PUC Certificate के बिना नहीं मिलेगा पेट्रोल-CNG, दिल्ली-NCR में आज से लागू हुआ सख्त नियम

नई दिल्ली: दिल्ली-NCR में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने सख्ती बढ़ा दी है। 1 अक्टूबर से बिना वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र यानी PUC के वाहनों को पेट्रोल या CNG नहीं मिलेगी।
बिना वैध PUC के फ्यूल पर रोक
CAQM के आदेश के मुताबिक, दिल्ली-NCR में पेट्रोल या CNG लेने के लिए वाहन के पास वैध PUC सर्टिफिकेट होना जरूरी होगा। आयोग ने एनसीआर में आने वाले शहरों की राज्य सरकारों और प्रवर्तन एजेंसियों को प्रदूषण फैलाने वाले अलग-अलग स्रोतों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
29 सितंबर को CAQM की उप-समिति की बैठक में प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े इन निर्देशों की समीक्षा की गई।
फ्यूल स्टेशनों पर ANPR सिस्टम की तैयारी
बैठक में फ्यूल स्टेशनों पर स्वचालित नंबर प्लेट पहचान प्रणाली (ANPR) लगाने की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। 15 मई 2026 को जारी CAQM के आदेश के अनुसार, बिना वैध PUC प्रमाणपत्र वाले वाहनों को 1 अक्टूबर से ईंधन देने की अनुमति नहीं होगी।
इसके साथ ही बाहरी राज्यों से दिल्ली में आने वाली बसों को लेकर भी सख्ती बढ़ाई गई है। अब केवल इलेक्ट्रिक, CNG और BS-6 डीजल बसों को प्रवेश की अनुमति होगी। अन्य बसों पर ग्रैप के पहले चरण से ही रोक लागू की जाएगी।
BS-3 पेट्रोल और BS-4 डीजल वाहनों पर बढ़ा दायरा
ग्रैप-3 के तहत BS-3 पेट्रोल और BS-4 डीजल या इससे पुराने मानक वाले हल्के वाहनों पर प्रतिबंध का दायरा भी बढ़ाया गया है। अब यह पाबंदी सोनीपत में भी लागू होगी। इससे पहले यह दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम और फरीदाबाद में लागू थी।
बैठक में दिल्ली के आसपास के राज्यों पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में धान की पराली जलाने से रोकने की तैयारियों की भी समीक्षा की गई।
डीजल जनरेटर सेट पर पहले चरण से रोक
निर्माण और ध्वस्तीकरण गतिविधियों से जुड़े वर्ष 2021 के निर्देशों का दायरा भी बढ़ाया गया है। संशोधित ग्रैप नियमों के तहत डीजल जनरेटर सेट के इस्तेमाल पर रोक अब दूसरे चरण के बजाय पहले चरण में ही लागू होगी। इससे हवा की गुणवत्ता खराब होते ही इनके इस्तेमाल पर रोक लगाई जा सकेगी।
इसके अलावा, ग्रैप-3 लागू होने पर निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध रहता है, लेकिन सड़कों के गड्ढों की मरम्मत जैसे जरूरी कामों को इससे छूट दी गई है। इससे सड़क मरम्मत से जुड़े आवश्यक कार्य प्रभावित नहीं होंगे।



