मध्य प्रदेशराज्य

MP वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन पर बढ़ी सियासत, सरकार और मुस्लिम संगठनों के बीच टकराव

भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार ने नए वक्फ कानून के तहत राज्य वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन कर दिया है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश नए प्रावधानों के अनुसार वक्फ बोर्ड का गठन करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। नए बोर्ड में पहली बार दो हिंदू सदस्यों और दो महिला सदस्यों को भी शामिल किया गया है। इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। जहां सरकार और वक्फ बोर्ड के पदाधिकारी इसे पारदर्शिता और बेहतर प्रबंधन की दिशा में अहम कदम बता रहे हैं, वहीं कई मुस्लिम संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है।

बोर्ड अध्यक्ष ने फैसले को बताया सकारात्मक

मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सनवर पटेल ने पुनर्गठन का स्वागत करते हुए इसे महत्वपूर्ण और सकारात्मक पहल बताया। उन्होंने कहा कि नए बोर्ड में दो हिंदू सदस्यों के साथ दो महिलाओं को भी शामिल किया गया है। उनके अनुसार कुछ लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्यों की क्या भूमिका होगी, जबकि कुछ लोग मंदिर और गुरुद्वारा समितियों में मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने की बात कर रहे हैं।

सनवर पटेल ने स्पष्ट किया कि वक्फ बोर्ड और मस्जिद अलग-अलग संस्थाएं हैं। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड एक वैधानिक और प्रशासनिक निकाय है, जिसका काम वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन करना है। ऐसे में यहां ईमानदार और सक्षम लोगों की आवश्यकता होती है। उनका कहना था कि पुनर्गठन का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों में पारदर्शिता लाना, भ्रष्टाचार पर रोक लगाना और अवैध कब्जों को रोकना है।

मंत्री विश्वास सारंग ने भी किया समर्थन

प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने भी वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन को सराहनीय निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि पहली बार दो हिंदू सदस्यों को बोर्ड में शामिल किया गया है, जिससे प्रबंधन व्यवस्था और मजबूत होगी। उन्होंने यह भी कहा कि वक्फ बोर्ड की तुलना मंदिर या गुरुद्वारा समितियों से करना उचित नहीं है, क्योंकि वक्फ बोर्ड कोई धार्मिक स्थल नहीं बल्कि एक वैधानिक बोर्ड है, जिसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों का प्रभावी और पारदर्शी संचालन सुनिश्चित करना है।

मुस्लिम संगठनों ने जताया कड़ा विरोध

दूसरी ओर, नए बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल किए जाने का मुस्लिम संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है। ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने भोपाल के बुधवारा चौराहे पर प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

संगठन की मांग है कि नई कमेटी को तत्काल भंग किया जाए। उनका कहना है कि वक्फ बोर्ड मुस्लिम समुदाय की धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय है, इसलिए इसमें गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करना उचित नहीं है।

सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

मुस्लिम संगठनों का आरोप है कि सरकार वक्फ बोर्ड पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रही है और आगे चलकर मस्जिदों व मदरसों में भी हस्तक्षेप किया जा सकता है। उनका कहना है कि सरकार की नजर केवल वक्फ संपत्तियों पर है, जबकि वक्फ बोर्ड एक स्वायत्त संस्था है और उसकी स्वतंत्रता बरकरार रहनी चाहिए।

राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी

प्रदर्शन कर रहे संगठनों ने मांग की कि यदि वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्यों को शामिल किया जा सकता है, तो अयोध्या, मथुरा और महाकाल जैसे मंदिरों की प्रबंधन समितियों में भी मुस्लिम सदस्यों को स्थान दिया जाना चाहिए। संगठनों ने चेतावनी दी कि वे इस मुद्दे को राष्ट्रपति के समक्ष उठाएंगे और आवश्यकता पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट का भी रुख करेंगे। साथ ही उन्होंने मुस्लिम समुदाय से इस फैसले के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने की अपील की है।

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