उत्तराखंड

उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों में एआई, रोबोटिक्स और ड्रोन तकनीक से जुड़ेगी शिक्षा : सीएम धामी

देहरादून: उत्तराखंड की सरकार शिक्षा प्रणाली में बुनियादी, संरचनात्मक , तकनीकी हर तरह के जरूरी बदलावों को करने के लिए कृत संकल्प है। धामी सरकार का प्रयास है कि ग्रामीण और सीमांत क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी आधुनिक तकनीक सीखने के समान अवसर मिलें। सीएम धामी के अनुसार ये इसलिए भी जरूरी है कि किसी प्रदेश में समावेशी शिक्षा व्यवस्था के विकास को 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने का अस्त्र बनाया जा सकता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बागेश्वर में पंचम सीमांत पर्वतीय जनपद बाल विज्ञान महोत्सव का शुभारंभ करते हुए वहां से ऐलान किया कि उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों में एआई, रोबोटिक्स और ड्रोन तकनीक से शिक्षा को जोड़ा जाएगा। सीमांत पर्वतीय क्षेत्रों के बच्चों को विज्ञान और आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री धामी की यह घोषणा काफी महत्वपूर्ण है। दूरदराज के इलाकों को प्रगति की संभावनाओं में कम योगदान देने वाला माना जाता रहा है जिसे धामी सरकार ने एक मिथक साबित कर दिया है और अब प्रदेश सरकार विद्यालयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), रोबोटिक्स और ड्रोन तकनीक को बढ़ावा देगी जिससे सीमांत क्षेत्रों का शिक्षा मॉडल अनुकरणीय बन सके। यही समावेशी विकास और धारणीय विकास का भी तकाजा है।

विज्ञान प्रयोगशालाओं को एआई से जोड़ने के साथ हर विकासखंड में एक-एक लैब ऑन व्हील्स स्थापित करने की दिशा में काम होगा। शोध और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक करोड़ रुपये देने की घोषणा की। प्रदेश के सभी जिलों में विज्ञान एवं नवाचार केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे।

हाल ही में मंडलसेरा स्थित विवेकानंद इंटर कालेज में उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकास्ट) के तत्वावधान में आयोजित पंचम सीमांत पर्वतीय जनपद बाल विज्ञान महोत्सव का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने ये घोषणाएं कीं।

महोत्सव में चमोली, चंपावत, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ के 240 चयनित बाल वैज्ञानिक प्रतिभाग कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से संवाद किया, उनकी जिज्ञासाओं के उत्तर दिए और उन्हें वैज्ञानिक सोच के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि आज का दौर विज्ञान, तकनीक और नवाचार का है। बच्चों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्हें नए प्रयोग करने, सवाल पूछने और अपने विचारों को वास्तविक रूप देने का प्रयास करना चाहिए। बाल वैज्ञानिकों की जिज्ञासा ही भविष्य के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और शोधकर्ताओं की नींव है।

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