
‘दिव्यांग’ केवल शब्द परिवर्तन नहीं, बल्कि दृष्टिकोण में बदलाव का परिचायक : योगी
मुख्यमंत्री ने गोरखपुर में दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरित किये
दिव्यांगजनों को वितरित किए जा रहे उपकरण उनके सपनों को नई उड़ान देने का प्रयास, दिव्यांगजन पेंशन में शीघ्र ही और वृद्धि की जाएगी,सभी कमिश्नरियों में जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र संचालित करने के निर्देश
लखनऊ/गोरखपुर : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2015 में ‘विकलांग’ शब्द के स्थान पर ‘दिव्यांग’ शब्द का प्रयोग शुरू किया। यह केवल शब्द परिवर्तन नहीं, बल्कि दृष्टिकोण में परिवर्तन का परिचायक था। दिव्यांगजनों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और सम्मान आवश्यक है। सरकार दिव्यांगजनों के साथ मजबूती से खड़ी है। उनके मार्ग की बाधाएं दूर करने और उन्हें सशक्त एवं स्वावलम्बी बनाने के लिए निरन्तर कार्य किया जा रहा है। योगी बुधवार को गोरखपुर में प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन में सेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित सेवा संकल्प अभियान के अन्तर्गत दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर 509 दिव्यांगजन को विभिन्न प्रकार के 664 सहायक उपकरण वितरित किये गये। इनमें 127 मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल, 25 ई-ट्राईसाइकिल, 70 ट्राईसाइकिल, 310 स्मार्ट केन एवं ब्रेल किट, 90 हियरिंग एड, 05 स्मार्टफोन, 01 ब्रेल गीता, 01 ब्रेल लिपि में रामचरितमानस, 10 कृत्रिम अंग एवं उपकरण से जुड़े अन्य उपकरण, 20 वयोश्री और 05 पाठ्य पुस्तकें शामिल हैं। कार्यक्रम दिव्यांगजन सशक्तिकरण पर आधारित एक लघु फिल्म प्रदर्शित की गयी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में पहले गुजरात और अब देश विकास की नई ऊँचाइयां प्राप्त कर रहा है। किसी भी समाज की वास्तविक पहचान उसकी इमारतों से नहीं, बल्कि इस बात से होती है कि शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अन्तिम पायदान पर बैठे व्यक्ति तक कितनी सहजता और मजबूती से पहुंच रहा है। बिना भेदभाव योजनाओं का लाभ अन्तिम पायदान तक पहुंचाना सुशासन का पहला सूत्र है। उत्तर प्रदेश शासन एवं हिन्दुस्तान उर्वरक रसायन लिमिटेड के संयुक्त तत्वावधान में दिव्यांगजनों को वितरित किए जा रहे उपकरण उनके सपनों को नई उड़ान देने का प्रयास हैं। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में विगत 12 वर्षों में शासन की योजनाओं का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचा है। व्यक्ति, जाति, मत, मजहब, क्षेत्र और भाषा किसी के लिए बाधक नहीं बने। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र के साथ प्रत्येक वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा गया है। जब सबका विकास होता है, तब सबका विश्वास भी सरकार में बढ़ता है। सभी के विकास के लिए हम सभी को सामूहिक रूप से प्रयास करना चाहिए। आज इसी क्रम में दिव्यांगजनों को लाभ पहुंचाया जा रहा है।

भारतीय संस्कृति ने कभी किसी व्यक्ति को अधूरा नहीं माना। हमारे ऋषियों ने कहा है ‘अयोग्यः पुरुषो नास्ति, योजकस्तत्र दुर्लभः।’ अर्थात कोई व्यक्ति अयोग्य नहीं होता, उचित अवसर और उसकी प्रतिभा को पहचानने वाला योजक दुर्लभ होता है। प्रधानमंत्री मोदी जैसे योजक के नेतृत्व में प्रत्येक व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ सकता है। गरीब को प्रधानमंत्री आवास, रसोई गैस कनेक्शन, शौचालय और पेंशन जैसी सुविधाएं मिली हैं। युवाओं के लिए सरकारी एवं निजी रोजगार के साथ स्टार्टअप, स्टैण्डअप, डिजिटल इण्डिया जैसी योजनाओं के माध्यम से स्वावलम्बन के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। योगी जी ने कहा कि इतिहास साक्षी है कि परिवार और समाज का सहयोग मिले, तो शारीरिक चुनौतियां प्रतिभा की राह में बाधक नहीं बन सकती। ऋषि अष्टावक्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि राजा जनक की सभा में उनके शरीर को देखकर विद्वानों के हंसने पर अष्टावक्र ने स्पष्ट किया कि व्यक्ति का मूल्यांकन उसके ज्ञान और आत्मबोध से होना चाहिए, शरीर से नहीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के पैरा खिलाड़ियों में चेस खिलाड़ी वैभव गौतम, हाई जम्पर प्रवीण कुमार, प्रीति पाल तथा प्रदेश सरकार में सचिव व बैडमिण्टन खिलाड़ी सुहास एल0वाई0 सहित अन्य खिलाड़ियों ने भी शारीरिक चुनौती के बावजूद अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर देश और प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। इन खिलाड़ियों ने साबित किया है कि प्रतिभा को दया नहीं, अवसर चाहिए। उचित साधन, प्रशिक्षण, परिवार एवं समाज का सहयोग और व्यवस्था द्वारा मार्ग की बाधाएं दूर होने पर प्रतिभा अपनी ऊंचाई तक पहुंच सकती है। डबल इंजन की सरकार दिव्यांगजनों के अधिकार, सम्मान, सुरक्षा और स्वावलम्बन के लिए प्रतिबद्ध है। दिव्यांगजन पेंशन पहले 300 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये और फिर 1,000 रुपये की गई तथा इसमें शीघ्र ही और वृद्धि की जाएगी। सरकार का प्रयास है कि घर से सड़क, सड़क से परिवहन, परिवहन से स्कूल, स्कूल से कॉलेज और कॉलेज से रोजगार तक दिव्यांगजनों के लिए प्रत्येक मार्ग सुगम हो।

पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कुमार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री के कुशल नेतृत्व में दिव्यांगजनो का निरन्तर सशक्तिकरण किया जा रहा है। विगत साढ़े नौ वर्षों में दिव्यांग जनों के जीवन में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल रहा है। इस अवसर पर जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, मत्स्य मंत्री संजय निषाद, विधान परिषद सदस्य डॉ0 धर्मेन्द्र सिंह, डॉ0 महेन्द्र सिंह, विधायक फतेह बहादुर सिंह, विपिन सिंह, महेन्द्र पाल सिंह, श्रीराम चौहान, प्रदीप शुक्ला, राजेश त्रिपाठी, विमलेश पासवान एवं श्रवण कुमार निषाद, गोरखपुर के महापौर डॉ0 मंगलेश श्रीवास्तव, जिला पंचायत अध्यक्ष साधना सिंह, उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष श्रीमती चारू चौधरी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।



