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डायबिटीज से पहले शरीर देने लगता है ये संकेत, पहचानें शुरुआती लक्षण और खानपान में करें ये बदलाव

नई दिल्ली: डायबिटीज के मरीजों को अपने खानपान और जीवनशैली का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। चिंता की बात यह है कि कई लोगों को शुरुआती दौर में इस बीमारी का पता ही नहीं चल पाता। इसकी वजह यह है कि प्री-डायबिटीज और डायबिटीज के शुरुआती लक्षण कई बार स्पष्ट नहीं होते। ऐसे में जरूरी है कि शरीर में होने वाले बदलावों को नजरअंदाज न किया जाए और समय पर ब्लड शुगर की जांच कराई जाए।

डायबिटीज में खानपान की भूमिका भी अहम होती है। सही डाइट के जरिए ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। कुछ फल और सब्जियां फाइबर से भरपूर और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा के लिहाज से बेहतर विकल्प हो सकती हैं। हालांकि, किसी भी खाद्य पदार्थ को पूरी तरह शुगर-फ्री मानना सही नहीं है। डायबिटीज के मरीजों को अपनी जरूरत और ब्लड शुगर के स्तर के अनुसार भोजन चुनना चाहिए।

डायबिटीज से पहले शरीर में दिख सकते हैं ये लक्षण

प्री-डायबिटीज के दौरान शरीर में कुछ संकेत दिखाई दे सकते हैं। इनमें गर्दन, बगल, कोहनी या घुटनों के आसपास त्वचा का असामान्य रूप से गहरा और मोटा होना शामिल है। इसे एकैंथोसिस निग्रिकन्स कहा जाता है। यह इंसुलिन रेजिस्टेंस से जुड़ा संकेत हो सकता है।

इसके अलावा पर्याप्त नींद लेने के बाद भी लगातार थकान महसूस होना, बार-बार प्यास लगना और सामान्य से अधिक पेशाब आना भी ब्लड शुगर बढ़ने के संकेत हो सकते हैं। हालांकि, ये लक्षण दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं में भी दिखाई दे सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर डायबिटीज की पुष्टि नहीं की जा सकती। इसकी जांच के लिए डॉक्टर की सलाह से ब्लड शुगर या एचबीए1सी टेस्ट कराना जरूरी है।

चुकंदर को डाइट में करें शामिल

चुकंदर में फाइबर, फोलेट और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसमें कैलोरी की मात्रा भी अपेक्षाकृत कम होती है। इसे सब्जी, सलाद या सीमित मात्रा में जूस के रूप में लिया जा सकता है। हालांकि, चुकंदर में प्राकृतिक शर्करा और कार्बोहाइड्रेट भी होते हैं, इसलिए डायबिटीज के मरीजों को इसकी मात्रा का ध्यान रखना चाहिए।

पत्ता गोभी से मिलेगा फाइबर और विटामिन

पत्ता गोभी फाइबर के साथ विटामिन सी, विटामिन के, विटामिन बी6 और मैंगनीज का अच्छा स्रोत है। इसमें मौजूद पोषक तत्व संतुलित आहार का हिस्सा बन सकते हैं। इसे सब्जी के अलावा सलाद और सैंडविच में भी शामिल किया जा सकता है। कम कार्बोहाइड्रेट वाली सब्जियों में शामिल होने के कारण यह डायबिटीज के मरीजों के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकती है।

पपीता खाते समय मात्रा का रखें ध्यान

पपीते में विटामिन ए, विटामिन सी, फोलेट, पोटेशियम और फाइबर जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसमें सोडियम की मात्रा भी कम होती है। पपीते को संतुलित मात्रा में डाइट में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, इसमें प्राकृतिक शर्करा मौजूद होती है, इसलिए डायबिटीज के मरीजों को इसे सीमित मात्रा में खाना चाहिए। किसी भी फल को ब्लड शुगर नियंत्रित करने वाली दवा का विकल्प नहीं समझना चाहिए।

फूलगोभी है कम कार्बोहाइड्रेट वाला विकल्प

फूलगोभी में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है। यह फाइबर, विटामिन सी, पोटेशियम और फोलेट का भी अच्छा स्रोत है। इसे सब्जी, सूप या सलाद के रूप में खाया जा सकता है। संतुलित डाइट में फूलगोभी शामिल करने से भोजन में पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ाई जा सकती है।

टमाटर भी डाइट के लिए अच्छा विकल्प

टमाटर में विटामिन सी, विटामिन ए, पोटेशियम और लाइकोपीन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है। इसे सलाद, सब्जी या सूप के रूप में खाया जा सकता है। टमाटर को संतुलित भोजन का हिस्सा बनाने से शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं।

पालक से मिलते हैं कई जरूरी पोषक तत्व

पालक फाइबर, विटामिन और खनिजों से भरपूर सब्जी है। इसमें कार्बोहाइड्रेट और प्राकृतिक शर्करा की मात्रा कम होती है। यही वजह है कि इसे डायबिटीज के मरीजों के लिए बेहतर सब्जियों में गिना जाता है। पालक को सब्जी, दाल या सलाद में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, इसे भी संतुलित मात्रा में खाना जरूरी है।

अमरूद को भी बना सकते हैं डाइट का हिस्सा

अमरूद में फाइबर और विटामिन सी अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स अपेक्षाकृत कम होता है। फाइबर की मौजूदगी के कारण यह पाचन के लिए भी उपयोगी हो सकता है। डायबिटीज के मरीज अमरूद को सीमित मात्रा में खा सकते हैं। जूस के बजाय साबुत फल खाना बेहतर विकल्प है, क्योंकि इससे फाइबर भी मिलता है।

डायबिटीज को नियंत्रित रखने के लिए सिर्फ कुछ फल और सब्जियां खाना पर्याप्त नहीं है। नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच भी जरूरी है। यदि बार-बार प्यास लगने, थकान या पेशाब अधिक आने जैसे लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर से संपर्क करें।

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