ब्लैक मनी, टेरर फंडिंग से निपटने वाली संस्था एफ.ए.टी.एफ. की पेरिस में पहली पूर्ण बैठक हुई संपन्न

नई दिल्ली ( दस्तक डेस्क) : फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स एक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जो अपने 40 सदस्य देशों के साथ दुनिया भर में ब्लैक मनी, मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग में लिप्त देशों को टारगेट करती है जिससे वित्तीय स्तर पर चीजें व्यवस्थित बनी रहें। इसी संगठन की पेरिस में, ब्रिटेन के जाइल्स थॉमसन की अध्यक्षता में वित्तीय कार्रवाई कार्यबल– एफ.ए.टी.एफ. की पहली पूर्ण बैठक संपन्न हुई। इसमें सदस्य देश वित्तीय अपराधों के बढ़ते खतरों वर्चुअल परिसंपत्तियों के दुरुपयोग, धोखाधड़ी और स्कैम-के खिलाफ वैश्विक कार्रवाई तेज करने पर सहमत हुए।
एफ.ए.टी.एफ. के निष्कर्षों के बयान के अनुसार, पूर्ण बैठक में यह तय किया गया कि जिन क्षेत्रों में वर्चुअल परिसंपत्तियों की गतिविधियां बड़े पैमाने पर होती हैं, वहां एफ.ए.टी.एफ. के मानकों को प्रभावी ढंग से लागू करने की प्रक्रिया तेज की जाएगी। यह निर्णय अप्रैल 2026 के एफ.ए.टी.एफ. मंत्रिस्तरीय घोषणापत्र के अनुरूप लिया गया है। बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि धन शोधन, आतंकवाद के वित्तपोषण और प्रसार वित्तपोषण के लिए वर्चुअल परिसंपत्तियों के दुरुपयोग को रोकने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा उपायों को सुदृढ करना अत्यंत आवश्यक है।
एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय के अंतर्गत सफल ऑन-साइट दौरों के बाद एफ.ए.टी.एफ. ने बुल्गारिया, कोटे डी आइवर, कांगो और मोनाको को अपनी ‘बढ़ी हुई निगरानी’ वाली सूची से हटा दिया है। इसके साथ ही एफ.ए.टी.एफ. ने ‘बढ़ी हुई निगरानी’ वाले क्षेत्रों और ‘कार्रवाई की मांग’ वाले क्षेत्रों से संबंधित अपने बयानों को भी अपडेट किया है।
वित्तीय कार्रवाई कार्य बल के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी:
FATF वैश्विक मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी वित्तपोषण निगरानीकर्त्ता है जिसकी स्थापना वर्ष 1989 में G-7 देशों की पेरिस में आयोजित बैठक में की गई थी। इसका उद्देश्य मनी लॉन्ड्रिंग से निपटने के उपायों की जाँच और विकास करना था।अमेरिका पर 9/11 के हमलों के बाद वर्ष 2001 में FATF ने आतंकवादी वित्तपोषण से निपटने के प्रयासों को शामिल करने के लिये अपने जनादेश का विस्तार किया। अप्रैल 2012 में इसने सामूहिक विनाश के हथियारों (WMD) के प्रसार के वित्तपोषण का मुकाबला करने के प्रयासों को जोड़ा।
भारत वर्ष 2006 में ‘पर्यवेक्षक’ देशों की सूची में शामिल हुआ और वर्ष 2010 में FATF का पूर्ण सदस्य बन गया। भारत FATF के क्षेत्रीय साझेदारों, एशिया पैसिफिक ग्रुप (APG) और यूरेशियन ग्रुप (EAG) का भी सदस्य है। इसका सचिवालय पेरिस में आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) मुख्यालय में स्थित है।सचिवालय FATF सदस्यता और वैश्विक नेटवर्क के मूल कार्य का समर्थन करता है।FATF सचिवालय और अन्य सेवाओं के लिये धन FATF वार्षिक बजट द्वारा प्रदान किया जाता है जिसमें सदस्य योगदान करते हैं।
FATF की ग्रे और ब्लैक लिस्ट:
FATF प्लेनरी [FATF का निर्णय लेने वाले निकाय को FATF प्लेनरी (FATF Plenary) कहा जाता है] की निर्णय करने वाले देशों की “पारस्परिक मूल्यांकन रिपोर्ट्स” (MER) के लिये प्रतिवर्ष तीन बार (फरवरी, जून और अक्तूबर) इसके सत्र का आयोजन होता है। AML/CFT का अर्थ “धन शोधन रोधी/आतंकवाद के वित्तपोषण का मुकाबला करना” है।
ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने के लिये किसी देश को FATF द्वारा अनुशंसित कार्यों को पूरा करना होता है, उदाहरण के लिये आतंकवादी समूहों से जुड़े व्यक्तियों की संपत्तियों को जब्त करना।अगर FATF प्रगति से संतुष्ट है, तो वह देश को लिस्ट से कर सकता है।
ग्रे लिस्ट: जिन देशों को टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग का समर्थन करने के लिये सुरक्षित स्थल माना जाता है, उन्हें FATF की ग्रे लिस्ट में डाल दिया जाता है।यह उस देश के लिये एक चेतावनी के रूप में कार्य करता है कि उसे ब्लैक लिस्ट में शामिल किया जा सकता है। जिन देशों को टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग का समर्थन करने के लिये सुरक्षित स्थल माना जाता है, उन्हें FATF की ग्रे लिस्ट में डाल दिया जाता है।यह उस देश के लिये एक चेतावनी के रूप में कार्य करता है कि उसे ब्लैक लिस्ट में शामिल किया जा सकता है।
ब्लैक लिस्ट: ब्लैक लिस्ट में उन असहयोगी देशों या क्षेत्रों (Non-Cooperative Countries or Territories-NCCT) को शामिल किया जाता है जो आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों का समर्थन करते हैं।



