
नई दिल्ली: भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे क्षेत्रों में मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों को जारी नोटिस के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य सरकार की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि, हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि प्रत्येक मामले की अलग-अलग जांच के लिए एक समिति गठित की जाए, जिसकी सिफारिश के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
राजस्थान सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सीमा से 50 किलोमीटर के दायरे में स्थित कुछ मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों को स्थान खाली करने के नोटिस जारी किए थे। इन नोटिसों को चुनौती देते हुए संबंधित पक्षों ने राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देने से किया इनकार
मामले की सुनवाई के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकार की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग स्वीकार नहीं की। अदालत ने कहा कि आगे किसी भी ध्वस्तीकरण या बेदखली जैसी कार्रवाई से पहले गठित समिति प्रत्येक मामले की अलग-अलग समीक्षा करेगी और उसी के आधार पर सिफारिशें देगी।
‘मामला धार्मिक नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा’
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति समीर जैन ने कहा कि यह मामला धार्मिक भेदभाव का नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। अदालत ने यह भी कहा कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का महत्व अपनी जगह है, लेकिन संवेदनशील सुरक्षा संबंधी जानकारी सार्वजनिक करने से राष्ट्रीय सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। इसी आधार पर अदालत ने पीर मोहम्मद शाह जिलानी दरगाह समिति और अन्य याचिकाकर्ताओं की याचिकाएं खारिज कर दीं।
याचिकाकर्ताओं ने नोटिस को दी थी चुनौती
याचिका में जैसलमेर, बाड़मेर और बीकानेर जिलों में भारत-पाकिस्तान सीमा से 50 किलोमीटर के दायरे में स्थित मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों को जारी नोटिस को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि केंद्र सरकार द्वारा जून में सीमा क्षेत्र में स्थित ऐसे धार्मिक स्थलों को हटाने की घोषणा के बाद ये नोटिस जारी किए गए।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत में यह भी दलील दी कि कई मस्जिदों और मदरसों पर पहले ही कार्रवाई हो चुकी है और उन्हें भी इसी तरह की कार्रवाई का डर है।
सरकार ने बताया कानूनी प्रक्रिया का पालन
राजस्थान सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि सभी नोटिस पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए जारी किए गए हैं। सरकार ने यह भी बताया कि संबंधित पक्षों को अपील करने और निर्माण से जुड़े मामलों में निर्धारित प्रक्रिया का लाभ लेने का अवसर उपलब्ध है।



