देहरादून: यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने को लेकर व्यापारियों और कांग्रेस की ओर से विरोध जताया गया है। देहरादून उद्योग व्यापार मंडल समेत कई व्यापारी संगठनों ने सरकार से शुल्क व्यवस्था वापस लेने की मांग की है और कहा है कि इसे लागू किया गया तो आंदोलन किया जाएगा। वहीं कांग्रेस ने इस फैसले पर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर जनता के लिए ‘तोहफा’ बताया है।
हालांकि केंद्र सरकार के अनुसार नया ढांचा सभी यूपीआई लेनदेन पर शुल्क नहीं लगाता। ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान और छोटे व्यापारियों के लिए तय शून्य-MDR व्यवस्था वाले लेनदेन मुफ्त रहेंगे। सरकार के मुताबिक करीब 96 फीसदी व्यापारी लेनदेन इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे।
कांग्रेस ने शुल्क व्यवस्था पर उठाए सवाल
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि यूपीआई पर शुल्क का असर आम लोगों पर पड़ेगा। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि इस व्यवस्था का उल्लेख बजट में क्यों नहीं किया गया। गोदियाल ने एमडीआर पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
केंद्र सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि एमडीआर सरकार या एनपीसीआई द्वारा वसूला जाने वाला कर नहीं है, बल्कि भुगतान व्यवस्था से जुड़े बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं समेत अन्य भागीदारों के बीच वितरित होने वाला शुल्क है। ग्राहकों से एमडीआर वसूलने की अनुमति नहीं है।
व्यापारियों ने कहा- लागत बढ़ी तो ग्राहकों पर असर पड़ेगा
दून उद्योग व्यापार मंडल के महासचिव सुनील मैसोन ने कहा कि एक ओर डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर व्यापारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ाने वाली व्यवस्था लाई जा रही है। उनका कहना है कि व्यापारी अपनी जेब से अतिरिक्त लागत वहन नहीं करेंगे और इसका असर वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है।
व्यापारी संगठनों ने सरकार से यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने के बजाय इसकी लागत के लिए सब्सिडी देने की मांग की है। उनका कहना है कि शुल्क व्यवस्था लागू होने पर डिजिटल भुगतान के बजाय नकद लेनदेन को बढ़ावा मिल सकता है।
किन लेनदेन पर कितना MDR?
केंद्र सरकार की 15 सितंबर की जानकारी के मुताबिक ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा व्यक्ति से व्यापारी यानी P2M लेनदेन पर 0.4 फीसदी MDR लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर यह शुल्क अधिकतम ₹300 प्रति लेनदेन तक सीमित रहेगा।
इसके अलावा रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे चुनिंदा क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर ₹5 का फ्लैट MDR निर्धारित किया गया है। छोटे व्यापारी, जो पी2पीएम श्रेणी में यूपीआई क्यूआर के जरिए हर महीने ₹1 लाख तक प्राप्त करते हैं, उनके लेनदेन पर शून्य MDR जारी रहेगा।
त्योहारों से पहले व्यापारी संगठनों में नाराजगी
देहरादून कपड़ा कमेटी के प्रधान प्रवीण कुमार जैन ने कहा कि त्योहारों के ठीक पहले व्यापारियों पर नई व्यवस्था का असर पड़ना चिंता का विषय है। उनका कहना है कि त्योहारी मौसम कारोबार के लिहाज से महत्वपूर्ण होता है और ऐसे फैसलों से बाजार में व्यापारियों तथा ग्राहकों दोनों पर असर पड़ सकता है। कपड़ा कमेटी ने भी व्यवस्था वापस लेने की मांग करते हुए आंदोलन में शामिल होने की बात कही है।
UPI के बढ़ते इस्तेमाल से दून में 110 एटीएम बंद
देहरादून जिले में डिजिटल भुगतान और यूपीआई के बढ़ते इस्तेमाल का असर नकद निकासी पर भी पड़ा है। बीते दो वर्षों में जिले में नकद निकासी करीब 30 फीसदी घटने का दावा किया गया है। इसके बाद 110 एटीएम स्थायी रूप से बंद किए गए हैं।
वर्तमान में जिले में 27 प्रमुख बैंकों की 670 शाखाएं संचालित हैं और इनके तहत करीब 650 एटीएम चल रहे हैं। बैंकों ने नए एटीएम लगाने की रफ्तार भी कम कर दी है और कुछ जगहों पर एटीएम से सुरक्षा गार्ड हटाए जाने की बात सामने आई है।
लीड बैंक अधिकारी संजय भटिया के अनुसार यूपीआई के व्यापक इस्तेमाल से लोगों की नकद पर निर्भरता कम हुई है। छोटे रेहड़ी-पटरी कारोबारियों से लेकर बड़े शोरूम तक यूपीआई क्यूआर के जरिए भुगतान किया जा रहा है।
क्या MDR से फिर बढ़ेगा नकद लेनदेन?
व्यापारी संगठनों का कहना है कि अगर ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर का असर बढ़ता है तो कुछ कारोबारी डिजिटल भुगतान के बजाय नकद को प्राथमिकता दे सकते हैं। इससे एटीएम से नकद निकासी बढ़ने की संभावना पर भी चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य यूपीआई पारिस्थितिकी तंत्र को दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बनाना है और आम ग्राहकों के लिए यूपीआई भुगतान मुफ्त रहेगा।




