
पटना: बिहार की राजधानी पटना में तलाक से जुड़े एक मामले में हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए महिला को तलाक की मंजूरी दे दी है। निचली अदालत ने गलत कानून के तहत महिला की याचिका खारिज कर दी थी। पटना हाईकोर्ट ने इस गलती को घोर लापरवाही बताते हुए संबंधित न्यायिक अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। अदालत ने पति को पत्नी को स्थायी गुजारा भत्ते के रूप में 50 लाख रुपये देने का आदेश दिया है। यह रकम तीन महीने के भीतर चुकानी होगी।
हाईकोर्ट ने 5 अक्टूबर को सुनाया फैसला
पटना हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और न्यायमूर्ति राणा विक्रम सिंह की खंडपीठ ने 5 अक्टूबर को महिला की अपील स्वीकार की। अदालत ने माना कि महिला अपने पति से अलग रहने और परित्याग के आधार पर विवाह समाप्त कराने की हकदार है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद दोनों के बीच वैवाहिक संबंध खत्म हो जाएगा। वहीं, 50 लाख रुपये का स्थायी गुजारा भत्ता मिलने के बाद पति को हर महीने अलग से भत्ता नहीं देना होगा।
शादी के दो महीने बाद ही अलग हो गए थे पति-पत्नी
महिला की शादी जनवरी 2010 में ईसाई रीति-रिवाजों के अनुसार हुई थी। विवाह के कुछ समय बाद ही दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया। मार्च 2010 में ही पति-पत्नी अलग रहने लगे थे। इसके बाद महिला ने तलाक के लिए अदालत का रुख किया, लेकिन पटना फैमिली कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी। निचली अदालत के फैसले के खिलाफ महिला ने हाईकोर्ट में अपील की।
पति पर क्रूरता और दूसरी महिला से संबंध का आरोप
महिला ने अपने पति पर क्रूरता करने और घर में काम करने वाली एक महिला के साथ अवैध संबंध होने का आरोप लगाया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने पाया कि वह पति के खिलाफ व्यभिचार के आरोपों को साबित नहीं कर सकी। इसके बावजूद अदालत ने परित्याग के आधार पर तलाक की उसकी मांग को स्वीकार कर लिया।
गलत कानून लागू करने पर फैमिली कोर्ट को फटकार
पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि फैमिली कोर्ट ने तलाक के मामले में गलत कानून का सहारा लिया। निचली अदालत ने इंडियन क्रिश्चियन मैरिज एक्ट, 1872 की धारा 10(1) के तहत मामले पर विचार किया था, जबकि ईसाई दंपतियों के तलाक से जुड़े मामलों में डिवोर्स एक्ट, 1869 लागू होता है।
खंडपीठ ने कहा कि संबंधित न्यायिक अधिकारी ने लागू कानून की सही जांच किए बिना आदेश पारित कर दिया। अदालत ने इसे केवल जानकारी की कमी नहीं, बल्कि घोर लापरवाही भी बताया। बेंच ने न्यायिक प्रक्रिया में ऐसी गलती पर चिंता जताते हुए फैमिली कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया।
न्यायिक अधिकारी की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि पटना फैमिली कोर्ट में अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश के पद पर तैनात अधिकारी से लागू कानून की पहचान करने में गंभीर चूक हुई। अदालत ने कहा कि ऐसी लापरवाही न्यायिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। इसी आधार पर वैवाहिक मुकदमा संख्या 5313/2014 में फैमिली कोर्ट द्वारा पारित आदेश को निरस्त कर दिया गया।
पति की आय और संपत्ति के आधार पर तय हुए 50 लाख रुपये
हाईकोर्ट ने स्थायी गुजारा भत्ते की राशि निर्धारित करते समय पति की आय, किराये से होने वाली कमाई और उसकी संपत्ति को ध्यान में रखा। अदालत के मुताबिक, महिला के पास आय का कोई स्वतंत्र स्रोत नहीं है और वह अपने माता-पिता के परिवार पर निर्भर है। उसके रहन-सहन और आर्थिक जरूरतों को देखते हुए 50 लाख रुपये स्थायी गुजारा भत्ते के रूप में देने का आदेश दिया गया। पति को यह रकम तीन महीने के भीतर चुकानी होगी।



