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डायरिया रोकथाम व प्रबन्धन के लिए सटीक रिपोर्टिंग जरूरी : सीएमओ

डायरिया से डर नहीं कार्यक्रम की त्रैमासिक समीक्षा बैठक

बदायूँ :‘डायरिया से डर नहीं’ कार्यक्रम की त्रैमासिक समीक्षा बैठक मंगलवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में हुई। पापुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल इंडिया और केनव्यू के सहयोग से आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विकास शर्मा ने कहा कि डायरिया रोकथाम व प्रबन्धन के लिए जरूरी है कि उसकी ई कवच पोर्टल पर सटीक रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जाये। ओआरएस और जिंक कार्नर पर क्यूआर कोड की व्यवस्था हो ताकि मानिटरिंग में आसानी हो। डायरिया को लेकर सामुदायिक जागरूकता के साथ ही समय-समय पर शिविर भी आयोजित किये जाएँ। फ्रंटलाइन वर्कर के गृह भ्रमण पर भी उन्होंने जोर दिया।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों और उप केन्द्रों के स्तर पर डायरिया के केस की वास्तविक रिपोर्टिंग, लम्बित व गलत प्रविष्टियों में सुधार और डाटा की गुणवत्ता को बनाये रखने की हरसंभव कोशिश निरंतर जरूरी है। इससे स्वास्थ्य कार्यक्रमों को धरातल पर उतारने में मदद मिलेगी। इसके अलावा दहगवाँ में प्रस्तावित मेगा हेल्थ कैम्प के सफल आयोजन के लिए अंतर-विभागीय समन्वय, आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता एवं सामुदायिक सहभागिता की योजना पर भी चर्चा की गई। इसके साथ ही परिवार कल्याण कार्यक्रम के अंतर्गत रिपोर्टिंग गैप को दूर कर शत-प्रतिशत एवं सटीक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने तथा शहरी एएनएम के लिए त्रैमासिक गर्भनिरोधक इंजेक्शन अंतरा से संबंधित विशेष प्रशिक्षण आयोजित करने का निर्णय लिया गया।

बैठक के अंत में एसीएमओ (आरसीएच) डॉ राजवीर गंगवार द्वारा सभी संबंधित अधिकारियों, नोडल प्रभारियों एवं टीम सदस्यों को निर्धारित कार्ययोजना पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। विशेष रूप से ई कवच डेटा की गुणवत्ता, केस रिपोर्टिंग की नियमित निगरानी, ओआरएस कार्नर की सुचारू कार्यप्रणाली तथा परिवार कल्याण कार्यक्रम की सटीक रिपोर्टिंग पर ध्यान देने को कहा गया। ओआरएस और जिंक के सही प्रयोग, स्वच्छ पेयजल, हाथों की स्वच्छता तथा समय पर उपचार के संबंध में सामुदायिक परामर्श सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। डायरिया के मामलों की शीघ्र पहचान कर आवश्यकता के अनुसार समयबद्ध रेफरल एवं उपचार सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया। बैठक में जिला कार्यक्रम प्रबन्धक, डिविजनल ई कवच समन्वयक, शहरी स्वास्थ्य केन्द्रों के प्रतिनिधि के साथ ही पीएसआई इंडिया के प्रतिनिधि और फील्ड स्टाफ मौजूद रहा।

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