
‘पहले आत्मनिर्भर बनिए, फिर कीजिए लव मैरिज’, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का बड़ा बयान; पढ़ाई के दौरान गर्भवती होने पर जताई चिंता
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) के दीक्षांत समारोह में छात्र-छात्राओं से खुलकर संवाद किया। इस दौरान उन्होंने प्रेम विवाह, आत्मनिर्भरता और युवाओं की जिम्मेदारियों को लेकर महत्वपूर्ण बातें कहीं। राजधानी के सिद्धीखेड़ा बालिका गृह का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आजकल कई लड़के-लड़कियां पहले घर से भाग जाते हैं। इसके बाद लड़कियां पढ़ाई के दौरान गर्भवती हो जाती हैं और ऐसे बच्चों को बाद में कोई स्वीकार नहीं करता। नतीजतन वे सरकारी संरक्षण में बालगृह तक पहुंच जाते हैं।
उन्होंने छात्रों से कहा कि इस तरह का “पराक्रम” करने से बचना चाहिए। अपने बेटे का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि जब वह पढ़ाई के लिए बेंगलुरु गया था तो उन्होंने उससे कहा था कि यदि कोई लड़की पसंद हो तो बताना, वह शादी करा देंगी। हालांकि ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि यदि किसी को जीवनसाथी पसंद है तो पहले आत्मनिर्भर बनना जरूरी है। राज्यपाल ने स्पष्ट कहा कि वह लव मैरिज की विरोधी नहीं हैं, लेकिन आत्मनिर्भर बनने तक शादी नहीं करनी चाहिए और कोई भी गलत कदम उठाने से बचना चाहिए।
निर्माण कार्यों पर उठाए बड़े सवाल, पूछा- कहीं डिग्री फर्जी तो नहीं?
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में हो रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और उपयोगिता पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई जगह ऐसे निर्माण देखने को मिलते हैं जिन्हें देखकर निराशा होती है। कहीं बिजली का स्विच कमरे के बीचोंबीच लगा दिया जाता है तो कहीं आंगनबाड़ी केंद्रों में पानी के नल इतने ऊंचे लगाए गए हैं कि बच्चे उनका उपयोग ही नहीं कर पाते।
उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर शौचालय भी बच्चों की सुविधा के अनुरूप नहीं बनाए गए हैं। एक विश्वविद्यालय का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि प्रथम तल पर एक तरफ कुलपति और दूसरी तरफ रजिस्ट्रार का कक्ष है, जबकि दोनों के बीच पुस्तकालय प्रस्तावित किया गया है और छात्रावास वहां से लगभग एक किलोमीटर दूर स्थित है। इन कमियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि कहीं निर्माण करने वालों की डिग्री फर्जी तो नहीं है। साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता के साथ उपयोगिता का भी विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने छात्रावासों में आधुनिक रसोई और आरओ प्लांट स्थापित कराने के भी निर्देश दिए।
सरकारी शिक्षकों से गरीब विद्यार्थियों पर ज्यादा ध्यान देने की अपील
राज्यपाल ने बताया कि इस वर्ष एकेटीयू के 16, सरकारी कॉलेजों के 17 और निजी संस्थानों के 49 विद्यार्थियों को पदक मिला है। उन्होंने कहा कि सरकारी कॉलेजों में अधिकतर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्र पढ़ाई करते हैं क्योंकि वहां शुल्क कम होता है, जबकि निजी संस्थानों में अपेक्षाकृत अधिक फीस ली जाती है।
उन्होंने सरकारी स्कूलों और कॉलेजों के शिक्षकों से अधिक मेहनत करने की अपील करते हुए कहा कि गरीब परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा देना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि प्राथमिक विद्यालयों में भी अधिकतर गरीब परिवारों के बच्चे पढ़ते हैं, इसलिए वहां भी पढ़ाई की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने वाइब्रेंट गुजरात का उदाहरण देते हुए सुझाव दिया कि प्रदेश में होने वाले निवेश से जुड़ी जानकारी वाली पुस्तिकाएं स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों तक पहुंचाई जाएं, ताकि युवाओं को भविष्य के अवसरों की जानकारी मिल सके। साथ ही छात्रों से तकनीकी शिक्षा के साथ रचनात्मकता और भारतीय संस्कृति को भी बनाए रखने की अपील की।
नई शिक्षा नीति के तहत विश्वविद्यालय में शुरू हुईं कई नई पहल
एकेटीयू के कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि नई शिक्षा नीति 2020 लागू होने के बाद छात्रों को इंटर-डिसिप्लिनरी और माइनर डिग्री की सुविधा भी दी जा रही है। इस वर्ष से ड्यूल डिग्री और बीबीए पाठ्यक्रम भी शुरू किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने इंडस्ट्रियल रिसर्च प्रमोशन स्कीम लागू की है और प्रत्येक पाठ्यक्रम में एआई एप्लीकेशन की पढ़ाई अनिवार्य कर दी गई है। बेहतर प्लेसमेंट के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने जानकारी दी कि 4668 छात्रों ने आईबीएम की इंटर्नशिप की, जिसमें उन्हें 4000 रुपये का स्टाइपेंड भी मिला। इसके अलावा विश्वविद्यालय में कई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी विकसित किए गए हैं।
‘अब समाज को लौटाने का समय’, छात्रों से बोले प्राविधिक शिक्षा मंत्री
प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल ने कहा कि विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों को शिक्षा और अवसर देकर इस मुकाम तक पहुंचाया है। अब समय है कि छात्र समाज को भी कुछ लौटाएं और अपनी सफलता के साथ सामाजिक दायित्वों का भी निर्वहन करें।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के सपनों के अनुरूप उत्तर प्रदेश को स्मार्ट और आत्मनिर्भर बनाना है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल उच्च शिक्षा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का लगातार प्रयास कर रही हैं, जबकि मुख्यमंत्री युवाओं को रोजगार से जोड़ने की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके दुरुपयोग की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। एजेंटिक एआई को उन्होंने भविष्य की महत्वपूर्ण तकनीक बताया।
संबोधन में राज्यपाल ने कही ये भी अहम बातें
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विद्यार्थियों से तकनीक का केवल उपयोगकर्ता नहीं बल्कि उसका सृजनकर्ता बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत न तो डरने वाला देश है और न ही किसी को डराने वाला देश। उन्होंने पश्चिम बंगाल में ठप पड़ी परियोजनाओं पर काम शुरू होने का भी उल्लेख किया। महिला सशक्तीकरण और शिक्षा के बढ़ते प्रभाव को सकारात्मक बदलाव का आधार बताया। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाया कि कहीं खाने में नॉनवेज वाला मसाला तो इस्तेमाल नहीं हो रहा। इसके साथ ही विश्वविद्यालय परिसर में सीसीटीवी कैमरों के काम नहीं करने पर भी नाराजगी जताई।



