
जयपुर: दिवाली पर आतिशबाजी करने वालों को इस बार राजस्थान में सरकार की सख्त गाइडलाइन का पालन करना होगा। प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में शामिल प्रदेश के छह जिलों में पटाखे चलाने को लेकर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। इन जिलों में 6 नवंबर तक आतिशबाजी पर पूरी तरह रोक रहेगी। इसके बाद 7 और 8 नवंबर को केवल निर्धारित तीन-तीन घंटे के दौरान ही पटाखे चलाने की अनुमति होगी। 9 नवंबर से फिर पूर्ण प्रतिबंध लागू हो जाएगा।
सरकार ने इन छह जिलों में केवल प्रमाणित ग्रीन पटाखे चलाने की छूट दी है। सामान्य पटाखों, तेज आवाज करने वाले पटाखों और अन्य प्रतिबंधित आतिशबाजी पर रोक रहेगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
ग्रीन पटाखे चलाने के लिए भी तय समय का पालन जरूरी
सरकारी गाइडलाइन के मुताबिक, NCR में आने वाले राजस्थान के छह जिलों में 7 और 8 नवंबर को ही पटाखे चलाने की अनुमति होगी। इसके लिए भी तीन-तीन घंटे का समय निर्धारित किया गया है। तय समय के अलावा आतिशबाजी करना प्रतिबंधित रहेगा।
पटाखे खरीदने वाले लोगों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वे प्रमाणित ग्रीन पटाखे ही खरीदें। केवल दुकानदार के कहने पर किसी पटाखे को ग्रीन मान लेना पर्याप्त नहीं होगा। पैकेट पर निर्धारित प्रमाणन और QR कोड होना अनिवार्य किया गया है।
QR कोड के बिना पटाखों की खरीद-बिक्री पर रोक
सरकार ने ग्रीन पटाखों की बिक्री को लेकर भी नियम सख्त किए हैं। प्रत्येक ग्रीन पटाखे के पैकेट पर QR कोड होना जरूरी होगा। मोबाइल से इस कोड को स्कैन करने पर निर्माता, प्रमाणन और लाइसेंस से जुड़ी जानकारी मिल सकेगी।
बिना QR कोड वाले पटाखों की बिक्री की अनुमति नहीं होगी। इसके साथ ही पटाखे केवल निर्धारित और अधिकृत दुकानों से ही खरीदे जा सकेंगे। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए पटाखों की बिक्री पर भी प्रतिबंध रहेगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य अवैध और गैर-प्रमाणित पटाखों की खरीद-बिक्री पर रोक लगाना है।
दुकानों और गोदामों पर प्रशासन की रहेगी नजर
अवैध पटाखों की बिक्री, भंडारण और सप्लाई रोकने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस को निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। जिला कलेक्टर और पुलिस अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में नियमों का पालन सुनिश्चित करेंगे।
इसके लिए विशेष टीमें गठित की जाएंगी। ये टीमें पटाखों की दुकानों के साथ गोदामों की भी जांच करेंगी। प्रतिबंधित पटाखों का स्टॉक रखने और चोरी-छिपे उनकी सप्लाई करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि प्रतिबंधित पटाखे बाजार तक न पहुंचें।
दिवाली के दौरान रोजाना होगी प्रदूषण की जांच
पटाखों से होने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण पर नजर रखने के लिए राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। मंडल और संबंधित जिला कार्यालय दिवाली के दौरान और उसके बाद रोजाना प्रदूषण के स्तर की जांच करेंगे।
इसकी नियमित रिपोर्ट तैयार की जाएगी और प्रदूषण में होने वाले बदलावों पर नजर रखी जाएगी। गाइडलाइन का उल्लंघन करने वाले लोगों, दुकानदारों और पटाखा निर्माताओं के खिलाफ पर्यावरण संरक्षण कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
शासन सचिव, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन शैलजा देवल के अनुसार, प्रदूषण नियंत्रित करने और तय नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।



