
नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के दौरान हुई हिंसा और कथित गुंडागर्दी को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि देश की राजधानी में इस तरह की घटनाएं होना बेहद चिंताजनक है। कोर्ट ने छात्रसंघ चुनाव लड़ रहे सभी 140 उम्मीदवारों को नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके खिलाफ हर्जाना क्यों न लगाया जाए। सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने अब तक की कार्रवाई की स्थिति भी अदालत के सामने रखी।
बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियों के काफिले पर सवाल
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने नॉर्थ कैंपस में बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियों के कथित काफिले को लेकर संबंधित पुलिस उपायुक्त से सवाल किए। अदालत ने कहा कि तस्वीरों में जो दिखाई दे रहा है, उससे इनकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने पूछा कि इतनी पुलिस तैनाती के बावजूद ऐसे वाहनों को वहां आने की अनुमति कैसे मिली।
पुलिस उपायुक्त ने अदालत को बताया कि लगातार वाहनों की जांच की जा रही है। इस पर पीठ ने कहा कि इस तरह के काफिले से डर और दबदबे का माहौल बनता है। अदालत ने पूछा कि इसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए। पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि उम्मीदवार कार की छत और बोनट पर खड़े दिखाई दे रहे हैं।
998 चालान और छह एफआईआर की जानकारी
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि मामले में 998 चालान जारी किए गए हैं। वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं और वाहनों का पंजीकरण प्रमाणपत्र भी जब्त किया जाएगा। पुलिस की ओर से बताया गया कि एक व्यक्ति को बाहर किया गया है, छह प्राथमिकी दर्ज की गई हैं और चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन को लेकर भी पुलिस ने कार्रवाई की जानकारी दी। बताया गया कि खराब वाहनों, बिना लाइसेंस और अन्य यातायात नियमों से जुड़े मामलों में कुल 5737 चालान किए गए हैं।
प्रोफेसर पर हमले को लेकर भी कोर्ट ने पूछे सवाल
मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान प्रोफेसरों पर हुए हमले की कार्रवाई के बारे में भी सवाल किया। अदालत ने पूछा कि गिरफ्तार किया गया व्यक्ति छात्र है या नहीं। इस पर एएसजी ने बताया कि प्रोफेसर पर हमला छात्रों ने ही किया था।
पीठ ने पूछा कि क्या इस कार्रवाई की जानकारी विश्वविद्यालय प्रशासन को दी गई है और संबंधित छात्रों के खिलाफ क्या कदम उठाए गए हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से बताया गया कि छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
छात्र संगठनों से भी मांगा जवाब
सुनवाई के दौरान अलग-अलग छात्र संगठनों की ओर से वकील अदालत में पेश हुए। एबीवीपी की ओर से अधिवक्ता अपूर्ण कुरुप और एनएसयूआई की ओर से अधिवक्ता ऋषव रंजन पेश हुए। एएसएपी के छात्र संगठन की ओर से पेश वकील ने कहा कि उनके संगठन ने कोई गुंडागर्दी नहीं की।
इस पर पीठ ने एएसएपी के उम्मीदवार की कार की छत पर खड़े होने की तस्वीरें दिखाने को कहा। अदालत ने डीयू प्रशासन को भी फटकार लगाई। विश्वविद्यालय के वकील ने मामले को लेकर माफी मांगते हुए कहा कि उम्मीदवारों की जांच की जाएगी।
सामूहिक हर्जाने पर विचार कर रही अदालत
अदालत ने कहा कि वह चुनावी हिंसा और अन्य घटनाओं को देखते हुए सामूहिक चुनावी हर्जाना लगाने पर विचार करेगी। एएसएपी की ओर से भी अदालत के समक्ष माफी मांगी गई और कहा गया कि संगठन केवल दो पदों पर चुनाव लड़ रहा है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने डूसू चुनाव प्रचार के दौरान हुई हिंसा को देखते हुए विजय जुलूस पर भी रोक लगा दी है।
HC ने कहा- साल दर साल दोहराई जा रही घटनाएं
पीठ ने कहा कि ऐसी घटनाएं साल दर साल सामने आ रही हैं, लेकिन स्थिति में बदलाव नहीं हो रहा है। अदालत ने कहा कि एक छात्र के चुनाव जीतने के बाद प्रोफेसर को थप्पड़ मारने जैसी घटना की कल्पना नहीं की जा सकती। पीठ ने कहा कि जीत के बाद व्यवहार में विनम्रता होनी चाहिए।
लिंगदोह समिति की सिफारिशों का पालन करने का निर्देश
अदालत ने दिल्ली विश्वविद्यालय और अन्य संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि लिंगदोह समिति की सिफारिशों और अदालत के समय-समय पर जारी आदेशों का उल्लंघन रोकने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएं।
पीठ ने दिल्ली नगर निगम समेत अन्य संबंधित विभागों को सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाने के निर्देश भी दिए। अदालत ने कहा कि किसी भी तरह का उल्लंघन सामने आने पर संबंधित एजेंसी तत्काल कार्रवाई करे। दिल्ली पुलिस और दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन को भी नियमों के उल्लंघन की रोकथाम के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।



