सीएम योगी के विजन को साकार कर रहा जीरो वेस्ट महोत्सव, हर-हर महादेव के साथ गूंजा ‘भक्ति भी, प्रकृति भी’ का संदेश
श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और स्वच्छता पर प्रशासन की पैनी नजर; डीएम ने कांवड़ मार्ग पर शिवभक्तों से संपर्क कर लिया फीडबैक
Baghpat news: हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख आस्था केंद्र परशुरामेश्वर पुरा महादेव धाम गूंज उठा। तीन दिवसीय श्रावणी कांवड़ मेले के शुभारंभ के साथ ही सुबह से कांवड़ियों और श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई। गंगाजल लेकर पहुंचे शिवभक्त जलाभिषेक के लिए मंदिर की ओर बढ़े तो कांवड़ मार्ग से लेकर पुरा महादेव धाम तक आस्था के साथ सेवा, स्वच्छता और सुव्यवस्थित व्यवस्थाओं की तस्वीर भी दिखाई दी। हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, उत्तराखंड समेत विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में कांवड़िये यहां पहुंच रहे हैं।
परंपरा का जीवंत उदाहरण पुरा महादेव
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में धार्मिक आयोजनों को सुरक्षित, स्वच्छ, सुव्यवस्थित और भव्य बनाने की जो परंपरा स्थापित हुई है, उसका जीवंत उदाहरण इस वर्ष पुरा महादेव मेला बनकर सामने आया है। जिला प्रशासन ने मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं—आस्था का सम्मान, स्वच्छता का संकल्प, सुरक्षा की गारंटी और तकनीक का उपयोग—को पूरी निष्ठा के साथ धरातल पर उतारा है। यही कारण है कि यह ऐतिहासिक मेला इस बार केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सुशासन, डिजिटल नवाचार और पर्यावरण संरक्षण का प्रेरक मॉडल बन गया है। फाल्गुनी महाशिवरात्रि में शुरू हुआ जीरो वेस्ट महोत्सव का प्रयोग अब श्रावणी कांवड़ मेले में और व्यापक रूप में आगे बढ़ रहा है।

डीएम ने खुद संभाली व्यवस्था बनाने की कमान
मेले के शुभारंभ पर जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने कांवड़ मार्ग का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने रास्ते में कांवड़ियों और श्रद्धालुओं से बातचीत कर सुविधाओं की जानकारी ली, उनका स्वागत किया और मंगल यात्रा की कामना की। अधिकारियों से पेयजल, सफाई, प्रकाश, चिकित्सा, यातायात, सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन समेत विभिन्न व्यवस्थाओं की जानकारी लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। प्रशासन का प्रयास है कि यात्रा के दौरान श्रद्धालु को जहां जरूरत हो, वहीं सुविधा और सहायता उपलब्ध हो।
कांवड़ मार्ग पर शिवभक्ति का रंग
जनपद की सीमा में प्रवेश करते ही कांवड़ मार्ग पर शिवभक्ति का रंग और गहरा हो जाता है। मार्ग के विभिन्न स्थानों पर लगाए गए आकर्षक त्रिशूल, डमरू, शिव प्रतिमाओं की आकृतियां, रंग-बिरंगी रोशनी और आकर्षक साइनज बोर्ड श्रद्धालुओं का ध्यान खींच रहे हैं। रात में रोशनी से नहाए ये स्वागत द्वार और सजावटी स्थल कांवड़ मार्ग की खूबसूरती बढ़ा रहे हैं। शिवभक्त यहां कुछ पल रुककर इन आकर्षक स्थलों के साथ तस्वीरें खिंचवा रहे हैं और अपने कांवड़ यात्रा के अनुभव को यादगार बना रहे हैं। इससे कांवड़ मार्ग पर आस्था के साथ उत्सव और उमंग का माहौल भी दिखाई दे रहा है।

पेयजल और विश्राम की व्यवस्था
कांवड़ मार्ग पर शिवभक्तों की सुविधा के लिए विभिन्न स्थानों पर पेयजल और विश्राम की व्यवस्था की गई है। मोबाइल शौचालय, प्रकाश व्यवस्था और पार्किंग को भी सक्रिय रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें और पैरामेडिकल स्टाफ जरूरत पड़ने पर तत्काल सहायता के लिए तैयार हैं। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए पुलिस और संबंधित टीमें लगातार सक्रिय हैं। रात में भी श्रद्धालुओं को सुरक्षित वातावरण मिले, इसके लिए प्रमुख स्थानों पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था की गई है। सुरक्षा व्यवस्था में पुलिस के साथ स्वास्थ्य, अग्निशमन, नगर निकाय और अन्य संबंधित विभागों की टीमों को भी जोड़ा गया है। किसी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए सहायता तंत्र सक्रिय रखा गया है। प्रशासन का जोर इस बात पर है कि श्रद्धालु को मदद के लिए दूर न जाना पड़े, बल्कि मेला क्षेत्र और कांवड़ मार्ग पर ही आवश्यक सहयोग उपलब्ध हो।
धार्मिक महत्ता सदियों से श्रद्धालुओं को आकर्षित करती रही
पुरा महादेव मंदिर की प्राचीनता और धार्मिक महत्ता सदियों से श्रद्धालुओं को आकर्षित करती रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड और अन्य राज्यों से भी लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। मान्यता है कि इस पवित्र स्थल पर भगवान शिव का जलाभिषेक करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। आज मेले के पहले दिन मंदिर परिसर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने इस आस्था को और भी सशक्त रूप से प्रमाणित किया।

‘भक्ति भी, प्रकृति भी’ के संदेश के साथ
इस वर्ष पुरा महादेव मेला एक और विशेष कारण से ऐतिहासिक बन गया है। पुरा महादेव मेले की एक बड़ी तस्वीर आस्था के साथ प्रकृति की चिंता की है। ‘भक्ति भी, प्रकृति भी’ के संदेश के साथ जीरो वेस्ट महोत्सव को इस बार श्रावणी कांवड़ मेले की व्यवस्थाओं से जोड़ा गया है। फाल्गुनी महाशिवरात्रि में बागपत प्रशासन ने इसी सोच के साथ पहला जीरो वेस्ट प्रयोग किया था। उस प्रयोग में खराब चप्पलों से आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के बैठने के लिए मैट, प्लास्टिक बोतलों से निकले रेशों से ‘नन्ही कली’ गुड़िया, पूजा के फूलों से अगरबत्ती तथा कलावों और अन्य सामग्री के पुनः उपयोग जैसे प्रयोग किए गए थे। इस प्रयोग ने यह संदेश दिया कि मेले से निकलने वाला कचरा केवल निस्तारण की समस्या नहीं, बल्कि उपयोगी वस्तुओं में बदलने वाला संसाधन भी हो सकता है। अब इसी सीख को श्रावणी कांवड़ मेले के बड़े जनसमूह के बीच व्यवहार का हिस्सा बनाने की कोशिश की जा रही है।
सीएम के डिजिटल उत्तर प्रदेश के विजन को साकार कर रहा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के डिजिटल उत्तर प्रदेश के विजन को साकार करते हुए इस बार मेले की व्यवस्थाओं में तकनीक भी श्रद्धालुओं की मददगार बनी है। सूचना विभाग बागपत की ओर से तैयार क्यूआर कोड आधारित कांवड़ यात्रा एप में कंट्रोल रूम, मेडिकल सहायता, अग्निशमन सहायता, सार्वजनिक शौचालय, कांवड़ यात्रा मार्ग और पुरा महादेव मंदिर परिसर का डिजिटल नक्शा उपलब्ध है।
श्रद्धालु क्यूआर कोड स्कैन कर मोबाइल पर जरूरी सुविधाओं की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। एप में भोजन की गुणवत्ता से संबंधित शिकायत दर्ज करने की सुविधा के साथ आधिकारिक इंटरनेट मीडिया माध्यमों से जुड़ने का विकल्प भी दिया गया है। जिले की प्रवेश सीमाओं, प्रमुख कांवड़ मार्गों और मंदिर परिसर में क्यूआर कोड लगाए गए हैं, ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु इस सुविधा से जुड़ सकें।

स्थानीय लोग और मंदिर से जुड़े लोग कर रहे सेवा
कांवड़ियों की सेवा में स्थानीय लोग, स्वयंसेवक, दुकानदार, मंदिर से जुड़े लोग और विभिन्न विभागों की टीमें अपनी भूमिका निभा रही हैं। प्रशासन का जोर श्रद्धालुओं को सुविधा देने के साथ उन्हें स्वच्छता और अनुशासन में सहभागी बनाने पर भी है। इसी कारण जीरो वेस्ट का संदेश डस्टबिन और सफाई व्यवस्था से आगे बढ़ाकर लोगों के व्यवहार तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। मेले की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन पूरी तरह सतर्क और सजग है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कानून व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की नीति के अनुरूप मेला क्षेत्र और कांवड़ मार्ग पर व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। विभिन्न स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और कंट्रोल रूम से चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार गश्त कर रहे हैं, जिससे श्रद्धालुओं को सुरक्षित वातावरण में पूजा-अर्चना करने का अवसर मिल रहा है।
धार्मिक आयोजनों को नई पहचान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में धार्मिक आयोजनों को नई पहचान मिली है। काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या धाम और मथुरा की तरह अब पुरा महादेव मेला भी प्रदेश के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल होता जा रहा है। यह मेला न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि प्रदेश के विकास, सुशासन और सांस्कृतिक समृद्धि का भी प्रतीक बन गया है। पुरा महादेव मेला इस बार आस्था, स्वच्छता, सुरक्षा और तकनीक का अद्भुत संगम बनकर उभरा है। जीरो वेस्ट महोत्सव के रूप में आयोजित यह मेला पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा स्रोत बन गया है। यह आयोजन दर्शाता है कि जब प्रशासनिक इच्छाशक्ति, जनभागीदारी और सकारात्मक सोच एक साथ मिलती है, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।

हर-हर महादेव के जयघोष के साथ प्रारंभ
हर-हर महादेव के जयघोष के साथ प्रारंभ हुआ यह ऐतिहासिक मेला अब तीन दिनों तक आस्था, सेवा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता रहेगा। यह मेला न केवल श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत है, बल्कि उत्तर प्रदेश सरकार की दूरदर्शी सोच, उत्कृष्ट प्रशासनिक व्यवस्था और स्वच्छता के प्रति प्रतिबद्धता का जीवंत प्रमाण भी बन गया है। पुरा महादेव की पावन भूमि पर उमड़ी आस्था की यह अलौकिक धारा यह संदेश दे रही है कि उत्तर प्रदेश आज आस्था, विकास और सुशासन के नए युग की ओर अग्रसर है—जहां परंपरा का सम्मान भी है और आधुनिकता का समावेश भी।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी अनिल कुमार सिंह, अपर जिलाधिकारी विनीत कुमार उपाध्याय, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी विपिन कुमार, डिप्टी सीएमओ डॉ. यशवीर, जिला सूचना अधिकारी राहुल भाटी अधिशासी अधिकारी मनोज रस्तोगी हरी लाल पटेल आस्था पाठक सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।



