ट्रंप का बड़ा दावा! ‘शांत रहो और समझदारी से काम लो’, ऐसे तैयार हुआ इजरायल सीजफायर के लिए

वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते के बाद पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम सामने आया है। इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच संघर्ष विराम पर सहमति बनने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उन्होंने स्वयं हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को संयम बरतने की सलाह दी थी।
ट्रंप ने एक टेलीफोनिक साक्षात्कार में कहा कि लेबनान में बढ़ती सैन्य गतिविधियों से क्षेत्र में शुरू हुई शांति प्रक्रिया प्रभावित हो सकती थी। इसी कारण उन्होंने इजरायली नेतृत्व से बातचीत कर हालात को और गंभीर होने से रोकने की अपील की।
‘हर समस्या का समाधान ताकत नहीं, धैर्य भी है’
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि संवेदनशील परिस्थितियों में केवल सैन्य शक्ति ही नहीं, बल्कि धैर्य और समझदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। उनके मुताबिक कई बार तनावपूर्ण हालात को नियंत्रित करने के लिए शांत रहकर निर्णय लेना सबसे प्रभावी रणनीति साबित होता है।
हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनकी बातचीत सीधे इजरायल के प्रधानमंत्री से हुई थी या नहीं, लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिकी प्रशासन ने पर्दे के पीछे रहकर सक्रिय भूमिका निभाई।
संघर्ष विराम से टला बड़े युद्ध का खतरा
हाल के दिनों में इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच बढ़ते हमलों ने पूरे पश्चिम एशिया में बड़े युद्ध की आशंकाएं पैदा कर दी थीं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और बढ़ता, तो अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुई नई वार्ता प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती थी।
एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के अनुसार स्थानीय समयानुसार शाम करीब चार बजे संघर्ष विराम प्रभावी हुआ। इस समझौते को अंतिम रूप देने में अमेरिका और कतर के वार्ताकारों ने अहम भूमिका निभाई, जबकि ईरान ने भी बातचीत को आगे बढ़ाने में सहयोग किया।
दोनों पक्षों ने संघर्ष विराम की पुष्टि की
हिज्बुल्लाह से जुड़े सूत्रों और इजरायली अधिकारियों ने भी संघर्ष विराम लागू होने की पुष्टि की है। इजरायल की ओर से कहा गया कि यदि हिज्बुल्लाह की तरफ से हमले नहीं किए जाते हैं तो सैन्य कार्रवाई जारी रखने का कोई कारण नहीं है।
हालांकि सुरक्षा कारणों से दक्षिणी लेबनान में इजरायली सैनिकों की तैनाती फिलहाल जारी रहेगी। वहीं लेबनानी सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक संघर्ष विराम लागू होने से ठीक पहले कुछ हवाई हमले हुए थे, लेकिन उसके बाद किसी नई सैन्य कार्रवाई की सूचना नहीं मिली।
अमेरिका-ईरान वार्ता पर भी पड़ा था असर
लेबनान में बढ़ते तनाव का असर अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित वार्ता पर भी दिखाई दिया था। स्विट्जरलैंड में होने वाली महत्वपूर्ण बैठक को स्थगित करना पड़ा, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े मुद्दों पर चर्चा प्रस्तावित थी।
हाल ही में दोनों देशों के बीच हुए अंतरिम समझौते के तहत व्यापक समझौते की दिशा में आगे बढ़ने के लिए 60 दिनों की समयसीमा तय की गई है।
ईरान ने भी रखी अपनी शर्त
हिज्बुल्लाह के सांसद हसन फदल्लाह ने कहा कि आगे की वार्ता लेबनान में स्थायी संघर्ष विराम की स्थिति पर निर्भर करेगी। वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने कहा कि समझौते को सफल बनाने की जिम्मेदारी केवल ईरान की नहीं है, बल्कि अमेरिका को भी अपने सभी वादों का पालन करना होगा।
पश्चिम एशिया में तेज हुई कूटनीतिक गतिविधियों के बीच जानकारों का मानना है कि यह संघर्ष विराम क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है, हालांकि स्थायी शांति स्थापित करने के लिए अभी कई चुनौतियां बाकी हैं।



