अमरनाथ यात्रा के बीच बड़ा बदलाव! 4 दिन में 90% से ज्यादा पिघला पवित्र हिम शिवलिंग, बढ़ी श्रद्धालुओं की चिंता

नई दिल्ली: अमरनाथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाला पवित्र हिम शिवलिंग यात्रा शुरू होने के महज चार दिनों के भीतर 90 प्रतिशत से अधिक पिघल गया है। 57 दिनों तक चलने वाली इस यात्रा के शुरुआती चरण में ही हिम शिवलिंग का आकार काफी छोटा हो गया है। बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहुंच रहे श्रद्धालु भी शिवलिंग के तेजी से पिघलने को लेकर चिंता जता रहे हैं।
हिम शिवलिंग के तेजी से पिघलने की ये बताई जा रही हैं वजहें
हिम शिवलिंग के तेजी से पिघलने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। इनमें बढ़ता तापमान, हिमालयी क्षेत्र में गर्मी का असर, मौसम के बदलते पैटर्न और जलवायु परिवर्तन प्रमुख हैं। इसके अलावा एक बड़ा कारण प्राकृतिक वातावरण के बीच लगातार बढ़ रहा विकास और सुविधाओं का विस्तार भी माना जा रहा है। पिछले एक दशक में अमरनाथ यात्रा मार्ग को पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक बनाया गया है, जिससे यात्रा आसान हुई है।
सुविधाएं बढ़ीं तो बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या
अमरनाथ गुफा तक जाने वाले रास्तों का चौड़ीकरण किया गया है। यात्रा मार्ग पर अस्थायी टेंट, दुकानों और लंगर की संख्या बढ़ाई गई है तथा कई व्यवस्थाएं गुफा के काफी नजदीक तक पहुंच गई हैं। हाल ही में अमरनाथ यात्रा के लिए रोपवे परियोजना को भी मंजूरी मिली है। इसके अलावा शेषनाग और पंजतरणी के बीच सुरंग निर्माण की योजना पर भी चर्चा चल रही है। इन सुविधाओं से श्रद्धालुओं को राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन इसके पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
प्रकृति पर असर को लेकर बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों और पर्यावरण से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि विकास कार्यों के कारण अमरनाथ गुफा के आसपास का प्राकृतिक संतुलन प्रभावित होता है और इसका असर हिम शिवलिंग पर पड़ता है तो यह गंभीर चिंता का विषय है। 29 जून को प्रथम पूजा के दौरान हिम शिवलिंग का आकार करीब 12 फीट बताया गया था। उस समय जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा भी पूजा में शामिल हुए थे। इसके बाद 3 जुलाई से यात्रा शुरू हुई और शुरुआती दिनों से ही हिम शिवलिंग का आकार घटने की बात सामने आने लगी।
3 जुलाई से ही घटने लगा था आकार
पहले जत्थे के श्रद्धालुओं के अनुसार, 3 जुलाई को ही हिम शिवलिंग के पिघलने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। 6 जुलाई तक स्थिति और गंभीर हो गई तथा शिवलिंग का आकार घटकर एक फीट से भी कम रह गया। यह पहला अवसर नहीं है जब यात्रा के दौरान हिम शिवलिंग समय से पहले पिघला हो।
पहले भी समय से पहले पिघल चुका है हिम शिवलिंग
वर्ष 2018 में पवित्र हिम शिवलिंग यात्रा शुरू होने के 29 दिन बाद पूरी तरह पिघल गया था। वर्ष 2020 में कोविड काल के दौरान यह 38 दिनों में समाप्त हुआ, जबकि 2022 में 28 दिनों में हिम शिवलिंग पिघल गया था। वर्ष 2024 में भी यह केवल एक सप्ताह के भीतर लगभग समाप्त हो गया था। इस बार भी अनुमान लगाया जा रहा है कि हिम शिवलिंग एक सप्ताह के भीतर पूरी तरह पिघल सकता है।
हर साल बढ़ रही है श्रद्धालुओं की संख्या
दो दशक पहले तक अमरनाथ यात्रा में अधिकतम एक लाख श्रद्धालु ही बाबा बर्फानी के दर्शन कर पाते थे। वर्ष 2003 में यह संख्या बढ़कर करीब 1.70 लाख पहुंची। इसके बाद 2011 और 2012 में छह लाख से अधिक श्रद्धालु यात्रा में शामिल हुए।
वर्ष 2016 में बुरहान वानी की मौत के बाद सुरक्षा कारणों से यात्रियों की संख्या घटकर ढाई लाख से कम रह गई थी। हालांकि वर्ष 2022 के बाद फिर से यात्रियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई और पिछले वर्ष करीब 4.10 लाख श्रद्धालुओं ने अमरनाथ यात्रा की।
पहले 22 फीट तक होता था हिम शिवलिंग का आकार
पहले जब श्रद्धालुओं की संख्या कम होती थी, तब पवित्र हिम शिवलिंग का आकार 18 से 22 फीट तक पहुंच जाता था। अब इसका अधिकतम आकार करीब 12 फीट ही रह गया है और यह भी समय से पहले पिघलने लगा है। लगभग 18 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ गुफा के आसपास तापमान में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। इसके पीछे जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और बढ़ती मानवीय गतिविधियों को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
पहले अमरनाथ यात्रा का पूरा मार्ग प्राकृतिक स्वरूप में था, जहां मिट्टी, चट्टानों और ग्लेशियर के पानी से होकर श्रद्धालुओं को गुजरना पड़ता था। समय के साथ यहां सोलर स्ट्रीट लाइट, विश्राम स्थल, बिजली की लाइनें, जेसीबी मशीनों से रास्तों का चौड़ीकरण और अन्य विकास कार्य हुए हैं। इन बदलावों के कारण क्षेत्र के प्राकृतिक स्वरूप में परिवर्तन देखा जा रहा है। जहां पहले आसपास के पहाड़ बर्फ से ढके रहते थे, वहीं अब कई स्थानों पर पहाड़ सूखे और मिट्टी से भरे दिखाई देने लगे हैं।



