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मौसम की मार से सेब उत्पादन में भारी गिरावट, 40 फीसदी तक घटा उत्पादन; मंडियों में बढ़े दाम

श्रीनगर: इस बार देश में सेब की कीमतें बढ़ने की आशंका है। जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश जैसे प्रमुख सेब उत्पादक राज्यों में मौसम की मार से उत्पादन तेजी से घटा है। हिमाचल प्रदेश में पिछले साल के 4.07 लाख टन के मुकाबले इस साल अब तक करीब 3.87 लाख टन सेब बाजार में पहुंचा है। वहीं, जम्मू-कश्मीर में उत्पादन में करीब 40 फीसदी तक की गिरावट बताई जा रही है।

दोनों राज्यों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने सेब की फसल को नुकसान पहुंचाया है। सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में उत्पादन 50 फीसदी तक कम हुआ है। सामान्य वर्षों में 20 से 22 लाख टन सेब का उत्पादन होता था, लेकिन इस बार यह घटकर 14 से 15 लाख टन रहने का अनुमान है। उत्पादन कम होने से मंडियों में आवक घटी है और अच्छी गुणवत्ता वाले सेब के दाम बढ़ गए हैं।

पर्याप्त बारिश और बर्फबारी नहीं होने से दोनों राज्यों में ठंड के घंटे भी कम रहे। हिमाचल प्रदेश में इस बार फलों के गिरने की समस्या अधिक रही और सेब का सीजन करीब 15 दिन की देरी से शुरू हुआ। पिछले साल राज्य में करीब सात लाख टन सेब का उत्पादन हुआ था, जबकि इस साल इसके काफी कम रहने का अनुमान है।

शोपियां और ऊपरी इलाकों में 55 फीसदी तक नुकसान

जम्मू-कश्मीर उद्यान विभाग के अनुसार, दक्षिण कश्मीर के शोपियां के ऊपरी इलाकों हीरपोरा, केलर और जैनपोरा के अलावा कुलगाम के डीएच पोरा और फ्रिसल में मई-जून के दौरान हुई बेमौसम ओलावृष्टि और तेज हवाओं से सेब की फसल को 45 से 55 फीसदी तक नुकसान हुआ।

बडगाम के खानसाहिब और चरार-ए-शरीफ तथा पुलवामा के त्राल और राजपोरा के पारंपरिक बागानों में भी फसल प्रभावित हुई। फूल आने और परागण के समय लगातार बारिश और कम धूप के कारण बड़ी संख्या में फल गिर गए। इससे कई इलाकों में पैदावार आधी रह गई।

जलवायु परिवर्तन बनी बड़ी चुनौती

हिमाचल प्रदेश में सेब उत्पादन बढ़ाने के लिए हाई डेंसिटी पौधरोपण को बढ़ावा दिया जा रहा है। बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी के मुताबिक, बदलते मौसम के बीच आधुनिक तकनीक और नए रूट स्टॉक को अपनाना जरूरी है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन को सेब उत्पादन घटने की बड़ी वजह बताया है।

मंडियों में ए ग्रेड सेब की भारी कमी

सोपोर फल मंडी के व्यापारी हाजी मुश्ताक अहमद के मुताबिक, मंडियों में रोजाना पहुंचने वाली गाड़ियों की संख्या कम हुई है। खासकर शोपियां और कुलगाम की तरफ से आने वाले ए ग्रेड सेब की भारी कमी दिखाई दे रही है।

उत्पादन और मंडियों में आवक घटने का सीधा असर सेब की कीमतों पर पड़ रहा है। अच्छी गुणवत्ता वाले सेब की मांग बनी रहने के कारण आने वाले दिनों में इनके दाम और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

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