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MP Traffic: Google Maps के डेटा से बदलेगी ट्रैफिक व्यवस्था, मध्य प्रदेश के 6 शहरों में बनेंगे एलिवेटेड कॉरिडोर

भोपाल: मध्य प्रदेश के बड़े शहरों में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए लोक निर्माण विभाग ने डी-कंजेशन पॉलिसी पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। योजना के तहत सबसे अधिक यातायात वाले मार्गों पर एलिवेटेड कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं। शुरुआती चरण में भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर और रीवा का चयन किया गया है। इनमें जबलपुर में एक एलिवेटेड कॉरिडोर बनकर तैयार हो चुका है, जबकि दूसरे कॉरिडोर की तैयारी भी शुरू कर दी गई है। राजधानी भोपाल में निर्माण कार्य लगभग 80 प्रतिशत पूरा हो चुका है।

6 शहरों में ट्रैफिक जाम कम करने की बड़ी योजना

लोक निर्माण विभाग का उद्देश्य शहरों के भीड़भाड़ वाले इलाकों में यातायात का दबाव कम करना है। इसी रणनीति के तहत विभिन्न शहरों में एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है, जिससे यात्रा का समय घटेगा और जाम की समस्या में राहत मिलने की उम्मीद है।

भोपाल में 80 फीसदी निर्माण पूरा

राजधानी भोपाल के बैरागढ़ क्षेत्र में लाउखेड़ी से निगम विसर्जन घाट तक 3.7 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जा रहा है। करीब 306 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना का लगभग 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।

इंदौर, उज्जैन और जबलपुर में भी तेज़ी से बढ़ रहा काम

इंदौर में एलआईजी चौराहे से नवलखा चौराहे तक 7.44 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण शुरू हो चुका है, जिसकी लागत 306 करोड़ रुपये है।

उज्जैन में हरिफाटक फ्लाईओवर और चिमनगंज मंडी चौराहे से इंदौर गेट तक 5.32 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण 945 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है।

जबलपुर में 7 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर 1019 करोड़ रुपये की लागत से बनकर तैयार हो चुका है। अब शहर में दूसरे कॉरिडोर के निर्माण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

ग्वालियर और रीवा भी योजना में शामिल

ग्वालियर में आईआईआईटीएम, महारानी लक्ष्मीबाई प्रतिमा, स्वर्णरेखा नदी और गिरबाई एबी रोड को जोड़ने वाले 13.3 किलोमीटर लंबे फोरलेन एलिवेटेड कॉरिडोर का करीब 75 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इस परियोजना की लागत 1065 करोड़ रुपये है।

वहीं रीवा में एलिवेटेड कॉरिडोर के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार किया जा रहा है। इसके पूरा होते ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।

डिजाइन से पहले होगा वैज्ञानिक विश्लेषण

एलिवेटेड कॉरिडोर का डिजाइन तैयार करने से पहले कई महत्वपूर्ण पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है। इसमें प्रतिदिन गुजरने वाले वाहनों की संख्या, पीक ऑवर के दौरान ट्रैफिक की स्थिति, सड़क की क्षमता, दुर्घटनाओं का रिकॉर्ड और भविष्य में बढ़ने वाले यातायात का आकलन शामिल है।

Google Maps के डेटा से तैयार होगा लेआउट

लोक निर्माण विभाग कॉरिडोर की योजना तैयार करने के लिए Google Maps से प्रत्येक घंटे का ट्रैफिक डेटा एकत्र कर रहा है। इसके आधार पर यह विश्लेषण किया जा रहा है कि किन समयों में सबसे अधिक जाम लगता है और उसी के अनुसार कॉरिडोर का लेआउट तथा डिजाइन तैयार किया जाएगा।

परियोजनाओं का डिजाइन ऑस्ट्रेलिया की न्यू साउथ वेल्स यूनिवर्सिटी से तैयार कराया जा रहा है। साथ ही सड़क सुरक्षा से जुड़े सभी मानकों का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है।

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