
लुधियाना: पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और पाकिस्तान इंटेलिजेंस ऑपरेटिव्स (पीआईओ) भारतीय युवाओं को निशाना बनाने के लिए डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर रहे हैं। सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने पंजाब समेत देशभर के युवाओं को लेकर चिंता जताई है। एजेंसियों के मुताबिक, धर्म, पार्ट-टाइम नौकरी, बड़ी लॉटरी, सोशल मीडिया पर हनीट्रैप और जल्दी पैसा कमाने जैसे लालच के जरिए युवाओं को अपने जाल में फंसाया जा रहा है। इसके बाद उनसे जासूसी, संवेदनशील ठिकानों की वीडियोग्राफी और हिंसक गतिविधियां तक कराई जा रही हैं। हाल में फिरोजपुर रोड पर मिले संदिग्ध जासूसी कैमरों और संगरूर में पेट्रोल बम धमाकों के मामलों ने इस खतरे को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, इसी को देखते हुए खुफिया एजेंसियों ने एडवाइजरी जारी कर अलर्ट किया है।
फिरोजपुर रोड के कैमरों से लेकर संगरूर ब्लास्ट तक, सामने आया डिजिटल नेटवर्क
खुफिया एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ समय में पंजाब के कई युवा अनजाने में या पैसों के लालच में आईएसआई के कथित नेटवर्क के संपर्क में आए हैं। फिरोजपुर रोड पर हाल में मिले संदिग्ध जासूसी सीसीटीवी कैमरों ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया। आशंका जताई गई कि सीमा पार बैठे संचालक स्थानीय युवाओं की मदद से सामरिक और संवेदनशील स्थानों पर निगरानी उपकरण लगवा रहे हैं।
इसी तरह संगरूर में भाजपा कार्यालय पर हुए पेट्रोल बम हमले की जांच में गिरफ्तार दो युवाओं के विदेशी संचालक के संपर्क में होने की बात सामने आई थी। जांच के मुताबिक, सोशल मीडिया के जरिए संपर्क में आए इन युवाओं को महज 2,200 रुपये के अग्रिम भुगतान का लालच दिया गया था। इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर बड़ी हिंसक वारदात को अंजाम दिया।
लॉटरी से हनीट्रैप तक, इन 5 तरीकों से युवाओं को निशाना बनाने का दावा
खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, पाकिस्तान के +92 कोड या वर्चुअल नंबरों से व्हाट्सऐप पर केबीसी, कार या लाखों रुपये के इनाम जीतने के फर्जी संदेश भेजे जाते हैं। इसके बाद प्रोसेसिंग फीस के नाम पर पैसे मांगे जाते हैं या ऐसे लिंक भेजे जाते हैं, जिनके जरिए मोबाइल में सेंध लगाने की कोशिश की जाती है।
दूसरे तरीके में फेसबुक, इंस्टाग्राम और टेलीग्राम पर आकर्षक लड़कियों के नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाकर युवाओं से दोस्ती की जाती है। इसके बाद अश्लील वीडियो कॉल की स्क्रीन रिकॉर्डिंग कर ब्लैकमेल किया जाता है और भारतीय सेना के ठिकानों, एयरबेस, रेलवे स्टेशनों तथा वीआईपी आवाजाही से जुड़ी तस्वीरें मांगी जाती हैं।
तीसरे तरीके में धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल कर युवाओं को कट्टर विचारों की ओर धकेलने और उन्हें व्यवस्था तथा देश के खिलाफ इस्तेमाल करने की कोशिश की जाती है। एजेंसियों के अनुसार, ऐसे युवाओं को स्लीपर सेल या मुखबिर के तौर पर तैयार करने का प्रयास भी किया जा सकता है।
चौथे तरीके में टेलीग्राम पर टास्क और डाटा एंट्री के नाम पर शुरुआत में 200 से 500 रुपये तक का मुनाफा दिखाया जाता है। इसके बाद कथित तौर पर लोकेशन और संवेदनशील तस्वीरें साझा करने के लिए दबाव बनाया जाता है।
पांचवें तरीके में अवैध चीनी और पाकिस्तानी ऐप्स के जरिए आसान कर्ज देने का लालच दिया जाता है। बाद में भारी ब्याज और निजी डाटा के कथित दुरुपयोग के जरिए युवाओं पर दबाव बनाकर देशविरोधी गतिविधियों में शामिल करने की कोशिश की जाती है।
जासूसी में फंसे तो जेल के साथ करियर पर भी पड़ेगा असर
सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि देशविरोधी गतिविधियों या जासूसी में शामिल पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, चाहे वे जानबूझकर शामिल हुए हों या लालच में आकर इस नेटवर्क का हिस्सा बने हों। ऐसे मामलों में गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) और ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट (ओएसए) के तहत गैर-जमानती मामले दर्ज किए जा रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई के बाद सरकारी नौकरी, पासपोर्ट और विदेश जाने से जुड़े अवसरों पर गंभीर असर पड़ सकता है। चंद रुपयों के लालच में उठाया गया कदम युवाओं को जेल तक पहुंचा सकता है और उनका भविष्य प्रभावित हो सकता है।
सोशल मीडिया के जरिए पंजाब पुलिस चला रही जागरूकता अभियान
पंजाब पुलिस सोशल मीडिया और जागरूकता अभियानों के जरिए लोगों को ऐसे संदिग्ध संपर्कों से सावधान रहने की अपील करती है। पुलिस की सलाह है कि +92 कोड या किसी अनजान विदेशी नंबर से आने वाले व्हाट्सऐप कॉल, संदेश और एपीके फाइलों को तुरंत ब्लॉक और रिपोर्ट किया जाए।
पुलिस अनजान सोशल मीडिया प्रोफाइल से आने वाली वीडियो कॉल को भी रिसीव नहीं करने की सलाह देती है, क्योंकि स्क्रीन रिकॉर्डिंग के जरिए ब्लैकमेलिंग की आशंका हो सकती है। बिना लॉटरी खरीदे इनाम जीतने या कुछ रुपये के बदले किसी स्थान की तस्वीर अथवा वीडियो बनाकर भेजने जैसे प्रस्तावों को भी ठुकराने की सलाह दी गई है।
ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग का शिकार होने पर डरकर किसी देशविरोधी गतिविधि में शामिल होने के बजाय तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करने को कहा गया है। साथ ही माता-पिता से बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों और संदिग्ध विदेशी संपर्कों पर नजर रखने की अपील की गई है।



