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केजरीवाल ने खोले सियासी सफर के पुराने पन्ने, लोकपाल आंदोलन से AAP के गठन और सरकार चलाने तक की बताई कहानी

नई दिल्ली: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने एक कार्यक्रम में अपनी राजनीतिक यात्रा के उन पहलुओं पर बात की, जिनका उनके मुताबिक आम तौर पर कम जिक्र होता है। उन्होंने कहा कि लोग उन्हें मुख्यमंत्री बनने और अन्ना आंदोलन के बाद राजनीति में आने के लिए जानते हैं, जबकि उससे पहले करीब एक दशक तक किए गए उनके सामाजिक काम की चर्चा अपेक्षाकृत कम होती है। आम आदमी पार्टी की ओर से भी उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक बताया गया है। सितंबर 2026 में पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में उन्हें दोबारा इस पद पर चुना गया था।

केजरीवाल के मुताबिक, इनकम टैक्स विभाग की नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने करीब 10 साल तक दिल्ली की झुग्गियों में काम किया। उन्होंने कहा कि उस समय उनका उद्देश्य राजनीतिक दल बनाना नहीं था, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ काम करना और व्यवस्था में बदलाव लाना था। उनके अनुसार, अन्ना आंदोलन के दौरान अगर सरकार लोकपाल कानून बना देती तो शायद राजनीतिक पार्टी बनाने की जरूरत नहीं पड़ती। बाद में बनी परिस्थितियों के चलते आंदोलन के बाद आम आदमी पार्टी का गठन किया गया।

सरकारी ठेकों की प्रक्रिया का भी किया जिक्र

अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल को याद करते हुए केजरीवाल ने सरकारी ठेकों की प्रक्रिया पर भी बात की। उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में कई ठेकों के लिए ऑनलाइन नीलामी की व्यवस्था अपनाई गई थी। उनके मुताबिक इसका उद्देश्य ठेकों की प्रक्रिया में अधिक प्रतिस्पर्धा लाना था।

केजरीवाल ने कहा कि पहले कुछ ठेकों में तय प्रक्रिया के तहत फीस बढ़ाकर काम दिए जाने की व्यवस्था थी, जबकि ऑनलाइन नीलामी के जरिए सरकार को अधिक राजस्व मिला। ये दावे उनके अपने राजनीतिक कार्यकाल और सरकार के कामकाज को लेकर रखे गए उनके दृष्टिकोण का हिस्सा हैं।

गिरफ्तारी के बाद इस्तीफा नहीं देने के फैसले पर बोले

केजरीवाल ने जेल जाने के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देने के अपने फैसले को भी याद किया। उन्होंने कहा कि उस समय उनका मानना था कि किसी मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी के बाद सरकार गिरने की स्थिति लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर सकती है।

इससे पहले भी केजरीवाल जेल से सरकार चलाने के अपने फैसले को राजनीतिक और संवैधानिक बहस से जोड़ते रहे हैं। कार्यक्रम में उन्होंने इसी संदर्भ में अपने उस समय के फैसले और उसकी वजहों पर बात रखी।

मतदाता सूची और SIR को लेकर उठाए सवाल

केजरीवाल ने दिल्ली की मतदाता सूची और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया में स्थानीय स्तर के अधिकारियों की भूमिका को लेकर बदलाव हुए हैं।

उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ते हुए चिंता जताई कि अगर मतदाता सूची से जुड़े अधिकारों और प्रक्रियाओं में पारदर्शिता नहीं रही तो इसका असर चुनावी व्यवस्था पर पड़ सकता है। दिल्ली में SIR प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों और चुनाव आयोग के बीच दावे और आपत्तियां सामने आती रही हैं।

मतदाता सूची को चुनावी अधिकार से जोड़ा

केजरीवाल ने कहा कि लोकतंत्र में जनता के पास चुनाव के जरिए सरकार बदलने का अधिकार होना चाहिए। उन्होंने मतदाता सूची से जुड़े अपने आरोपों को इसी अधिकार के संदर्भ में रखा। उनके द्वारा लगाए गए आरोप उनके बयान के रूप में हैं और इस मुद्दे पर चुनाव आयोग तथा विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से अलग-अलग दावे और आपत्तियां सामने आती रही हैं।

पूरे कार्यक्रम में केजरीवाल ने अपनी राजनीतिक यात्रा को मुख्यमंत्री पद से आगे बढ़ाते हुए शुरुआती सामाजिक काम से जोड़कर पेश किया। उनका कहना था कि उनकी राजनीति की शुरुआत सत्ता हासिल करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को उठाने से हुई थी।

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