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भाजपा के आंगन में फिर खिली ‘तुलसी’

टीम नितिन में स्मृति ईरानी की दमदार एंट्री के साथ आधी आबादी को पूरा सम्मान, 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्षों में छह पर महिलाएं

दस्तक ब्यूरो

भारतीय जनता पार्टी की कमान संभालने के करीब सात महीने बाद नितिन नबीन ने अपनी नई टीम की घोषणा कर दी है। छोटे परदे पर ‘तुलसी’ के रूप में मशहूर स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महामंत्री और राम माधव को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। सात राज्यों से आठ लोगों को महामंत्री बनाया गया है। इनमें सबसे ज्यादा दो नेता यूपी से शामिल हुए। टीम में कुल 13 लोगों को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है, इनमें छह महिलाएं शामिल हैं, यानि आधी आबादी को पूरा सम्मान देने का प्रयास किया गया है। यूपी में आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव और 2029 में होने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर स्मृति ईरानी को यूपी की कमान मिलना सियासी हलके में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

टीम में राष्ट्रीय महामंत्री बनायी गयी स्मृति ईरानी के अलावा, राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया, पूर्व केंद्रीय मंत्री डी. पुरंदेश्वरी और राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की पूर्व प्रमुख रेखा वर्मा उपाध्यक्ष नियुक्त की गई हैं। कविता पाटीदार और संगीता यादव को राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किया गया है। रूप कुमारी चौधरी को भाजपा महिला मोर्चा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि प्रीति गांधी को सोशल मीडिया सह-संयोजक बनाया गया है।

पार्टी की नई कार्यकारिणी का ऐलान हो गया है। यह टीम पार्टी के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में काम करने वाली है। खास बात यह है कि इस टीम में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अलावा भारी-भरकम मानव संसाधन विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी भी संभाल चुकीं स्मृति ईरानी को भी शामिल किया गया है। उन्हें यूपी की कमान भी सौंपी गई है। देश में सबसे ज्यादा विधानसभा सीट (403) वाले उत्तर प्रदेश में अगले साल (2027) विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में स्मृति ईरानी के सामने यूपी में जीत बरकरार रखने की बड़ी चुनौती भी होगी।

स्मृति को उत्तर प्रदेश की कमान मिलने के मायने
स्मृति ईरानी को बीजेपी का राष्ट्रीय महामंत्री बनाते हुए यूपी की कमान मिलना बेहद अहम माना जा रहा है। स्मृति के लिए ये इसलिए भी अहम है, क्योंकि 2 साल पहले साल 2024 में अमेठी लोकसभा चुनाव हारने के बाद से उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी गई थी। बता दें कि स्मृति साल 2019 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को अमेठी से लोकसभा चुनाव हराकर इतिहास रच चुकी हैं। यूपी की कमान मिलने के बाद स्मृति के सामने उत्तर प्रदेश की जीत को बरकरार रखने की बड़ी चुनौती होगी। यूपी में समाजवादी पार्टी लगातार अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी जैसे बड़े मुद्दे उठा रही है। ऐसे में स्मृति के सामने इस मुद्दे रूपी चक्रव्यूह को तोड़ने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। यूपी लोकसभा चुनावों के लिहाज से भी बेहद अहम है। यूपी में विधानसभा के साथ-साथ पूरे देश में लोकसभा की भी सबसे ज्यादा सीटें (80) हैं। यूपी में 2027 के विधानसभा चुनावी नतीजों का बड़ा असर साल 2029 के लोकसभा चुनावी पर भी पड़ सकता है। इसलिए भी स्मृति ईरानी के सामने चुनौती और ज्यादा गंभीर हो जाती है।

कांग्रेस परिवार के गढ़ में लगा चुकी हैं सेंध
स्मृति ईरानी अमेठी सीट पर राहुल गांधी को 2019 में हराकर पहले ही खुद को साबित कर चुकी हैं। दरअसल, यूपी के अमेठी को शुरू से ही कांग्रेस परिवार का गढ़ माना जाता रहा है। साल 1967 में अमेठी को लोकसभा सीट का दर्जा मिला। इसके बाद से ही ये सीट गांधी परिवार का गढ़ बन गई। अस्तित्व में आने के बाद से ही पूरे 31 साल तक यहां कांग्रेस काबिज रही। हालांकि, साल 1998 में सोनिया गांधी के करीबी सतीश शर्मा को बीजेपी के संजय सिंह से हार का सामना करना पड़ा। साल 1999 में सोनिया गांधी ने यहां से चुनाव लड़ा और संजय सिंह को पूरे 3 लाख से ज्यादा वोटों से हराया। इसके साथ ही ये सीट दोबारा कांग्रेस के खाते में आ गई। फिर साल 2004 में सोनिया गांधी ने अपने बेटे राहुल के लिए रास्ता बनाया और खुद रायबरेली से चुनाव लड़ा। राहुल अमेठी से 2004 फिर 2009 और इसके बाद साल 2014 में 3 बार लगातार सांसद रहे। लेकिन साल 2019 में बीजेपी की टिकट पर स्मृति ईरानी ने चुनाव लड़कर पूरी बाजी पलट दी और राहुल को हार का सामना करना पड़ा।

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