
चंडीगढ़: हरियाणा में राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार को लेकर केंद्र सरकार ने बड़े पैमाने पर निवेश किया है। भारतमाला परियोजना के तहत प्रदेश में 1,114 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण और विकास के लिए 50,187 करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इनमें से 804 किलोमीटर लंबाई के 27 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का काम पूरा हो चुका है, जबकि शेष 310 किलोमीटर लंबाई वाली नौ परियोजनाओं पर निर्माण कार्य जारी है।
लोकसभा में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, निर्माणाधीन नौ परियोजनाओं की कुल स्वीकृत लागत 12,793 करोड़ रुपये से अधिक है। इन परियोजनाओं को तकनीकी, प्रशासनिक और स्थानीय कारणों से तय समय सीमा के भीतर पूरा नहीं किया जा सका, जिसके चलते उनकी अवधि बढ़ाई गई है। यह जानकारी भिवानी-महेंद्रगढ़ से सांसद धर्मबीर सिंह के प्रश्न के जवाब में दी गई।
इन कारणों से निर्माण कार्य में आई देरी
केंद्र सरकार के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में देरी के पीछे कई कारण हैं। इनमें भूमि अधिग्रहण से जुड़ी समस्याएं, वैधानिक मंजूरियों में विलंब, यूटिलिटी शिफ्टिंग, किसानों की आपत्तियां, ग्रेप के तहत लागू निर्माण संबंधी प्रतिबंध, निर्माण सामग्री और खनिजों की उपलब्धता में दिक्कत, कुछ ठेकेदारों का कमजोर प्रदर्शन, कोविड-19 का प्रभाव, अत्यधिक वर्षा और अन्य अप्रत्याशित परिस्थितियां शामिल हैं।
इन प्रमुख परियोजनाओं पर तेजी से चल रहा काम
प्रदेश में जिन महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर निर्माण कार्य जारी है, उनमें डीएनडी-फरीदाबाद-बल्लभगढ़ बाइपास, केएमपी लिंक, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक ग्रीनफील्ड कनेक्टिविटी परियोजना, गुरुग्राम-पटौदी-रेवाड़ी मार्ग, शामली-अंबाला (भाग-2 और भाग-3), करनाल रिंग रोड तथा इस्माइलाबाद-अंबाला सेक्शन शामिल हैं।
करीब 2,414 करोड़ रुपये की लागत वाली दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक की कनेक्टिविटी परियोजना की समय-सीमा राज्य सरकार की ओर से एलिवेटेड हिस्से का दायरा बढ़ाने के प्रस्ताव के बाद आगे बढ़ाई गई है।
कनेक्टिविटी मजबूत होने से घटेगा यात्रा समय
केंद्र सरकार का कहना है कि इन सभी परियोजनाओं के पूरा होने के बाद हरियाणा की दिल्ली-एनसीआर, औद्योगिक क्षेत्रों और पड़ोसी राज्यों से सड़क संपर्क और अधिक मजबूत होगा। इससे माल परिवहन तेज होगा, यात्रा का समय कम होगा और प्रदेश के आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।



