उत्तर प्रदेशराज्य

योगी सरकार का बड़ा विजन: लखनऊ में बनेगा विश्वस्तरीय संस्कृति विश्वविद्यालय, भारतीय कला-संगीत को मिलेगी नई वैश्विक पहचान

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भारतीय कला, संस्कृति, संगीत और प्रदर्शन कलाओं को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की परिकल्पना के अनुरूप काकराबाद में भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय का नया अत्याधुनिक परिसर विकसित करने की तैयारी तेज हो गई है। इसे केवल एक संगीत विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के समग्र वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है। इसी उद्देश्य से उच्चस्तरीय सलाहकार समिति की बैठक में देश के प्रतिष्ठित कलाकारों, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने विस्तृत मंथन किया।

सैकड़ों वर्षों की सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा एक मंच

अपर मुख्य सचिव संस्कृति, पर्यटन एवं धर्मार्थ कार्य विभाग की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि नया परिसर आने वाले कई दशकों तक भारतीय सांस्कृतिक विरासत, ज्ञान परंपरा और प्रदर्शन कलाओं का प्रमुख केंद्र बने। विशेषज्ञों ने कहा कि देश में ऐसा कोई संस्थान नहीं है, जहां शास्त्रीय संगीत, नृत्य, रंगमंच, लोक एवं जनजातीय कलाएं, दृश्य एवं ललित कला, साहित्य, दर्शन, योग, अध्यात्म, भारतीय ज्ञान प्रणाली और आधुनिक कला शिक्षा का समन्वित अध्ययन एवं शोध एक ही परिसर में हो सके।

विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस होगा नया परिसर

बैठक में नए परिसर के लिए कई आधुनिक सुविधाओं का प्रस्ताव रखा गया। इसमें संगीत, नृत्य, रंगमंच, योग एवं अध्यात्म, दृश्य एवं ललित कला, साहित्य एवं दर्शन, फिल्म निर्माण तथा कला एवं सांस्कृतिक प्रबंधन के विशेष विद्यालय स्थापित करने का सुझाव दिया गया। साथ ही ध्वनि विज्ञान आधारित अभ्यास कक्ष, आधुनिक नृत्य स्टूडियो, रिकॉर्डिंग स्टूडियो, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित संगीत प्रयोगशाला, भव्य सभागार, ब्लैक बॉक्स थिएटर, शास्त्रीय नृत्य थिएटर, रेसाइटल हॉल और मुक्ताकाशी मंच जैसी अधोसंरचनाएं विकसित करने पर भी सहमति बनी।

डिजिटल रिपॉजिटरी और सांस्कृतिक संग्रहालय भी होंगे तैयार

विशेषज्ञों ने दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण, मौखिक परंपराओं के दस्तावेजीकरण, डिजिटल रिपॉजिटरी तथा भारतीय प्रदर्शन कलाओं के संग्रहालय की स्थापना का भी सुझाव दिया। इसके अलावा सांस्कृतिक स्टार्टअप्स के लिए इनक्यूबेशन सेंटर, मीडिया एवं कंटेंट लैब और बौद्धिक संपदा सहायता केंद्र विकसित कर रचनात्मक अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देने की योजना पर चर्चा हुई।

प्रकृति और भारतीय परंपरा के अनुरूप होगा विकास

बैठक में विशेषज्ञों ने परिसर को भारतीय परंपरा और प्राकृतिक परिवेश के अनुरूप विकसित करने पर बल दिया। व्यापक वृक्षारोपण, खुले परिसर, शिक्षकों के लिए आवासीय व्यवस्था, उत्तर भारतीय और कर्नाटक संगीत का समन्वय, पारंपरिक घरानों को संस्थान से जोड़ने, थिएटर कॉम्प्लेक्स, प्रदर्शनी हॉल और आधुनिक शिक्षण प्रयोगशालाओं के निर्माण का सुझाव भी दिया गया।

देश-विदेश के कलाकारों के लिए बनेगा सांस्कृतिक केंद्र

विशेषज्ञों ने लोक एवं जनजातीय कलाओं, थिएटर, परफॉर्मिंग आर्ट्स, विजुअल आर्ट्स और साहित्य को एकीकृत पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की वकालत की। साथ ही डिजिटल आर्ट सेंटर स्थापित कर विश्वविद्यालय को सभी कलाओं के उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने और देश-विदेश के नामचीन कलाकारों की नियमित भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।

राष्ट्रीय डिजाइन प्रतियोगिता से चुना जाएगा परिसर का स्वरूप

अपर मुख्य सचिव ने बताया कि नए परिसर की वास्तु रूपरेखा तय करने के लिए राष्ट्रीय स्तर की आर्किटेक्चरल डिजाइन प्रतियोगिता आयोजित करने की योजना है। परिसर की संरचना में भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं और विभिन्न घरानों की झलक दिखाई देगी। साथ ही डिजिटल आर्ट्स, एनीमेशन, डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माण, वर्चुअल प्रोडक्शन, म्यूजिक टेक्नोलॉजी, अंतर्विषयक शोध, बौद्ध सांस्कृतिक दर्शन, सांस्कृतिक कूटनीति और भारतीय ज्ञान परंपरा जैसे आधुनिक विषयों को भी शैक्षणिक ढांचे में शामिल करने पर जोर दिया गया।

परंपरा और आधुनिक तकनीक का होगा संगम

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि नया परिसर भारतीय संस्कृति, संगीत और प्रदर्शन कलाओं के समग्र विकास का विश्वस्तरीय केंद्र बनेगा। यहां विद्यार्थियों को परंपरा और आधुनिक तकनीक के समन्वय के साथ उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा, शोध और सृजन के लिए आधुनिक वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य विश्वविद्यालय को विश्व के अग्रणी प्रदर्शन कला संस्थानों की श्रेणी में स्थापित करना है।

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