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होटल-अस्पताल में आधार कार्ड की फोटोकॉपी देने का झंझट खत्म! UIDAI का नया डिजिटल सिस्टम लागू, ऐसे होगी पहचान की जांच

नई दिल्ली: होटल में चेक-इन करना हो या अस्पताल में मरीज का दाखिला, अब आधार कार्ड की कागजी फोटोकॉपी जमा करने की जरूरत खत्म होने जा रही है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार से जुड़ी सहमति-आधारित ऑफलाइन वेरिफिकेशन व्यवस्था का दायरा बढ़ा दिया है। इसके तहत पहचान की जांच अब डिजिटल तरीके से की जा सकेगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य लोगों की निजी जानकारी को सुरक्षित रखना और आधार की फोटोकॉपी के गलत इस्तेमाल को रोकना है। UIDAI के मुताबिक, जनवरी से अब तक 300 से अधिक नए संगठनों को इस प्रणाली से जोड़ा जा चुका है।

300 से अधिक संस्थाएं डिजिटल वेरिफिकेशन से जुड़ीं

UIDAI की इस नई व्यवस्था के तहत ऑफलाइन वेरिफिकेशन सीकिंग एंटिटीज (OVSEs) के नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। इसमें होटल, अस्पताल, शिक्षण संस्थान, ट्रैवल कंपनियां और उपभोक्ता सेवाएं देने वाले संगठन शामिल हैं। इन संस्थाओं को अब पहचान सत्यापन के लिए आधार की कागजी कॉपी रखने के बजाय डिजिटल प्रक्रिया अपनाने की सुविधा मिल रही है।

होटल से लेकर अस्पताल तक मिलेगा फायदा

इस डिजिटल व्यवस्था का इस्तेमाल कई क्षेत्रों में किया जा सकेगा।

हॉस्पिटैलिटी और ट्रैवल: होटल में चेक-इन, प्रवेश द्वारों पर पहचान की जांच और यात्रा से जुड़ी वेरिफिकेशन प्रक्रिया को आसान बनाया जाएगा।

हेल्थकेयर और शिक्षा: अस्पतालों में मरीजों के प्रवेश और शिक्षण संस्थानों में दाखिले के दौरान पहचान की डिजिटल जांच की जा सकेगी।

गिग इकॉनमी और उपभोक्ता सेवाएं: डिलीवरी एजेंट, प्लेटफॉर्म वर्कर, सर्विस प्रोवाइडर और इवेंट स्टाफ की पहचान तथा ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया को तेज और सुरक्षित बनाया जा सकेगा।

कैसे काम करेगा UIDAI का नया सिस्टम?

यह व्यवस्था स्मार्टफोन और आधार ऐप के माध्यम से काम करती है। इसमें सबसे अहम बात यह है कि यूजर की स्पष्ट सहमति के बिना उसकी जानकारी साझा नहीं की जाएगी। व्यक्ति खुद तय कर सकेगा कि उसे अपनी पूरी जानकारी साझा करनी है या केवल सत्यापन के लिए जरूरी विवरण देना है।

इस प्रक्रिया में वेरिफिकेशन करने वाली संस्था को व्यक्ति का 12 अंकों वाला मूल आधार नंबर दिखाई नहीं देगा। पूरी जांच ऑफलाइन तरीके से की जाएगी। इसका मतलब है कि पहचान सत्यापन के लिए संबंधित संस्था को UIDAI के केंद्रीय सर्वर या डेटाबेस तक पहुंचने की जरूरत नहीं होगी।

DPDP एक्ट के तहत प्राइवेसी को मिलेगी मजबूती

UIDAI के अनुसार, यह व्यवस्था डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) कानून के सिद्धांतों के अनुरूप तैयार की गई है। इसमें यूजर की सहमति, सीमित डेटा साझा करने और सुरक्षित डिजिटल पहचान सत्यापन पर जोर दिया गया है।

इस बदलाव से आधार की फोटोकॉपी जमा करने और उसके गलत इस्तेमाल की आशंका कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही होटल, अस्पताल और अन्य संस्थानों में पहचान सत्यापन की प्रक्रिया पहले से अधिक आसान और तेज होने की उम्मीद है।

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