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दिल्ली के पीजी-हॉस्टलों में छात्रों की सुरक्षा पर हाई कोर्ट सख्त, DU-JNU समेत कई संस्थानों को नोटिस

नई दिल्ली: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हाल में हुई इमारत की घटना के बाद निजी पीजी, हॉस्टल और किराए के फ्लैटों में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा का मुद्दा दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है। छात्रों की सुरक्षा को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, दिल्ली नगर निगम, दिल्ली पुलिस समेत कई प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों को नोटिस जारी किया है।

कॉलेज, विश्वविद्यालय और जिला स्तर पर निगरानी की मांग

याचिका में छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कॉलेज, विश्वविद्यालय और जिला स्तर पर तीन स्तरीय निगरानी समितियां बनाने की मांग की गई है। याचिका में निजी छात्र आवासों की निगरानी के लिए एक व्यापक व्यवस्था विकसित करने की जरूरत बताई गई है।

DU-JNU समेत कई संस्थानों से जवाब तलब

हाई कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, दिल्ली नगर निगम और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। इसके अलावा दिल्ली विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और पन्नालाल गिरधारीलाल दयानंद कॉलेज को भी नोटिस जारी किया गया है।

कोर्ट ने सभी संबंधित संस्थानों को मामले में अपना-अपना हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई सत्य निकेतन से जुड़ी अन्य याचिकाओं के साथ 14 अक्टूबर को होगी।

निजी छात्र आवासों के लिए नियामक ढांचा बनाने की मांग

दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र शिवांश कालिया ने याचिका दायर कर दिल्ली सरकार और संबंधित अधिकारियों से निजी छात्र आवासों के लिए व्यापक नियामक ढांचा तैयार करने की मांग की है।

इस व्यवस्था में भवन की संरचनात्मक सुरक्षा और अग्नि सुरक्षा के साथ साफ-सफाई, रहने योग्य माहौल और शिकायतों के समाधान जैसे पहलुओं को शामिल करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता के अनुसार, हालिया घटना ने निजी छात्र आवासों की निगरानी और नियमन से जुड़ी कमियों को सामने ला दिया है।

प्राइवेट पीजी में रहने वाले छात्रों का स्वैच्छिक डेटाबेस बनाने की मांग

याचिका में कहा गया है कि संस्थागत हॉस्टल की सीमित उपलब्धता के कारण बड़ी संख्या में छात्र निजी पीजी, किराए के फ्लैट और अन्य निजी हॉस्टलों में रहने को मजबूर हैं। ऐसे में इन आवासों में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समन्वित व्यवस्था जरूरी है।

याचिका में निजी आवासों में रहने वाले छात्रों का एक स्वैच्छिक डेटाबेस तैयार करने की मांग भी की गई है, ताकि जरूरत पड़ने पर छात्रों से संबंधित जानकारी व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध हो सके।

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