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INDIA गठबंधन का बड़ा ऐलान, दो महीने में 5 बड़ी रैलियां; राष्ट्रपति से मुलाकात की तैयारी, ‘वोट चोरी’ पर आंदोलन तेज

नई दिल्ली: निर्वाचन आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर जारी विवाद के बीच INDIA गठबंधन ने आंदोलन तेज करने का फैसला किया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बुधवार को कहा कि विपक्षी गठबंधन 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक ‘लोकतंत्र बचाओ अभियान’ चलाएगा। इस दौरान गठबंधन के सभी दल जिला स्तर पर प्रदर्शन करेंगे और चुनाव आयोग के खिलाफ भी मार्च किया जाएगा।

2 से 8 अक्टूबर तक चलेगा ‘लोकतंत्र बचाओ अभियान’

मल्लिकार्जुन खरगे ने गठबंधन की बैठक के बाद आगे की रणनीति की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि INDIA गठबंधन के सभी दल इस अभियान में साथ हैं। 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक सभी सहयोगी दल जिला स्तर पर जिलाधिकारी कार्यालय की ओर मार्च करेंगे और वहां धरना-प्रदर्शन करेंगे। इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई जाएगी।

इसके अलावा सभी विपक्षी सांसद 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग की ओर मार्च करेंगे। गठबंधन ने चुनाव आयोग और SIR से जुड़े मुद्दों को लेकर देशभर में आंदोलन करने का फैसला किया है।

अक्टूबर-नवंबर में होंगी पांच बड़ी रैलियां

खरगे ने कहा कि विपक्ष अक्टूबर और नवंबर के दौरान देशभर में पांच बड़ी रैलियां करेगा। इन रैलियों के जरिए ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाएगा। रैलियों की जगह और समय जल्द तय किए जाएंगे। गठबंधन का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े सवालों को जनता के सामने रखा जाएगा।

कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि ‘वोट चोरी’ के कारण बनी सरकार की वजह से लोगों को काफी परेशानियां हो रही हैं। उन्होंने कहा कि INDIA गठबंधन अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में राष्ट्रपति से मिलने के लिए समय मांगेगा। इस मुलाकात के दौरान गठबंधन अपनी मांगें राष्ट्रपति के सामने रखेगा।

13.3 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने पर सवाल

इससे पहले मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए SIR प्रक्रिया के तहत हटाए गए 13.3 करोड़ मतदाताओं के नाम सार्वजनिक करने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि यह भी बताया जाना चाहिए कि इन मतदाताओं को मतदान के अधिकार से वंचित करने के पीछे क्या वजह रही।

खरगे ने कहा कि किसी भी वास्तविक भारतीय नागरिक को अपारदर्शी, मनमानी या अपर्याप्त निगरानी वाली प्रक्रिया के जरिए मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। अगर किसी मतदाता का नाम हटाया गया है तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि किसका नाम हटाया गया और नाम हटाने का कारण क्या था।

चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का भी मुद्दा उठाया

खरगे ने संविधान के अनुच्छेद 324 की भावना का हवाला देते हुए कहा कि विश्वसनीय चुनाव के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव आयोग जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त के दो सहयोगी चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में इस प्रक्रिया पर 14 बार आपत्तियां दर्ज कीं, लेकिन उनकी आपत्तियों पर ध्यान नहीं दिया गया।

इसी आधार पर खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने या उनके इस्तीफे की मांग की। बैठक के दौरान सोनिया गांधी, राहुल गांधी, ममता बनर्जी, उमर अब्दुल्ला और सुप्रिया श्रीनेत समेत कई प्रमुख विपक्षी नेता मौजूद थे।

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