मनोरंजन

‘रामायण’ की शूटिंग में झेली कई मुश्किलें! दीपिका चिखलिया ने सुनाए संघर्ष के किस्से, बोलीं- कार में बदलने पड़ते थे कपड़े

मुंबई: रामानंद सागर की ऐतिहासिक टीवी श्रृंखला ‘रामायण’ में माता सीता का किरदार निभाकर घर-घर में पहचान बनाने वाली अभिनेत्री दीपिका चिखलिया ने शूटिंग के दिनों से जुड़ी कई यादें साझा की हैं। उन्होंने बताया कि उस दौर में शूटिंग के दौरान बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव था और कई बार उन्हें बेहद कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ता था। दीपिका ने यह बातें वर्ष 2023 में दिए एक इंटरव्यू में साझा की थीं।

आउटडोर शूटिंग में सबसे बड़ी चुनौती थीं बुनियादी सुविधाएं

दीपिका चिखलिया ने बताया कि आउटडोर शूटिंग के दौरान सबसे बड़ी परेशानी महिलाओं के लिए वॉशरूम और कपड़े बदलने की व्यवस्था को लेकर होती थी। उन्होंने कहा कि कई बार उन्हें और अन्य महिला कलाकारों को स्थानीय लोगों के घर जाकर वॉशरूम इस्तेमाल करने की अनुमति मांगनी पड़ती थी। वहीं, कपड़े बदलने के लिए कोई अलग कमरा उपलब्ध नहीं होता था। ऐसे में पुराने कपड़ों की मदद से अस्थायी घेरा बनाकर उसी के भीतर कलाकार कपड़े बदलते थे।

कई बार कार के अंदर बदलनी पड़ती थी साड़ी

अभिनेत्री ने बताया कि कई मौकों पर उन्हें कार के भीतर ही साड़ी बदलनी पड़ती थी। उस समय क्रू सदस्य कार के शीशों को कपड़ों से ढक देते थे ताकि बाहर से कोई देख न सके। इसके बाद वह कार के अंदर ही तैयार होती थीं।

सीता के किरदार के लिए की थी विशेष तैयारी

दीपिका ने बताया कि रामानंद सागर ने उन्हें माता सीता के स्वरूप का एक प्रारंभिक स्केच दिया था और उसी के अनुरूप किरदार को आत्मसात करने की सलाह दी थी। इसके बाद उन्होंने नियमित रूप से रामायण का अध्ययन किया और संवाद, हाव-भाव, बोलने के तरीके तथा किरदार की गंभीरता पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने करीब तीन वर्षों तक इस भूमिका को निभाया।

‘सीता’ के किरदार को अभिनय नहीं, भक्ति माना

दीपिका चिखलिया का कहना था कि उन्होंने माता सीता के किरदार को केवल अभिनय के रूप में नहीं निभाया, बल्कि उसे श्रद्धा और भक्ति के भाव से जिया। उनके अनुसार, वह स्वयं को उस समय माता सीता की भूमिका में महसूस करती थीं और यही भाव उनके अभिनय में भी दिखाई देता था।

दूसरी अभिनेत्रियों से तुलना पर कही यह बात

दीपिका ने यह भी कहा था कि वर्षों बाद भी जब कोई अभिनेत्री माता सीता का किरदार निभाती है तो उसकी तुलना उनके अभिनय से की जाती है। उनका मानना है कि उनके चेहरे पर सहज भक्ति भाव दिखाई देता था और यही कारण रहा कि दर्शकों ने उन्हें माता सीता के रूप में दिल से स्वीकार किया। उन्होंने यह भी कहा कि आज की कई अभिनेत्रियां इस किरदार को अभिनय के रूप में निभाती हैं, जबकि उनके लिए यह एक आध्यात्मिक अनुभव था।

Related Articles

Back to top button