इंडिया गठबंधन की बैठक में खरगे ने उठाए SIR और EVM के मुद्दे, चुनाव आयोग को लेकर रखीं कई मांगें; बैलेट पेपर से चुनाव की पैरवी

नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बुधवार को दिल्ली में इंडिया गठबंधन के नेताओं की बैठक में चुनाव आयोग, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR, ईवीएम और नए मतदाताओं के पंजीकरण से जुड़े मुद्दे उठाए। खरगे ने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक के वोट का समान महत्व होना चाहिए। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची से जुड़े मामलों में जवाबदेही की मांग रखी।
‘एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य’ पर जोर
खरगे ने अपने शुरुआती संबोधन में कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था इस सिद्धांत पर आधारित है कि हर नागरिक को सरकार चुनने का समान अधिकार मिले। संविधान सभा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तभी सार्थक है, जब प्रत्येक पात्र नागरिक के वोट का समान मूल्य हो।
खरगे ने दावा किया कि इस सिद्धांत के सामने मौजूदा समय में गंभीर चुनौतियां हैं और देशभर में नागरिकों तथा राजनीतिक दलों की ओर से चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
SIR को लेकर खरगे ने जताई चिंता
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि विपक्ष लंबे समय से ईवीएम और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सवाल उठाता रहा है। उन्होंने राहुल गांधी की ओर से महादेवपुरा, अलंद, हरियाणा और महाराष्ट्र को लेकर लगाए गए आरोपों का भी उल्लेख किया।
खरगे ने कहा कि चुनाव आयोग ने शिकायतों को स्वीकार करने के बजाय SIR की प्रक्रिया शुरू की। उनके मुताबिक, आयोग SIR को मतदाता सूची को अपडेट और व्यवस्थित करने की प्रक्रिया बताता है, लेकिन यदि इससे बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित होते हैं तो वास्तविक मतदाताओं को मतदान के अधिकार से वंचित न किया जाए, यह सुनिश्चित करना जरूरी है।
खरगे ने दावा किया कि SIR के दौरान 13.3 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। यह आंकड़ा कांग्रेस की ओर से किया गया दावा है, जबकि चुनाव आयोग SIR-2026 से जुड़ी मतदाता सेवाएं और मतदाता सूची उपलब्ध करा रहा है।
नाम हटाने से पहले सूचना और अपील का अधिकार मांगा
खरगे ने मांग की कि यदि किसी मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटाया जाता है तो यह सार्वजनिक होना चाहिए कि किसका नाम हटाया गया और इसकी वजह क्या थी। उन्होंने कहा कि किसी वास्तविक मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे उचित सूचना दी जाए, कारण बताया जाए और प्रभावी अपील की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने मतदाता सूची में होने वाले बदलावों की जानकारी को अधिक पारदर्शी बनाने की भी मांग रखी।
मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर भी सवाल
खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग के दो अन्य सदस्यों ने पिछले 10 महीनों में 14 बार आपत्तियां दर्ज कराई हैं। खरगे ने इसे आयोग के कामकाज और नेतृत्व की निष्पक्षता से जोड़ते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग की।
इंडिया गठबंधन की बैठक में SIR, चुनाव आयोग के कामकाज और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर आगे की साझा रणनीति पर भी चर्चा हुई। चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि संस्थागत चर्चाओं में मतभेद और टिप्पणियां सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं तथा SIR से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाले कानून का भी जिक्र
खरगे ने 2023 में पारित चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस व्यवस्था में मुख्य न्यायाधीश को चयन पैनल से हटाकर उनकी जगह एक केंद्रीय मंत्री को शामिल किया गया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी का भी हवाला दिया, जिसमें चुनाव आयोग की स्वतंत्रता के साथ-साथ उसके स्वतंत्र दिखाई देने वाले कामकाज के महत्व पर जोर दिया गया था।
पहली बार वोट देने वाले युवाओं का मुद्दा
खरगे ने पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के पंजीकरण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि भारत में हर साल बड़ी संख्या में युवा मतदान के योग्य होते हैं और उनके लिए मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया सरल होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि पहली बार वोट देने वालों के लिए ऐसी प्रक्रियात्मक शर्तें नहीं होनी चाहिए, जो उनके लिए अनावश्यक बाधा बनें। उनका कहना था कि युवाओं की लोकतांत्रिक भागीदारी बढ़ाने के लिए पंजीकरण प्रक्रिया आसान बनाई जानी चाहिए।
ईवीएम की जगह बैलेट पेपर की मांग
ईवीएम को लेकर खरगे ने कहा कि विपक्ष की स्थिति स्पष्ट है और उन्होंने चुनाव में फिर से बैलेट पेपर के इस्तेमाल की मांग रखी। उन्होंने कहा कि इससे चुनाव प्रक्रिया को लेकर लोगों के बीच विश्वास और भरोसा मजबूत करने में मदद मिल सकती है।



