उत्तर प्रदेश

UP में जाली नोटों के बड़े नेटवर्क का खुलासा, नेपाल बॉर्डर से कई बार पहुंची खेप; 10 से ज्यादा राज्यों तक फैला गिरोह

लखनऊ: उत्तर प्रदेश और दूसरे राज्यों में जाली नोटों की सप्लाई करने वाले एक बड़े गिरोह का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि गिरोह के सदस्य नेपाल बॉर्डर के रास्ते कई बार जाली नोटों की खेप भारत लाए और इसके बाद उत्तर प्रदेश के जरिए अलग-अलग राज्यों में इसकी सप्लाई की गई। मामले की जांच कर रही एटीएस अब आरोपियों के खिलाफ आतंकवाद विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की तैयारी में है।

एटीएस ने शनिवार को कासगंज के गंजडुंडवारा थाना क्षेत्र के गणेशपुर गांव निवासी अजीम खान और राजा उर्फ समीरुल को गिरफ्तार किया था। दोनों के कब्जे से एक लाख रुपये के जाली नोट बरामद किए गए। जांच में सामने आया कि बरामद नोटों में उच्च सुरक्षा वाले फीचर मौजूद थे। जांच एजेंसी को आशंका है कि इतनी उच्च गुणवत्ता वाले जाली नोटों के पीछे पाकिस्तान का नेटवर्क हो सकता है।

सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों से जुड़े कुछ और महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। इनकी पुष्टि होने के बाद दोनों के खिलाफ आतंकवाद विरोधी कानून यानी यूएपीए के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

दस से ज्यादा राज्यों तक फैला नेटवर्क

जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह का नेटवर्क उत्तर प्रदेश और दिल्ली समेत करीब दस राज्यों तक फैला हुआ है। एजेंसी के मुताबिक, यह गिरोह पिछले दो से तीन वर्षों से जाली नोटों के कारोबार में सक्रिय था। गिरफ्तार आरोपियों में से समीरुल का बड़ा भाई भी इस नेटवर्क की अहम कड़ी बताया जा रहा है। एजेंसी ने उसे मामले में आरोपी बनाया है और उसकी तलाश की जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, नेपाल के रास्ते जाली नोटों की खेप भारत लाना गिरोह के लिए अपेक्षाकृत आसान था। इसी वजह से नेटवर्क से जुड़े लोगों ने इस मार्ग का कई बार इस्तेमाल किया। नेपाल सीमा के जरिए लाई गई खेप को बाद में उत्तर प्रदेश सहित दूसरे राज्यों में पहुंचाया जाता था।

मोबाइल और व्हाट्सऐप चैट से खुल सकते हैं कई राज

जांच एजेंसी ने गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच की है। इन उपकरणों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों की व्हाट्सऐप चैट जांच के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

चैट में कथित तौर पर जाली नोटों की खेप कहां पहुंचानी है, कब पहुंचानी है और किस तरह उसकी सप्लाई करनी है, इससे जुड़ी जानकारी मिलने की बात सामने आई है। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने गिरोह से जुड़े 8 से 10 अन्य लोगों के नाम भी बताए हैं। अब जांच एजेंसियां इन नामों और उनकी भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।

रिमांड पर लेकर होगी पूछताछ

जेल भेजे जा चुके दोनों आरोपियों को एटीएस जल्द अपनी हिरासत में लेकर पूछताछ कर सकती है। एजेंसी का फोकस गिरोह के पूरे नेटवर्क, जाली नोटों की सप्लाई के स्रोत और नेपाल बॉर्डर के जरिए हुई खेपों की जानकारी जुटाने पर है।

मामले में यूएपीए के तहत कार्रवाई होने की स्थिति में आगे चलकर जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी को भी सौंपी जा सकती है। जाली नोटों से जुड़े मामलों की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी की भूमिका रहती है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों के नाम सामने आने की संभावना है।

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