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मोदी कैबिनेट में बड़ा फेरबदल तय? कई मंत्रियों की हो सकती है छुट्टी, नए चेहरों की एंट्री के संकेत

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में पहले मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के हवाले से सामने आ रही रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार की रूपरेखा लगभग तैयार है। कौन मंत्री बनेगा, किसका विभाग बदलेगा, किसे प्रमोशन मिलेगा और किन चेहरों की विदाई हो सकती है, इसे लेकर राजनीतिक हलकों में लगातार अटकलें लगाई जा रही हैं।

बताया जा रहा है कि आगामी विस्तार में कई मंत्रियों के विभागों में बदलाव संभव है, जबकि कुछ मंत्रियों को सरकार से बाहर का रास्ता भी दिखाया जा सकता है। महिलाओं, युवाओं और पिछड़ा वर्ग को अधिक प्रतिनिधित्व देने पर विशेष जोर रहने की चर्चा है।

कैबिनेट विस्तार की तारीख को लेकर अटकलें तेज

राजनीतिक विश्लेषकों की नजर प्रधानमंत्री के आगामी कार्यक्रमों पर भी टिकी हुई है। राष्ट्रपति का 30 जून और 1 जुलाई को आंध्र प्रदेश दौरा प्रस्तावित है। वहीं 1 से 3 जुलाई तक जापान के प्रधानमंत्री का भारत दौरा निर्धारित है। 4 जुलाई को प्रधानमंत्री राजस्थान दौरे पर रहेंगे, जबकि 5 जुलाई को कार्यक्रम अपेक्षाकृत खाली बताया जा रहा है।

इसके बाद 6 जुलाई से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के दौरे पर रवाना होंगे और 11 जुलाई तक विदेश यात्रा पर रहेंगे। ऐसे में 5 जुलाई या फिर 11 जुलाई के बाद किसी भी समय मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना जताई जा रही है।

क्या मानसून सत्र से पहले होगा विस्तार?

संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने की संभावना है। ऐसे में 11 जुलाई से 20 जुलाई के बीच मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें भी लगाई जा रही हैं। इससे पहले वर्ष 2021 में भी मानसून सत्र से ठीक पहले बड़ा मंत्रिमंडलीय फेरबदल किया गया था, जिसमें कई वरिष्ठ मंत्रियों को हटाकर नए चेहरों को मौका दिया गया था।

किन मंत्रियों के पद खाली होने की चर्चा?

रिपोर्टों के मुताबिक, वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद ‘एक व्यक्ति-एक पद’ के सिद्धांत के तहत उनके मंत्री पद को लेकर चर्चा है।

रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो चुका है। उन्हें नई राज्यसभा सीट नहीं मिलने के बाद यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि उन्हें पंजाब की राजनीति में अधिक सक्रिय भूमिका दी जा सकती है।

इसी तरह हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली भाजपा अध्यक्ष बनाए जाने के बाद उनके मंत्री पद को लेकर भी चर्चाएं हैं। वहीं अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे के बाद एक पद पहले से खाली माना जा रहा है।

महिलाओं, युवाओं और पिछड़ों पर रहेगा फोकस

भाजपा संगठन में हालिया नियुक्तियों को मंत्रिमंडल विस्तार के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश भाजपा संगठन में बड़ी संख्या में पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति-जनजाति और महिलाओं को प्रतिनिधित्व दिया गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इसी तरह का सामाजिक संतुलन केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार में भी देखने को मिल सकता है।

रिपोर्टों के अनुसार, पिछड़ा वर्ग और महिला प्रतिनिधित्व दो ऐसे प्रमुख कारक हो सकते हैं, जिन पर विस्तार के दौरान विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही आगामी विधानसभा चुनावों वाले राज्यों की सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को भी प्राथमिकता मिल सकती है।

चुनावी राज्यों का समीकरण भी अहम

अगले वर्ष उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा, मणिपुर, हिमाचल प्रदेश और गुजरात समेत सात राज्यों में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में इन राज्यों के नेताओं को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व देकर राजनीतिक संदेश देने की रणनीति पर भी विचार किया जा सकता है।

75 वर्ष की आयु सीमा पर भी नजर

रिपोर्टों में यह भी दावा किया जा रहा है कि 75 वर्ष की आयु के करीब पहुंच चुके कुछ नेताओं को संगठन या अन्य जिम्मेदारियों में भेजा जा सकता है। हालांकि इस संबंध में सरकार या भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

आज सचिवों की अहम बैठक

सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के सचिवों की बैठक बुलाई है। बैठक में ‘ईज ऑफ लिविंग’ और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ से जुड़े सुधारों सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी। राजनीतिक हलकों में इस बैठक को भी संभावित प्रशासनिक और राजनीतिक बदलावों से जोड़कर देखा जा रहा है।

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