
राम मंदिर चढ़ावा चोरी में बड़ा खुलासा! AI कैमरों की चेतावनी हुई अनसुनी, SIT जांच में सामने आई अहम बातें
लखनऊ: अयोध्या स्थित राम मंदिर में करोड़ों रुपये के चढ़ावे की चोरी की जांच के दौरान एसआईटी को कई अहम तथ्य मिले हैं। जांच में सामने आया है कि पुलिस ने पहले ही मंदिर परिसर की सुरक्षा मजबूत करने के लिए कई बार ट्रस्ट पदाधिकारियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कैमरे लगाने और संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की मौजूदगी बढ़ाने की सलाह दी थी। आरोप है कि इन सिफारिशों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिसके बाद अब सामने आई चोरी की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राम मंदिर देश के सबसे संवेदनशील धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। यहां सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ, एसएसएफ, पीएसी, स्थानीय पुलिस और निजी सुरक्षाकर्मी समेत करीब ढाई हजार जवान तैनात रहते हैं। इसके अलावा आतंकवाद निरोधक दस्ता की एक टीम भी स्थायी रूप से परिसर में मौजूद रहती है। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने पहले ही कुछ ऐसे स्थान चिह्नित किए थे जिन्हें सुरक्षा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना गया था, लेकिन वहां अतिरिक्त पुलिस तैनाती नहीं की गई।
संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बढ़ाने का सुझाव भी ठुकराया गया
सूत्रों के मुताबिक पुलिस अधिकारियों ने इन संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करने का सुझाव दिया था ताकि निगरानी व्यवस्था और प्रभावी हो सके। हालांकि ट्रस्ट स्तर पर इन सुझावों को स्वीकार नहीं किया गया। एसआईटी और पुलिस जांच में यह तथ्य सामने आए हैं, जिसकी पुष्टि पुलिस विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी की है।
वाहनों की स्कैनिंग व्यवस्था छह साल से फाइलों में अटकी
मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में वाहनों का आवागमन होता है। ऐसे में उनकी जांच के लिए अत्याधुनिक स्कैनिंग प्रणाली की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। करीब छह वर्ष पहले लगभग 60 करोड़ रुपये की लागत से स्कैनिंग उपकरण खरीदने का प्रस्ताव तैयार किया गया था, लेकिन बजट स्वीकृत नहीं होने के कारण यह योजना आज तक लागू नहीं हो सकी। इस दौरान अयोध्या पुलिस ने संबंधित विभाग को कई बार पत्र भी भेजे, लेकिन मामला विभागीय फाइलों से आगे नहीं बढ़ पाया।
AI कैमरे लगते तो संदिग्धों की तुरंत होती पहचान
पुलिस की ओर से जिन कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कैमरों को लगाने की सिफारिश की गई थी, उनके माध्यम से परिसर में आने-जाने वाले संदिग्ध और अपराधियों की पहचान तुरंत की जा सकती थी। पुलिस के उपलब्ध डाटा से कैमरे सीधे मिलान करते और किसी अपराधी के कैमरे की निगरानी में आते ही उसकी लोकेशन और गतिविधियों की जानकारी तत्काल मिल जाती। इससे सुरक्षा एजेंसियों को समय रहते कार्रवाई करने में आसानी होती।
22 जुलाई की ट्रस्ट बैठक में सुरक्षा व्यवस्था पर होगा मंथन
चढ़ावे की करोड़ों रुपये की चोरी सामने आने के बाद अब सुरक्षा व्यवस्था को और आधुनिक बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। एसआईटी और पुलिस ने हाईटेक सुरक्षा प्रणाली लागू करने की सिफारिश की है। विस्तृत जांच रिपोर्ट पूरी होने के बाद 22 जुलाई को प्रस्तावित ट्रस्ट बैठक में इन सभी सुझावों पर विचार किया जाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि भविष्य में मंदिर परिसर को अत्याधुनिक कैमरों और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था से लैस किया जाएगा।



