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राजस्थान में ड्राइविंग लाइसेंस पर बड़ा नियम लागू! ट्रैफिक नियम तोड़े तो सिर्फ सस्पेंशन नहीं, ट्रेनिंग के बाद ही मिलेगा DL वापस

जयपुर: राजस्थान में ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस दोबारा हासिल करना अब पहले जितना आसान नहीं रहेगा। सड़क हादसों में बढ़ती मौतों को देखते हुए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने ड्राइविंग लाइसेंस निलंबन से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत गंभीर यातायात उल्लंघन के कारण निलंबित किए गए लाइसेंस तीन महीने पूरे होने के बाद स्वतः सक्रिय नहीं होंगे। लाइसेंस बहाल कराने के लिए अब अनिवार्य रूप से रिफ्रेशर ट्रेनिंग पूरी करनी होगी।

नई व्यवस्था के अनुसार निलंबित ड्राइविंग लाइसेंस को केंद्रीय पोर्टल ‘सारथी’ पर ब्लैकलिस्ट रखा जाएगा। वाहन चालक को निर्धारित रिफ्रेशर ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उसका प्रमाण पत्र पोर्टल पर अपलोड करना होगा। इसके बाद परिवहन विभाग दस्तावेजों और रिकॉर्ड का सत्यापन करेगा। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही लाइसेंस दोबारा सक्रिय किया जाएगा।

सड़क सुरक्षा को लेकर बदले गए नियम

सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि नियम तोड़ने वाले चालकों में सड़क सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी और जागरूकता बढ़ाना है। विभाग का मानना है कि केवल जुर्माना या कुछ समय के लिए लाइसेंस निलंबित करने से आदतन नियम तोड़ने वालों के व्यवहार में अपेक्षित सुधार नहीं आता। इसलिए प्रशिक्षण को अनिवार्य बनाया गया है।

ट्रेनिंग में सिखाए जाएंगे सुरक्षित ड्राइविंग के नियम

रिफ्रेशर ट्रेनिंग के दौरान वाहन चालकों को तेज गति से वाहन चलाने के जोखिम, शराब पीकर ड्राइविंग, गलत दिशा में वाहन चलाने, हेलमेट और सीट बेल्ट के उपयोग सहित सड़क सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण नियमों की जानकारी दी जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चालक दोबारा सड़क पर उतरने से पहले सुरक्षित और जिम्मेदार ड्राइविंग के प्रति पूरी तरह जागरूक हों।

राज्य में ट्रेनिंग सेंटर की कमी बनी चुनौती

हालांकि नई व्यवस्था लागू करने में राजस्थान के सामने एक बड़ी चुनौती भी है। मोटर वाहन नियमों में रिफ्रेशर ट्रेनिंग का प्रावधान वर्ष 2021 में शामिल किया गया था, लेकिन राज्य में अभी तक पर्याप्त अधिकृत प्रशिक्षण केंद्र विकसित नहीं हो सके हैं। ऐसे में निलंबित लाइसेंस वाले चालकों की बहाली प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

वैकल्पिक व्यवस्था तैयार कर रहा परिवहन विभाग

परिवहन विभाग इस समस्या के समाधान के लिए अधिकृत प्रशिक्षण केंद्रों की पहचान करने की तैयारी कर रहा है। साथ ही प्रशिक्षण प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण व्यवस्था शुरू करने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि वाहन चालकों को सुविधा मिल सके।

परिवहन आयुक्त ने बताई नई व्यवस्था की मंशा

परिवहन विभाग के आयुक्त पुरुषोत्तम शर्मा के अनुसार सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए रिफ्रेशर ट्रेनिंग की वैकल्पिक व्यवस्था विकसित की जा रही है। उनका कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि चालकों के व्यवहार में सुधार लाकर सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना है।

विशेषज्ञों ने बताया अहम कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि लाइसेंस बहाली से पहले अनिवार्य प्रशिक्षण की व्यवस्था लागू होने से यातायात नियमों के पालन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही भविष्य में परिवहन विभाग प्रशिक्षण केंद्रों और पूरी प्रक्रिया को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी कर सकता है।

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