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पश्चिम बंगाल में चुनावी हार के बाद TMC में हलचल तेज, 10 विधायक बैठक से रहे नदारद; ममता बनर्जी बोलीं- चाहें तो मुझे बर्खास्त कर दें

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में उथल-पुथल लगातार बढ़ती जा रही है। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने साफ शब्दों में कहा है कि वह अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगी। कोलकाता में नवनिर्वाचित विधायकों के साथ हुई अहम बैठक में ममता ने केंद्र सरकार और संवैधानिक संस्थाओं पर तीखा हमला बोला और संघर्ष जारी रखने का ऐलान किया।

चुनाव परिणाम आने के बाद यह पहली औपचारिक बैठक थी, जिसमें ममता बनर्जी ने पार्टी नेताओं और विधायकों को संबोधित करते हुए आक्रामक तेवर दिखाए। उन्होंने कहा कि अगर किसी को कार्रवाई करनी है तो वे उन्हें बर्खास्त कर सकते हैं, लेकिन वह इस्तीफा देने वाली नहीं हैं।

‘मैं इस्तीफा नहीं दूंगी’, ममता का खुला संदेश

बैठक में ममता बनर्जी ने खुद को “स्वतंत्र पंछी” बताते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा राज्य की जनता के लिए काम किया है और वह इस चुनावी नतीजे के बावजूद अपनी नैतिक जीत मानती हैं। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है और तृणमूल कांग्रेस आगे भी लड़ाई जारी रखेगी।

ममता ने यह भी संकेत दिया कि पार्टी अब विपक्ष की भूमिका में सरकार और केंद्र के खिलाफ आक्रामक रणनीति अपनाने जा रही है।

80 में से 10 विधायक बैठक से गायब, बढ़ी अंदरूनी कलह की चर्चा

ममता बनर्जी के आवास पर आयोजित इस बैठक का उद्देश्य विधानसभा में विपक्ष के नेता का चयन और आगे की राजनीतिक रणनीति तय करना था। लेकिन बैठक में कई विधायकों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया।

जानकारी के मुताबिक, टीएमसी के 80 नवनिर्वाचित विधायकों में से केवल 70 विधायक ही बैठक में पहुंचे। 10 विधायकों का गैरहाजिर रहना पार्टी के भीतर संभावित असंतोष और अंदरूनी खींचतान की ओर इशारा माना जा रहा है। चुनावी हार के बाद पार्टी में टूट या बड़े बदलाव की अटकलें भी तेज हो गई हैं।

चुनाव आयोग और केंद्रीय एजेंसियों पर लगाए गंभीर आरोप

बैठक के दौरान ममता बनर्जी ने चुनाव प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने इस चुनाव को लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं बल्कि “अत्याचार” करार दिया। ममता ने पश्चिम बंगाल पुलिस, सीआरपीएफ, मुख्य निर्वाचन अधिकारी और चुनाव आयोग की भूमिका की कड़ी आलोचना की।

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यभर में तृणमूल कांग्रेस के 1500 से ज्यादा पार्टी कार्यालयों पर अवैध कब्जा किया गया है। ममता ने यह भी कहा कि चुनावी घटनाओं के दौरान उन्हें धक्का-मुक्की का सामना करना पड़ा, जिसकी वजह से उनके सीने में दर्द की शिकायत है।

अंतरराष्ट्रीय अदालत जाने की चेतावनी

ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री पर भी चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि कई उम्मीदवारों को “जबरन हराया गया” है।

उन्होंने कहा कि पार्टी इस पूरे मामले को कानूनी रूप से चुनौती देगी और जरूरत पड़ने पर अंतरराष्ट्रीय अदालत का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा। ममता ने आगामी रवींद्र जयंती से नए राजनीतिक संघर्ष की शुरुआत करने की घोषणा करते हुए विधायकों को विधानसभा के पहले दिन काले कपड़े पहनकर विरोध दर्ज कराने का निर्देश दिया। उन्होंने उस दिन को “काला दिन” बताया।

बैठक के दौरान ममता ने यह भी साफ संकेत दिए कि पार्टी के खिलाफ काम करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि विश्वासघात करने वालों को संगठन से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आगे की लड़ाई इंडिया गठबंधन के साथ मिलकर लड़ी जाएगी।

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