मध्य प्रदेश

MP: ग्वालियर में अवैध खनन पर हाईकोर्ट सख्त, अफसरों से पूछा- 51 हजार वेतन में 9 लाख की स्कूल फीस कैसे?

ग्वालियर: बिलौआ में अवैध खनन को लेकर दायर जनहित याचिका पर मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच में गुरुवार को सुनवाई हुई। करीब ढाई घंटे चली सुनवाई के दौरान अदालत ने अधिकारियों से कई तीखे सवाल किए। कोर्ट में बिलौआ की खदानों का ड्रोन वीडियो भी चलाया गया। इस दौरान कलेक्टर रुचिका चौहान से खनन स्थल, जमीन, सर्वे नंबर, स्वीकृत क्षेत्र और अब तक हुई खुदाई से जुड़ी जानकारी मांगी गई।

ड्रोन वीडियो देखकर कोर्ट ने मांगा पूरा हिसाब

सुनवाई के दौरान जब बिलौआ की खदानों का ड्रोन वीडियो कोर्ट रूम में चलाया गया तो न्यायाधीश ने वीडियो रुकवाकर कलेक्टर रुचिका चौहान से सीधे सवाल किए। उनसे पूछा गया कि वीडियो में दिखाई दे रही जगह कौन सी है, जमीन किसकी है, उसका सर्वे नंबर क्या है, कितने क्षेत्र में खनन की अनुमति है और अब तक कितनी खुदाई हो चुकी है। तत्काल स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने पर अदालत ने 30 सितंबर तक का समय दिया। कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई में पूछे गए हर सवाल का स्पष्ट और सटीक जवाब दिया जाना चाहिए।

10 साल की लीज का खनिज एक साल में निकालने पर सवाल

अदालत ने खनन की रफ्तार को लेकर भी सवाल उठाया। कोर्ट ने पूछा कि अगर 10 साल की लीज के लिए स्वीकृत खनिज एक साल में ही निकाल लिया गया, तो बाकी नौ साल क्या किया जाएगा। इस टिप्पणी के जरिए अदालत ने खनन की निगरानी और स्वीकृत अवधि के अनुरूप गतिविधियों पर सवाल खड़े किए।

51 हजार रुपये वेतन और बेटे की 9 लाख रुपये फीस पर सवाल

सुनवाई के दौरान प्रभारी खनिज अधिकारी पंकजध्वज मिश्रा से उनकी आय और बेटे की स्कूल फीस को लेकर भी सवाल किए गए। अदालत ने पूछा कि उनके बेटे की सिंधिया स्कूल में सालाना फीस कितनी है। अधिकारी ने करीब 9 लाख रुपये सालाना फीस होने की जानकारी दी। इसके बाद कोर्ट ने उनकी मासिक तनख्वाह पूछी, जिस पर करीब 51 हजार रुपये महीना वेतन बताया गया।

वेतन और स्कूल फीस के बीच अंतर को लेकर अदालत ने सवाल किया। इस पर माइनिंग अधिकारी ने सफाई दी कि उनके बेटे की पढ़ाई का खर्च उनकी पत्नी के मामा उठाते हैं। इसी दौरान अदालत ने इस मामले में भी टिप्पणी की।

लोकायुक्त के आदेश को क्लीन चिट बताने पर कोर्ट ने टोका

सुनवाई में माइनिंग अधिकारी की ओर से लोकायुक्त के आदेश को क्लीन चिट के तौर पर पेश करने का प्रयास किया गया। हालांकि, न्यायाधीश ने स्वयं आदेश पढ़ा और स्पष्ट किया कि एफआईआर दर्ज होने के कारण लोकायुक्त ने मामला बंद किया था। अदालत ने साफ किया कि इसे दोषमुक्ति या क्लीन चिट नहीं माना जा सकता।

पहले घनश्याम यादव को हटाने के दिए थे निर्देश

इस मामले की पिछली सुनवाई में हाई कोर्ट ने ग्वालियर के खनिज अधिकारी घनश्याम यादव को जिले में काम करने से रोक दिया था। अदालत ने उनके आचरण को लेकर गंभीर टिप्पणी भी की थी। राज्य सरकार को निर्देश दिया गया था कि ग्वालियर में तत्काल ईमानदार और सक्षम खनिज अधिकारी की नियुक्ति की जाए। तब तक पूरे खनिज विभाग की जिम्मेदारी कलेक्टर को संभालने के निर्देश दिए गए थे।

इसके बाद राज्य सरकार ने भिंड में पदस्थ खनिज अधिकारी पंकजध्वज मिश्रा को ग्वालियर भेजा था। उनकी नियुक्ति और पिछली पोस्टिंग को लेकर भी सुनवाई के दौरान सवाल उठाए गए।

AAG विवेक खेड़कर को भी कोर्ट की फटकार

सुनवाई के दौरान अपर महाधिवक्ता विवेक खेड़कर ने माइनिंग अधिकारी का पक्ष रखने का प्रयास किया। इस पर अदालत ने कड़ा एतराज जताया। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि यदि वह शासन का पक्ष छोड़कर अधिकारी का व्यक्तिगत बचाव करना चाहते हैं, तो फिर शासन का पक्ष छोड़ दें। सुनवाई के दौरान AAG कई बार माफी मांगते और ‘सॉरी’ कहते नजर आए। हाई कोर्ट ने मामले की विस्तृत जानकारी और अध्ययन के साथ 30 सितंबर को अगली रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

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