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पाकिस्तान में गरीबी का बढ़ता संकट! हर दूसरा शख्स गरीबी रेखा के नीचे, एक साल में 4 प्रतिशत बढ़ी संख्या

नई दिल्ली: पाकिस्तान में गरीबी को लेकर वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट ने गंभीर स्थिति सामने रखी है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में 48 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जिनकी रोजाना कमाई 3 डॉलर से कम है। पाकिस्तान में गरीबी रेखा से बाहर निकलने के लिए 3 डॉलर की आय का पैमाना तय किया गया है। 2025 में करीब 44 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा के नीचे थे। यानी एक साल के भीतर गरीबों की संख्या में करीब 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

वर्ल्ड बैंक के अनुसार, पाकिस्तान में अब हर दो में से एक व्यक्ति गरीबी रेखा के नीचे जीवन गुजारने को मजबूर है। यह आंकड़ा ऐसे समय सामने आया है, जब पाकिस्तान सरकार गरीबी खत्म करने के लिए निवेश लाने का दावा कर रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना काल के बाद से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था अपनी रफ्तार हासिल नहीं कर पाई है। आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कई प्रयास किए गए, लेकिन सरकार को सफलता नहीं मिली। इसके बाद बाढ़ ने भी देश को बड़ा नुकसान पहुंचाया।

राजनीतिक अस्थिरता और अशांति का भी असर

पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता को भी गरीबी बढ़ने की एक अहम वजह बताया गया है। बलूचिस्तान, खैबर और पीओके के इलाके लंबे समय से अशांत हैं, जिसका असर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की कंपनियां उत्पादों और नवाचार पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रही हैं।

वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2018-19 से 2024-25 के बीच पाकिस्तान में गरीबी दर 6.4 प्रतिशत बढ़ी है। रिपोर्ट के मुताबिक, गरीबी के मामले में पाकिस्तान दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है।

महंगाई बढ़ने के साथ परिवारों का खर्च भी बढ़ा

पाकिस्तान में लोगों के खर्च में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टेटिस्टिक्स के अनुसार, एक पाकिस्तानी परिवार रहने और खाने-पीने पर औसतन 9 डॉलर रोजाना खर्च करता है। एक परिवार में औसतन 6 लोग रहते हैं। इस हिसाब से एक व्यक्ति का रोजाना खर्च करीब 1.5 डॉलर बैठता है। पहले यह खर्च करीब 1 डॉलर था।

महंगाई की स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान के सरकारी बैंक ने हाल ही में 10 रुपये के नोट को सिक्के में बदलने का फैसला किया था। पाकिस्तान में 10 रुपये से कम कीमत का सामान मिलना भी मुश्किल हो गया है।

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