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NSE IPO आज से खुला, कमाई के साथ जोखिम भी; निवेश से पहले इन बातों पर दें ध्यान

नई दिल्ली: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) का सार्वजनिक निर्गम यानी IPO आज से खुदरा निवेशकों के लिए खुल रहा है। यह आईपीओ ऐसे समय आया है, जब डेरिवेटिव ट्रेडिंग वॉल्यूम में गिरावट के चलते कैपिटल मार्केट से जुड़ी कंपनियों को लेकर निवेशकों में सतर्कता बनी हुई है। इसका असर एनएसई के ऑफर प्राइस पर भी दिखाई दे रहा है। कंपनी का मूल्यांकन वित्त वर्ष 2027-28 की अनुमानित कमाई के करीब 35 से 38 गुना के बराबर है, जो वैश्विक एक्सचेंज ऑपरेटरों की तुलना में काफी ज्यादा है।

कारोबार कितना मजबूत है?

किसी कंपनी के आईपीओ में निवेश से पहले उसके कारोबार और कमाई की स्थिति को देखना अहम होता है। वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के मुताबिक, कैश-मार्केट टर्नओवर में एनएसई की हिस्सेदारी 92.99 फीसदी रही। वहीं, इक्विटी फ्यूचर्स में इसकी हिस्सेदारी 99.79 फीसदी और इक्विटी ऑप्शंस प्रीमियम टर्नओवर में 74.71 फीसदी रही।

जून 2026 में समाप्त तिमाही के दौरान एनएसई ने 4,560 करोड़ रुपये का परिचालन राजस्व और 3,121 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया। हालांकि, कंपनी की कमाई मजबूत दिखती है, लेकिन इसके कारोबार में डेरिवेटिव और खासतौर पर ऑप्शंस से होने वाली आय की अहम भूमिका है।

ऑप्शंस ट्रेडिंग में सुस्ती का मुनाफे पर असर

नए नियमों के बाद ऑप्शंस ट्रेडिंग की वृद्धि की रफ्तार धीमी हुई है। भारतीय बाजारों को वैश्विक मानकों के अनुरूप लाने के लिए ट्रेडिंग नियमों में भी बदलाव किए गए हैं। एनएसई अपने कुल राजस्व का करीब 80 फीसदी ट्रेडिंग से हासिल करता है और इसमें लगभग 60 फीसदी हिस्सेदारी ऑप्शंस ट्रेडिंग की है।

2024 के अपने चरम स्तर की तुलना में ट्रेडिंग वॉल्यूम में 27 फीसदी तक की गिरावट आई है। इसका असर कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर भी पड़ा है।

मार्च 2026 में समाप्त वित्त वर्ष के दौरान एनएसई का परिचालन राजस्व 3.1 फीसदी घटा, जबकि मुनाफे में 15.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। बर्नस्टीन के अनुमान के मुताबिक, ऑप्शंस ट्रेडिंग पर नियामकीय उपायों के चलते मार्च 2027 में समाप्त होने वाले वित्त वर्ष में कंपनी की वृद्धि दर करीब 5 फीसदी तक धीमी हो सकती है।

खुदरा निवेशकों के पास क्या विकल्प?

खुदरा निवेशकों के सामने मुख्य तौर पर दो विकल्प हैं। पहला, आईपीओ की अवधि के दौरान इसमें आवेदन करना। दूसरा, आईपीओ की लिस्टिंग का इंतजार करना और बाजार में शेयर की कीमत तय होने के बाद सेकेंडरी मार्केट से खरीदारी करना।

लिस्टिंग गेन के भरोसे न रहें

आईपीओ में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए सिर्फ लिस्टिंग के दिन होने वाले संभावित फायदे पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। निवेश से पहले कंपनी के मौजूदा मूल्यांकन, कारोबार की भविष्य की संभावनाओं और डेरिवेटिव कारोबार में हो रहे बदलावों को देखना जरूरी है। इसके साथ ही निवेशक को अपनी जोखिम उठाने की क्षमता को भी ध्यान में रखना चाहिए।

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