
नई दिल्ली: संक्रामक रोगों और मस्तिष्क संबंधी गंभीर बीमारियों के बीच संभावित संबंध को लेकर एक अहम शोध सामने आया है। जर्मनी के बॉन विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अध्ययन में दावा किया गया है कि कुछ संक्रामक रोग अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसी न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के विकास और प्रसार को बढ़ावा दे सकते हैं। यह शोध प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका ‘नेचर कम्युनिकेशंस’ में प्रकाशित हुआ है।
मस्तिष्क में बीमारी फैलाने की प्रक्रिया पर फोकस
शोधकर्ताओं ने प्रयोगशाला में किए गए परीक्षणों के दौरान पाया कि कुछ संक्रामक अणु ऐसे प्रोटीन समूहों के एक कोशिका से दूसरी कोशिका तक फैलने की प्रक्रिया को आसान बना सकते हैं, जो मस्तिष्क संबंधी बीमारियों की प्रमुख पहचान माने जाते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह प्रक्रिया तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करने वाली गंभीर बीमारियों के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
प्रियन प्रोटीन से जुड़ा मिला अहम संकेत
अध्ययन में यह भी सामने आया कि अनियमित संरचना वाले प्रोटीन समूह प्रियन रोगों में पाए जाते हैं। इनकी विशेषता यह है कि वे एक कोशिका से दूसरी कोशिका में पहुंचकर सामान्य प्रोटीन को भी असामान्य रूप में बदल देते हैं। इसी वजह से बीमारी धीरे-धीरे पूरे मस्तिष्क में फैल सकती है।
अल्जाइमर और पार्किंसंस से भी जुड़ सकती है प्रक्रिया
वैज्ञानिकों का कहना है कि अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसी बीमारियों में भी इसी तरह के असामान्य प्रोटीन समूह देखे जाते हैं। शोध के अनुसार, इन प्रोटीनों का फैलाव मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को प्रभावित करता है और समय के साथ बीमारी को गंभीर बना सकता है। यही कारण है कि संक्रामक अणुओं और न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों के बीच संबंध को लेकर अब अधिक गहराई से अध्ययन किया जा रहा है।
क्या होते हैं प्रियन रोग?
प्रियन ऐसे असामान्य प्रोटीन होते हैं जो मस्तिष्क में मौजूद सामान्य प्रोटीनों की संरचना को बदल सकते हैं। इसके परिणामस्वरूप तंत्रिका तंत्र प्रभावित होता है और गंभीर न्यूरोलॉजिकल विकार विकसित हो सकते हैं। यह समस्या केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि कई पशुओं में भी देखी जाती है।
शोध से खुल सकते हैं नई चिकित्सा के रास्ते
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अध्ययन भविष्य में अल्जाइमर, पार्किंसंस और अन्य तंत्रिका संबंधी रोगों की रोकथाम और उपचार के लिए नई रणनीतियां विकसित करने में मददगार साबित हो सकता है। साथ ही यह समझने में भी सहायता मिलेगी कि संक्रमण और मस्तिष्क रोगों के बीच संबंध किस तरह काम करता है।



