जावेद अख्तर ने धर्म और आस्था पर उठाए सवाल, एलन मस्क का उदाहरण देकर समझाया फर्क, बोले- ‘सब धर्म एक जैसे हैं’ कहना बकवास

नई दिल्ली: मशहूर लेखक और गीतकार जावेद अख्तर अपनी बेबाक राय के लिए जाने जाते हैं। वह अक्सर धर्म, आस्था, भगवान और नास्तिकता जैसे विषयों पर खुलकर अपनी बात रखते हैं। हाल ही में एक बातचीत में उन्होंने इन्हीं मुद्दों पर अपने विचार साझा किए। जावेद अख्तर ने कहा कि मुश्किल समय में धर्म और आस्था इंसान को मानसिक सहारा दे सकते हैं, लेकिन किसी चीज से सुकून मिलना इस बात का सबूत नहीं है कि वह चीज सच भी है।
मानसिक शांति और सच होने में फर्क जरूरी
जावेद अख्तर के मुताबिक, जब इंसान किसी परेशानी में होता है तो किसी बड़ी शक्ति पर भरोसा करने से उसे भावनात्मक राहत मिल सकती है। उसे महसूस हो सकता है कि कोई ताकत उसकी देखभाल कर रही है और उसकी मुश्किल दूर कर देगी।
हालांकि, उनका सवाल है कि केवल इस भरोसे के आधार पर किसी विश्वास को वास्तविक कैसे मान लिया जाए। उनके अनुसार मानसिक शांति मिलने और किसी चीज के सच होने के बीच अंतर समझना जरूरी है।
एलन मस्क का उदाहरण देकर समझाया तर्क
अपनी बात समझाने के लिए जावेद अख्तर ने कारोबारी एलन मस्क का उदाहरण दिया। उन्होंने एक काल्पनिक स्थिति के जरिए समझाया कि अगर कोई व्यक्ति पूरी तरह विश्वास कर ले कि एलन मस्क उसका भाई है और अगले महीने उसे अरबों रुपये मिलने वाले हैं, तो इस सोच से उसे खुशी और सुरक्षा का एहसास हो सकता है।
वह लगातार इसी उम्मीद में रह सकता है कि अगले महीने उसे पैसा जरूर मिलेगा। लेकिन सिर्फ विश्वास करने से यह साबित नहीं होता कि एलन मस्क वास्तव में उसका भाई है या उसे पैसे मिलने वाले हैं। जावेद अख्तर ने इसी उदाहरण के जरिए आस्था और वास्तविकता के बीच अंतर समझाने की कोशिश की।
जिस धर्म में जन्म, उसी में जीवनभर विश्वास का सवाल
धर्म को लेकर जावेद अख्तर ने एक और सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि दुनिया में बड़ी संख्या में लोग उसी धर्म को मानते हैं, जिसमें उनका जन्म हुआ होता है। उन्होंने दावा किया कि करीब 99 फीसदी लोग उसी धर्म में मरते हैं, जिसमें उन्होंने जन्म लिया था।
उनके मुताबिक, इससे यह सवाल खड़ा होता है कि क्या लोगों ने अपने धार्मिक विश्वासों को खुद तर्क और विचार के आधार पर चुना है या फिर बचपन से परिवार और समाज के जरिए उन्हें ये मान्यताएं मिली हैं।
व्यक्ति पर नहीं, उसके तर्क पर भरोसा करने की बात
जावेद अख्तर ने कहा कि किसी व्यक्ति की बात को सिर्फ इसलिए सही नहीं मान लेना चाहिए क्योंकि हम उस व्यक्ति पर विश्वास करते हैं। उनके अनुसार इंसान समय के साथ अपनी राय बदल सकता है। इसलिए जरूरी है कि किसी व्यक्ति की पहचान के बजाय उसके विचार और तर्क को परखा जाए।
उनका नजरिया है कि कौन व्यक्ति बात कह रहा है, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि उस बात के पीछे कितना मजबूत तर्क मौजूद है।
‘सभी धर्म एक जैसे हैं’ कहने पर भी सवाल
धर्मों की समानता को लेकर भी जावेद अख्तर ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि दुनिया के सभी धर्मों को सिर्फ इसलिए एक जैसा नहीं कहा जा सकता क्योंकि उनमें इंसान को बेहतर बनने की सीख मिलती है।
उनके मुताबिक अलग-अलग धर्मों की मान्यताएं, विचार और सिद्धांत अलग हो सकते हैं। इसलिए सभी धर्म बिल्कुल एक ही बात कहते हैं, ऐसा कहना सही नहीं है।
जावेद अख्तर लंबे समय से धर्म, तर्क और आस्था जैसे विषयों पर सार्वजनिक रूप से अपनी राय रखते रहे हैं। उनके विचारों से जहां कुछ लोग सहमत नजर आते हैं, वहीं कई बार उनके बयानों पर असहमति भी सामने आती है। इस बार भी उनका बयान सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चा में बहस का विषय बना हुआ है।



