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Crude Oil: अमेरिका-ईरान की जंग की आहट से कच्चे तेल में उबाल, 90 डॉलर के पार पहुंचा ब्रेंट; 100 डॉलर का खतरा

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। ईरान के लारक आइलैंड पर अमेरिकी मिसाइल हमले और इसके बाद ईरान की ओर से अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरों ने तेल बाजार की चिंता बढ़ा दी है। संभावित सैन्य टकराव और आपूर्ति बाधित होने की आशंका के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 2 फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई है।

ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर के पार, डब्ल्यूटीआई भी चढ़ा
तनाव बढ़ने के साथ ब्रेंट क्रूड वायदा 2.12 डॉलर यानी 2.41 फीसदी की तेजी के साथ 90.22 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.80 डॉलर यानी 2.16 फीसदी बढ़कर 85.20 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता देखा गया। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव लंबा खिंचता है और कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो कीमतें फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच सकती हैं।

जुलाई के बाद ईरान पर अमेरिका का पहला हमला
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में स्थित ईरान के लारक आइलैंड पर मौजूद दो मिसाइल प्रक्षेपकों को निशाना बनाया। जुलाई के बाद ईरान पर अमेरिका की ओर से इसे पहला सैन्य हमला बताया जा रहा है। इसके बाद ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने जॉर्डन में स्थित दो अमेरिकी वायु ठिकानों पर हमले का दावा किया। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव से वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर नई आशंकाएं पैदा हो गई हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ी चिंता
तेल बाजार के लिए सबसे बड़ा जोखिम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर है। दुनिया की करीब एक-पांचवीं तेल जरूरत का हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। तनाव और हमलों के खतरे के बीच रविवार और सोमवार को इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या घटकर प्रतिदिन करीब 5 रह गई। इससे पहले शनिवार को इसी समुद्री मार्ग पर एक कच्चे तेल के टैंकर को मिसाइल से निशाना बनाए जाने की खबर भी सामने आई थी। खतरे को देखते हुए कई अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी कंपनियां इस मार्ग पर अपने जहाजों की आवाजाही को लेकर सतर्कता बरत रही हैं।

अमेरिका रणनीतिक तेल भंडार भरने की तैयारी में
वैश्विक तेल बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वेनेजुएला के साथ हुए हालिया समझौते से मिलने वाले कच्चे तेल का इस्तेमाल अमेरिका के रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व को फिर से भरने के लिए किया जाएगा। अमेरिका का रणनीतिक तेल भंडार फिलहाल करीब 44 साल के निचले स्तर पर बताया जा रहा है। ऐसे में पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से अमेरिकी प्रशासन के सामने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चुनौती और बढ़ सकती है।

भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम फिलहाल स्थिर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बावजूद भारत में सरकारी तेल कंपनियों ने फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। सोमवार सुबह दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर रहा। हालांकि, अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लंबे समय तक बना रहता है और वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी का दबाव बन सकता है।

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