाड़े में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 7.50 रुपये प्रति लीटर तक की वृद्धि दर्ज की गई थी, जिससे परिवहन और रोजमर्रा की वस्तुओं की लागत पर अतिरिक्त दबाव बना।



