मोहन सरकार में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, मंत्री लखन पटेल से पशुपालन विभाग वापस; अब सिर्फ आनंद विभाग की जिम्मेदारी

भोपाल: मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने मंत्रियों के विभागों में अहम बदलाव करते हुए पशुपालन विभाग का प्रभार मंत्री लखन पटेल से वापस ले लिया है। देर रात जारी राजपत्र (गजट) अधिसूचना के अनुसार अब लखन पटेल के पास केवल आनंद विभाग का प्रभार रहेगा। फिलहाल सरकार की ओर से इस बदलाव के पीछे कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है।
सरकार के इस फैसले के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। वहीं, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने फिलहाल पशुपालन विभाग का प्रभार अपने पास रखा है। इसे लेकर आने वाले दिनों में मंत्रिमंडल विस्तार या विभागों के पुनर्वितरण की अटकलें भी तेज हो गई हैं।
लखन पटेल ने क्या कहा?
विभाग वापस लिए जाने पर मंत्री लखन पटेल ने कहा कि विभागों का आवंटन और उनमें बदलाव करना मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है। उन्होंने कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि उनसे पशुपालन विभाग क्यों वापस लिया गया। उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री ने यह विभाग फिलहाल अपने पास रखा है।
बैंक की नौकरी छोड़ राजनीति में रखा कदम
दमोह जिले की पथरिया विधानसभा सीट से विधायक लखन पटेल राजनीति में आने से पहले बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े रहे हैं। उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर से वर्ष 1978-79 में बीएससी (कृषि) की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में कई वर्षों तक सेवाएं दीं। बाद में उन्होंने नौकरी छोड़कर सक्रिय राजनीति का रास्ता चुना। राजनीतिक जीवन में वे जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
2013 में पहली बार बने विधायक
भारतीय जनता पार्टी ने वर्ष 2013 में पहली बार लखन पटेल को पथरिया विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा था, जहां उन्होंने जीत दर्ज कर विधानसभा पहुंचने में सफलता हासिल की। हालांकि, 2018 के विधानसभा चुनाव में उन्हें बहुजन समाज पार्टी की उम्मीदवार रामबाई से हार का सामना करना पड़ा।
2023 में की वापसी, फिर बने मंत्री
वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में लखन पटेल ने पथरिया सीट से दोबारा जीत दर्ज कर विधानसभा में वापसी की। इसके बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव के मंत्रिमंडल में उन्हें स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री बनाया गया और पशुपालन विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब नए आदेश के बाद उनके पास केवल आनंद विभाग का प्रभार रहेगा।



