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शरद पवार का बड़ा सियासी दांव! परिसीमन बिल पर मोदी सरकार का समर्थन कर सकती है NCP (SP), विपक्ष की बढ़ी मुश्किलें

मुंबई। संसद में प्रस्तावित परिसीमन (डिलिमिटेशन) विधेयक को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) यानी NCP (SP) ने इस विधेयक पर केंद्र सरकार का समर्थन करने का फैसला किया है। यदि यह निर्णय औपचारिक रूप से लागू होता है, तो INDIA गठबंधन की रणनीति और विपक्षी एकजुटता पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

हालांकि, खबर लिखे जाने तक NCP (SP) की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। पार्टी सूत्रों का दावा है कि परिसीमन विधेयक पर समर्थन देने को लेकर सहमति बनी है और संसद में पार्टी सरकार के पक्ष में मतदान कर सकती है।

विपक्ष के लिए बड़ा झटका माना जा रहा फैसला

NCP (SP) विपक्षी गठबंधन की प्रमुख सहयोगी पार्टियों में शामिल रही है। ऐसे में यदि पार्टी सरकार के पक्ष में खड़ी होती है, तो इसे विपक्ष के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम महाराष्ट्र की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी नए समीकरण बना सकता है।

क्या है परिसीमन विधेयक?

परिसीमन विधेयक का उद्देश्य देश में लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण करना है। प्रस्ताव के अनुसार, नवीनतम जनगणना के आधार पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सीटों का पुनर्वितरण किया जाएगा। इसके तहत संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं में भी बदलाव किया जाएगा, ताकि जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके।

विधेयक के मसौदे के अनुसार, लोकसभा में निर्वाचित सदस्यों की अधिकतम संख्या बढ़ाकर 815 की जा सकती है। वहीं, केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटों का प्रावधान होने पर लोकसभा की कुल संख्या 850 तक पहुंच सकती है।

1971 की जनगणना के आधार पर तय हैं मौजूदा सीटें

वर्तमान में लोकसभा और विधानसभा सीटों का निर्धारण 1971 की जनगणना के आधार पर लागू व्यवस्था के अनुसार है। सरकार का तर्क है कि देश की आबादी और जनसंख्या वितरण में बड़े बदलाव आने के बावजूद लंबे समय से परिसीमन नहीं हुआ है। नए विधेयक के जरिए परिसीमन आयोग का गठन कर निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन किया जाएगा।

अप्रैल में नहीं मिल पाया था आवश्यक समर्थन

इस वर्ष अप्रैल में संसद के विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संवैधानिक संशोधन विधेयक पर मतदान हुआ था। उस समय विधेयक के समर्थन में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े थे। सदन में मौजूद 528 सांसदों के बीच विधेयक पारित होने के लिए 352 मतों की आवश्यकता थी, लेकिन सरकार आवश्यक संख्या जुटाने में 54 वोट से पीछे रह गई थी।

उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि संख्या बल की कमी का अर्थ हार नहीं है और भविष्य में सरकार इस विषय पर फिर प्रयास करेगी।

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