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CBSE की त्रिभाषा नीति पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, तत्काल रोक से इनकार; पूछा- क्या अंग्रेजी भी भारतीय भाषा मानी जा सकती है?

नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की नई त्रिभाषा नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस व्यवस्था पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि किसी नई भाषा का अध्ययन करना विद्यार्थियों के लिए नुकसानदायक नहीं होता। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी महत्वपूर्ण सवाल उठाया कि क्या अंग्रेजी को भी भारतीय भाषा के रूप में माना जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना विस्तृत सुनवाई के किसी शैक्षणिक नीति पर रोक लगाने का पर्याप्त आधार नहीं है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई तय की है, जहां सभी पक्षों की दलीलों पर विस्तार से विचार किया जाएगा।

क्या है नई त्रिभाषा व्यवस्था?

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य किया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार तीन भाषाओं में से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी होगा। वहीं, विद्यार्थियों को निर्धारित विकल्पों में से भाषाओं का चयन करने की सुविधा भी दी गई है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस बदलाव के कारण कई छात्रों को उन भाषाओं को छोड़ना पड़ सकता है, जिन्हें वे प्राथमिक कक्षाओं से लगातार पढ़ते आ रहे हैं। उनका दावा है कि इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।

शिक्षकों और संसाधनों की कमी का मुद्दा उठा

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि देश के कई स्कूलों में सभी भारतीय भाषाओं के लिए प्रशिक्षित शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। साथ ही कई भाषाओं की पाठ्यपुस्तकें भी समय पर उपलब्ध नहीं हो पाई हैं। उनका कहना था कि यदि कोई छात्र अपनी पसंद की भारतीय भाषा चुनना चाहता है तो अधिकांश विद्यालयों में उसके लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

इन दलीलों पर विचार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी भी भाषा का ज्ञान हमेशा लाभदायक होता है और बहुभाषी शिक्षा विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास में सकारात्मक भूमिका निभा सकती है। अदालत ने यह भी कहा कि स्थानीय भाषाओं की परिभाषा और अंग्रेजी की स्थिति जैसे विषयों पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता हो सकती है।

हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि विस्तृत सुनवाई से पहले नीति पर रोक लगाने का कोई उचित कारण फिलहाल सामने नहीं आया है।

केंद्र सरकार दाखिल करेगी विस्तृत जवाब

केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि सरकार और CBSE निर्धारित समय के भीतर अपना विस्तृत जवाब दाखिल करेंगे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट नीति के संवैधानिक और व्यावहारिक पहलुओं पर सभी पक्षों की दलीलें सुनकर आगे का निर्णय करेगा।

NEP 2020 का क्या है उद्देश्य?

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत लागू त्रिभाषा व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों में बहुभाषी क्षमता विकसित करना, भारतीय भाषाओं का संरक्षण करना और देश की सांस्कृतिक विविधता को मजबूत बनाना है। नीति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी राज्य पर कोई विशेष भाषा अनिवार्य रूप से नहीं थोपी जाएगी। वर्तमान शैक्षणिक सत्र में कक्षा 10 में अध्ययनरत विद्यार्थियों पर यह नई व्यवस्था लागू नहीं होगी और वे पहले की तरह दो भाषाओं के साथ अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे।

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